हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन और स्वामित्व से जुड़े विवादों के समाधान के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने लाल डोरा और स्वामित्व योजना से संबंधित शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब इन मामलों की सुनवाई और समाधान केवल अधिकृत राजस्व अधिकारी ही करेंगे।
विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से सभी जिला उपायुक्तों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितकरण, अभिलेखीकरण एवं समाधान) अधिनियम-2025 के तहत आने वाली शिकायतों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही निपटाया जाए। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण नागरिकों को जमीन संबंधी मामलों में अधिक पारदर्शी और तेज राहत मिल सकेगी।
अब बीडीपीओ और डीडीपीओ कार्यालयों में नहीं जाएंगे मामले
सरकार के संज्ञान में आया था कि कई जिलों में लाल डोरा और स्वामित्व योजना से जुड़ी शिकायतें अभी तक बीडीपीओ और डीडीपीओ कार्यालयों में भेजी जा रही थीं। इससे न केवल फाइलों की आवाजाही बढ़ रही थी, बल्कि शिकायतों के समाधान में भी काफी देरी हो रही थी।
नई व्यवस्था के तहत अब ऐसे मामलों की जिम्मेदारी सीधे राजस्व विभाग के अधिकृत अधिकारियों को दी गई है। नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर के अधिकारी इन मामलों की सुनवाई करेंगे और अधिनियम में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार फैसले लेंगे।
सरकार का कहना है कि इससे जवाबदेही तय होगी और लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा फायदा
ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से लाल डोरा, आबादी भूमि और संपत्ति अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई मामलों में रिकॉर्ड अपडेट न होने, सीमांकन विवाद और स्वामित्व प्रमाण से जुड़ी समस्याओं के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों को सीधे राजस्व अधिकारियों के पास भेजने से प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। इससे मामलों का रिकॉर्ड बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा और विवादों के निपटारे में कानूनी स्पष्टता भी आएगी।
अधिनियम के तहत तय होगी प्रक्रिया
विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी शिकायतों का निस्तारण अधिनियम की धारा 15 और 16 के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामलों में अनावश्यक देरी न हो और तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जानकारी के अनुसार यह अधिनियम जनवरी 2026 में अधिसूचित किया गया था, जबकि इसे नवंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। इसके बाद से सरकार लगातार ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर नई व्यवस्थाएं लागू कर रही है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने कहा कि अब लोगों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग विभागों में भटकना नहीं पड़ेगा। शिकायतकर्ता सीधे संबंधित राजस्व अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से शिकायतों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और ग्रामीणों को समय पर न्याय मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि भूमि स्वामित्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़े और विवादों का समाधान कानूनी तरीके से तेजी से हो।
डिजिटल रिकॉर्ड और सर्वे प्रक्रिया को भी मिलेगी मजबूती
सरकार स्वामित्व योजना के तहत गांवों में संपत्ति रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से अपडेट करने पर भी जोर दे रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड सही और ऑनलाइन उपलब्ध होंगे तो भविष्य में विवादों की संख्या कम होगी।
इसके अलावा ड्रोन सर्वे और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गांवों की संपत्तियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि लोगों को अपनी संपत्ति का स्पष्ट अधिकार मिल सके और कानूनी विवादों में कमी आए।




