रूस और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए नए समझौतों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन, मादक पदार्थों की तस्करी और सुरक्षा सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर साथ काम करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दक्षिण और मध्य एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच कई देश अपने रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने में जुटे हुए हैं।
इन समझौतों को लेकर भारत समेत कई देशों में चर्चा हो रही है कि क्या मॉस्को और इस्लामाबाद के बीच बढ़ती नजदीकियां भविष्य में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और पाकिस्तान का सहयोग मुख्य रूप से सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक हितों पर आधारित है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दरअसल, किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़ी बैठकों के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई। इसी दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
बैठक के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि दोनों देशों ने अवैध माइग्रेशन की समस्या से निपटने के लिए संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई है। इसके तहत ऐसे नागरिकों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा, जो दूसरे देश में गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं।
इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। ड्रग नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े मामलों में सूचनाओं के आदान-प्रदान, जांच एजेंसियों के बीच समन्वय और संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान के आसपास सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क को देखते हुए यह समझौता दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
SCO बैठक के दौरान मोहसिन नकवी ने केवल रूस ही नहीं बल्कि ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी अलग-अलग मुलाकातें कीं। इन बैठकों में सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, क्षेत्रीय शांति और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से मध्य एशियाई देशों और रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य व्यापारिक अवसरों का विस्तार करना, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और क्षेत्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूत बनाना है।
रूस और पाकिस्तान के रिश्तों में पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। कभी एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने वाले ये दोनों देश अब कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आतंकवाद विरोधी अभियानों में बढ़ती भागीदारी इस बदलते संबंध की झलक देती है।
रक्षा क्षेत्र की बात करें तो रूस ने पाकिस्तान को सीमित स्तर पर सैन्य उपकरण और सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराई है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और भारत के बीच रक्षा सहयोग की तुलना में पाकिस्तान को मिलने वाला सहयोग काफी छोटा और सीमित है। इसके बावजूद रूस और पाकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यासों का आयोजन लगातार होता रहा है, जिससे दोनों देशों के सुरक्षा संबंध मजबूत हुए हैं।
ऊर्जा क्षेत्र भी दोनों देशों की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से ऊर्जा संकट की चुनौतियों से जूझ रहा है और इसी वजह से वह नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में है। रूस ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में रूस ने पाकिस्तान को तेल की आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़े कई समझौते भी सामने आए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने पाकिस्तान को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराने में रुचि दिखाई है। इससे पाकिस्तान को अपनी ऊर्जा लागत कम करने में मदद मिल सकती है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को लेकर भी बातचीत जारी है, जिसमें तेल और गैस आपूर्ति से जुड़े विभिन्न प्रस्ताव शामिल हैं।
केवल ऊर्जा ही नहीं, कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने रूस से गेहूं आयात को लेकर भी समझौते किए हैं। खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के कदम पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि रूस की विदेश नीति वर्तमान समय में बहु-आयामी साझेदारियों पर आधारित है। मॉस्को एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाना भी उसकी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि भारत और रूस के बीच दशकों पुराने मजबूत संबंध आज भी कायम हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और कूटनीतिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में रूस और पाकिस्तान की बढ़ती बातचीत को सीधे तौर पर भारत-रूस संबंधों के विकल्प के रूप में देखना जल्दबाजी हो सकती है।
फिर भी अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संपर्कों पर भारत की नजर स्वाभाविक रूप से बनी रहेगी। खासकर तब, जब दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
फिलहाल बिश्केक में हुए ये नए समझौते इस बात का संकेत जरूर देते हैं कि रूस और पाकिस्तान अपने संबंधों को केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के बीच यह बढ़ता सहयोग किस स्तर तक पहुंचता है और इसका क्षेत्रीय राजनीति तथा रणनीतिक समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है।




