बॉबी देओल की ‘बंदर’ को दर्शकों ने सराहा, फिर टिकट खिड़की पर क्यों नहीं दिखा असर?

बॉबी देओल की ‘बंदर’ को दर्शकों ने सराहा, फिर टिकट खिड़की पर क्यों नहीं दिखा असर?

बॉबी देओल की नई फिल्म ‘बंदर’ को लेकर रिलीज से पहले और रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा देखने को मिली। फिल्म के कंटेंट, कहानी और कलाकारों के अभिनय की जमकर तारीफ हुई। खास तौर पर बॉबी देओल की परफॉर्मेंस को दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा। इसके बावजूद जब बॉक्स ऑफिस के आंकड़े सामने आए तो नतीजे उम्मीदों के बिल्कुल उलट दिखाई दिए। अच्छी प्रतिक्रियाओं और सकारात्मक समीक्षाओं के बावजूद फिल्म टिकट खिड़की पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी।

5 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म का पहले वीकेंड का कलेक्शन महज 2.45 करोड़ रुपये के आसपास रहा। ऐसे में सवाल उठने लगे कि आखिर जिस फिल्म की इतनी चर्चा हो रही थी, वह कमाई के मामले में पीछे क्यों रह गई। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनका असर सीधे तौर पर फिल्म की कमाई पर पड़ा।

सबसे पहले बात फिल्म के विषय की करें तो ‘बंदर’ कोई हल्की-फुल्की मनोरंजन प्रधान फिल्म नहीं है। यह एक गंभीर क्राइम-ड्रामा और थ्रिलर है, जिसमें सामाजिक मुद्दों, झूठे आरोपों और सोशल मीडिया पर होने वाले ट्रायल जैसे संवेदनशील विषयों को उठाया गया है। ऐसे विषय अक्सर आलोचकों और सिनेमा प्रेमियों को पसंद आते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर पारिवारिक दर्शकों को आकर्षित करना आसान नहीं होता। आमतौर पर दर्शक थिएटर में ऐसी फिल्मों की बजाय मनोरंजन, कॉमेडी, एक्शन या पारिवारिक ड्रामा वाली फिल्में देखना ज्यादा पसंद करते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि गंभीर विषयों वाली फिल्मों के लिए दर्शकों का एक सीमित वर्ग होता है। यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर तारीफें मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग टिकट खरीदकर सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचे। फिल्म को लेकर उत्सुकता तो थी, लेकिन वह टिकट बिक्री में तब्दील नहीं हो सकी।

फिल्म की रिलीज से पहले एक और मुद्दा चर्चा में रहा, जिसने इसके प्रदर्शन को प्रभावित किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के निर्माताओं और देश की प्रमुख मल्टीप्लेक्स चेन के बीच स्क्रीन और शो टाइम को लेकर मतभेद सामने आए थे। बताया गया कि पीवीआर, आईनॉक्स और सिनेपॉलिस जैसे बड़े नेटवर्क में फिल्म को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं रही। इसका असर सीधे फिल्म की उपलब्धता पर पड़ा।

किसी भी फिल्म के लिए शुरुआती दिनों में ज्यादा स्क्रीन और सुविधाजनक शो टाइम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जब दर्शकों को फिल्म देखने के लिए पर्याप्त विकल्प नहीं मिलते तो कई बार वे दूसरी फिल्मों की ओर रुख कर लेते हैं। माना जा रहा है कि ‘बंदर’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। फिल्म को जितनी व्यापक पहुंच मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी और इसका असर शुरुआती कमाई पर साफ दिखाई दिया।

इसके अलावा रिलीज का समय भी फिल्म के लिए चुनौती बन गया। ‘बंदर’ ऐसे समय सिनेमाघरों में आई जब बॉक्स ऑफिस पर पहले से ही मजबूत प्रतिस्पर्धा मौजूद थी। उसी दौरान रिलीज हुई दूसरी फिल्मों ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खासकर राम चरण की ‘पेद्दी’ और वरुण धवन की ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर दर्शकों के बीच पहले से काफी उत्साह देखने को मिल रहा था।

जब एक साथ कई बड़ी फिल्में रिलीज होती हैं तो दर्शकों के सामने विकल्प बढ़ जाते हैं। ऐसे में अक्सर किसी एक फिल्म को नुकसान उठाना पड़ता है। बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स बताती हैं कि उस सप्ताह दर्शकों का बड़ा हिस्सा दूसरी फिल्मों की ओर आकर्षित हुआ, जिसका सीधा असर ‘बंदर’ के कलेक्शन पर पड़ा। जहां प्रतिस्पर्धी फिल्मों को बड़े पैमाने पर दर्शक मिले, वहीं ‘बंदर’ अपेक्षित भीड़ जुटाने में सफल नहीं रही।

निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म होने के कारण भी इसे लेकर अलग तरह की चर्चा रही। अनुराग कश्यप अपने अनोखे और यथार्थवादी सिनेमा के लिए जाने जाते हैं। उनकी फिल्मों को अक्सर समीक्षकों की सराहना मिलती है और सिनेमा प्रेमी उनके काम को पसंद करते हैं। हालांकि, लंबे समय से यह धारणा भी बनी हुई है कि उनकी फिल्मों का दर्शक वर्ग सीमित होता है।

कई दर्शकों का मानना है कि अनुराग कश्यप की फिल्में थिएटर की बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा प्रभावशाली लगती हैं। उनकी कहानियां कंटेंट-ड्रिवन होती हैं, जिनमें मसाला मनोरंजन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। यही कारण है कि कुछ लोग ऐसी फिल्मों को सिनेमाघर में देखने की बजाय ओटीटी रिलीज का इंतजार करना बेहतर समझते हैं। ‘बंदर’ के साथ भी यही सोच कमाई में बाधा बन सकती है।

फिल्म की शुरुआत भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। बॉक्स ऑफिस पर किसी भी फिल्म के लिए पहला दिन बेहद अहम माना जाता है। यदि शुरुआती कमाई मजबूत हो तो फिल्म को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। लेकिन यदि ओपनिंग कमजोर रहती है तो बाद के दिनों में भी इसका असर दिखाई देता है।

सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने पहले दिन लगभग 50 लाख रुपये का कारोबार किया। दूसरे दिन कमाई में कुछ बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा करीब 95 लाख रुपये तक पहुंचा। वहीं रविवार को फिल्म ने लगभग 1 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। तीन दिनों का कुल कारोबार 2.45 करोड़ रुपये के आसपास रहा। यह आंकड़ा एक चर्चित अभिनेता और बड़े निर्देशक की फिल्म के लिए काफी कम माना जा रहा है।

फिल्म को मिले सकारात्मक रिव्यू भी इसकी कमाई को अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा सके। आमतौर पर जब किसी फिल्म को अच्छी माउथ पब्लिसिटी मिलती है तो दूसरे या तीसरे दिन दर्शकों की संख्या बढ़ने लगती है। लेकिन ‘बंदर’ के मामले में यह प्रभाव सीमित दिखाई दिया। दर्शकों की सराहना सोशल मीडिया तक तो रही, लेकिन वह सिनेमाघरों की सीटें भरने में सफल नहीं हुई।

फिल्म विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में केवल अच्छी कहानी होना ही सफलता की गारंटी नहीं है। मार्केटिंग, रिलीज रणनीति, स्क्रीन संख्या, प्रतिस्पर्धा और दर्शकों की पसंद जैसे कई कारक मिलकर किसी फिल्म का भविष्य तय करते हैं। ‘बंदर’ के मामले में कंटेंट को सराहना मिली, लेकिन अन्य मोर्चों पर फिल्म को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि फिल्म की असफल शुरुआत का मतलब यह नहीं है कि इसके काम को नकार दिया जाए। कई बार कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बड़ा कारोबार नहीं कर पातीं, लेकिन समय के साथ उन्हें कल्ट स्टेटस मिल जाता है। ‘बंदर’ को लेकर भी कुछ दर्शकों का मानना है कि इसकी असली ताकत इसकी कहानी और प्रस्तुति में है, जिसे भविष्य में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर और बड़ा दर्शक वर्ग मिल सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि बॉबी देओल और अनुराग कश्यप की इस फिल्म को प्रशंसा तो भरपूर मिली, लेकिन वह प्रशंसा टिकट बिक्री में नहीं बदल सकी। गंभीर विषय, सीमित दर्शक वर्ग, मल्टीप्लेक्स विवाद, मजबूत प्रतिस्पर्धा और धीमी ओपनिंग जैसे कई कारण मिलकर फिल्म की बॉक्स ऑफिस यात्रा को प्रभावित करते नजर आए।