‘ये चर्बी वाला तेल (जानवरों की पिघली हुई चर्बी) है, जो जम गई है, इसे गर्म किया, अब इसमें थोड़ा-सा देसी घी मिलाएंगे, इससे देशी घी वाली खुशबू आएगी। अब ये तैयार है। डिब्बों में पैक कर बाजार में बेच सकते हैं। ये हम 90 रुपए किलो देंगे। बाजार में 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। ये यूपी सहित दूसरे प्रदेशों में भी जाता है। पूरे देश में ये ही चल रहा है।’ ये कहना है पूजा में उपयोग होने वाला घी बनाने वालों का। ये जानवरों की पिघली हुई चर्बी से घी तैयार कर रहे हैं। ये यूपी में खूब बिक रहा है। इसकी 2 वजह हैं। पहली- बड़े से बड़े शॉपिंग मॉल से लेकर छोटी से छोटी दुकान पर ये आसानी से मिल रहा है। दूसरी- खाने वाले देसी घी की तुलना में इसकी कीमत आधी से भी कम है। इसलिए लोग इसे बगैर सोचे-समझे खरीद रहे हैं और भगवान के सामने घी का दीपक लगाकर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी में ये अपवित्र घी कहां बन रहा है? कैसे बन रहा है? जानवरों की चर्बी कहां से आ रही है? बस, इन्हीं सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने 15 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… कुछ महीने पहले आगरा के एत्मादपुर में पुलिस ने 3 घरों से देसी घी लिखे टीन के 82 डिब्बे जब्त किए। यहां जानवरों की चर्बी और हडि्डयां भी मिलीं। जांच में सामने आया कि यहां गाय, भैंसों को मारकर उनकी चर्बी से घी बनाकर ब्रांडेड कंपनी के देसी घी के नाम से बेचा जा रहा था। हमने आगरा से इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। यहां से पता चला कि कानपुर और उन्नाव के स्लाटर हाउस में ये काम धड़ल्ले से हो रहा है। हम लखनऊ से 90 किमी दूर कानपुर–उन्नाव की बाॅर्डर पर बिजलामऊ पहुंचे। यहां ऊबड़खाबड़ और कांटेदार झाड़ियों वाले रास्ते मिले। 1 किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन चिमनियां धुआं उगल रही थीं। यहां जानवरों के चमड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े कर खाद बनाई जा रही थी। किसी बाहरी व्यक्ति का कारखानों में प्रवेश प्रतिबंधित था। यहां हमारी कहानी का पहला किरदार मिला– राहुल। इससे हमारी बातचीत शुरू हुई… रिपोर्टर: यहां चर्बी वाला घी कहां मिलता है? राहुल: वो तो बंथर में। यहां तो खाद बनती है। रिपोर्टर: बंथर कहां है? राहुल: यहां से उन्नाव रोड पर 3 किलोमीटर पर है, यूपीएसआईडी (Uttar Pradesh State Industrial Development Authority) में। रिपोर्टर: कोई है जो काम करा दे? राहुल: हां, एक आदमी है जो ये सब काम करता है। बात करते हैं उससे। (किसी व्यक्ति को फोन लगाकर) हेलो… हमारे पास व्यापारी हैं, जो चर्बी वाले घी का काम करना चाहते हैं, कोई सिस्टम हो तो करवा दीजिए। पूजा वाला घी का काम करेंगे ये। हम नंबर दिए दे रहे हैं। ये आपसे बात कर लेंगे। रिपोर्टर: क्या नाम है उसका? राहुल: आतिफ भाई… ये नंबर है उसका। वो आपका काम करा देगा। रिपोर्टर: ठीक है। यहां से हम तत्काल निकलना चाहते थे, क्योंकि चारों ओर चमड़ा जलने की बदबू आ रही थी। हम मेन रोड पर पहुंचे और आतिफ को फोन मिलाया। रिपोर्टर: राहुल ने आपका नंबर दिया है। आतिफ: जी हां, फोन किया था उसने। रिपोर्टर: राहुल ने जो बताया है, वही वाला घी चाहिए। आतिफ: घी बनाने के लिए कायदे से ये आइटम (चर्बी) तो है ही नहीं। बस ये है कि ये हिन्दुस्तान है। यहां सब कुछ होता है। रिपोर्टर: हमको साबुन वाला नहीं, वही (पूजा) वाला चाहिए। आतिफ: साबुन वाले में हल्की महक होगी। वो (पूजा) वाले में महक नहीं होगी। बस यही अंतर है। और महक ऐसी होगी कि आपको उसमें यह नहीं पता चलेगा कि ये चर्बी वाला है। वो महक थोड़ा दूसरे टाइप की होगी। रिपोर्टर: यानी कि हमको वहां से केवल गली हुई चर्बी मिलेगी। आतिफ: हां, गली हुई चर्बी मिलेगी। आपको उसको सिर्फ पैक करना होगा। हम लाेग भी टैलो का काम करते हैं। पैकिंग में मार्जिन है। हम आपको विकास भाई का नंबर देंगे। वो रिसेल का काम करते हैं। वो स्लाटर हाउस से टैलो लेकर पैकिंग करके सप्लाई करते हैं। आपको कुछ नहीं करना है, उनसे माल लेकर बेचना रहेगा। रिपोर्टर: ठीक है तो कल मिलो आप। आतिफ: सुनो, विकास भाई का नंबर दे देते हैं आपको। उनसे बना बनाया माल मिल जाएगा। ले जाकर बेचिए। हम कल उनसे आपकी बात करा देंगे। आप कल आओ… मिलो। उनसे बात करा देंगे। आपका आसानी से काम हो रहा है कि यहां आना भी न पड़े और आपको माल भी मिल जाए। रिपोर्टर: अच्छा। आतिफ: हम लोग भी टैलो का काम करते हैं, जो साबुन वाला है। 25 हजार लीटर हफ्ते में टैंकर बेचते हैं। अगले दिन भी आतिफ सामने नहीं आया अगले दिन हम आतिफ से मिलने पहुंचे। फोन लगाया लेकिन वह सामने नहीं आया। जब शाम को हमने मैसेज किया तो उसने जुनैद का नंबर दिया। जुनैद में एक घंटे बाद हमको चांदपुर इंडस्ट्रियल एरिया में रुस्तम फैक्ट्री के पास बुलाया। हमने एक गैलेन (डिब्बा) खरीदा और शाम सात बजे इंडस्ट्रियल एरिया पहुंचे। जुनैद आगे और हम पीछे चल रहे थे। रास्ते में जुनैद ने दिलीप को बाइक पर बैठाया। वे दोनों हमें एक फैक्ट्री पर ले गए। जुनैद और दिलीप ने गेट पर किसी से बात की। अंदर से बताया कि टैलो मिल जाएगा, लेकिन क्वालिटी ठीक नहीं है। दोनों दूसरे स्लाटर हाउस ले गए। यह बहुत बड़ा था। यहां मंसूर से हमारी बात हुई। रिपोर्टर: मंसूर भाई आप हैं? मंसूर: जी भैया। रिपोर्टर: टैलो चाहिए। मंसूर: ठीक है, अभी दूसरी जगह से दिला देते हैं। रिपोर्टर: यहां से नहीं मिल पाएगा? मंसूर: यहीं का तेल दूसरी जगह से मिलेगा। रिपोर्टर: दरअसल, हमको मिल रहा था पर वह ओरिजिनल नहीं था। मंसूर: इस टाइम मुश्किल है। ये जम जाता है तो इसे गर्म करना पड़ता है। आप मॉर्निंग में ले लीजिएगा। रिपोर्टर: देखिए, अभी दिलवा दीजिए। मंसूर: ठीक है, अभी वो टैंकर लेकर जाएगा। उसको बोल दिया हूं। आप जाकर ले लीजिएगा। स्टैंडर्ड फ्रोजन स्लाटर फैक्ट्री के अंदर से जानवरों की चर्बी से बने घी का टैंकर निकला और एक दूसरे स्लाटर हाउस पहुंचा। ड्राइवर शकील गेट खोलकर बाहर आया। शकील: आपकी भाई से बात हुई है? रिपोर्टर: हां, मंसूर ने आपके मालिक शमशाद भाई से बात कर ली है। शकील: ठीक है, वही जानना चाहते हैं। रिपोर्टर: आप जो पैसा कहेंगे, वो दे देंगे। शकील: 77 रुपए किलो का रेट लगेगा। रिपोर्टर: बढ़िया वाला ही रहेगा न? शकील: उसमें कोई दिक्कत होगी तो हमारा गला पकड़ लीजिएगा। हमारे पास यही माल आता है। चाहें टैंकर से भेजें या टीना में भरें। रिपोर्टर: जम तो जाएगा न? शकील: अगर न जमे तो कहिएगा। गारंटी दे रहा हूं। पन्नी में लाकर तौलें। रिपोर्टर: नहीं, गैलन (डिब्बे) में लाकर दीजिए। शकील: ठीक है, ये टैंकर वाला माल गर्म है। इसका बिल बाउचर बन गया है। ये बाहर जाएगा। यही माल टीन में रखा है। उसी को गर्म करके दे रहे हैं। गार्ड बोला– टैलो के बारे में कुछ नहीं बता सकते शकील चर्बी वाला घी लेने चला गया। गार्ड रुम में गार्ड से हमने पूछा– यह टैलो कहां जाएगा? उसने कहा– इस बारे में न तो हम कुछ बता सकते हैं, न ही बताने का परमिशन है। जो भी बात करना है, आप मालिक से कर सकते हैं। मतलब इसके विषय में बातचीत नहीं कर सकते। ये क्या है, कहां से आता है, कहां जाता है। इस विषय में कोई जानकारी नहीं दे सकते। ये ऑर्डर नहीं है हमको। इसी बीच शकील चर्बी वाला घी लेकर आ गया। अपना ब्रांड बनाकर बेचें चर्बी वाला घी शकील: ये लीजिए घी। रिपोर्टर: कितना होगा? शकील: यही, साढ़े छह किलो होगा। माल बहुत अच्छा है। चाहें तो आप चलकर देख लीजिए। रिपोर्टर: हां, चलिए… पास से देख लें। शकील: ये देखिए। कितना बढ़िया माल है। अब ये पूरी तरह से तैयार है। रिपोर्टर: यानी अपने ब्रांड में ले जाकर बेचें? शकील: हां, अपने डिब्बे में पैक कर लेना। रिपोर्टर: यह माल कहां जाएगा? शकील: यह टैंकर असम जाएगा। रिपोर्टर: अब इसमें कुछ डालने की जरूरत है कि नहीं? शकील: नहीं, एकदम तैयार है। यदि इससे थोड़ा और अच्छा करना है तो इसमें हाइड्रोजन डाल सकते हैं। ये जितना है, इसमें प्लास्टिक के गिलास से एक गिलास बहुत है। रिपोर्टर: कहां मिलता है? शकील: हम लोग कानपुर से लाते हैं। दो नंबर वाले माल में डालने के लिए लाते हैं। रिपोर्टर: इसमें कुछ और डालना होगा। शकील: नहीं एकदम तैयार है। इसमें कोई जरूरत ही नही है। अपनी कंपनी के ब्रांड में डालकर बेचें। अब सबसे अहम सवाल… चर्बी से पूजा का घी कैसे बनता है? आइए जानते हैं शकील से साढ़े छह किलो चर्बी वाला घी यानी टैलो लेकर हम जाजमऊ के एक घर ले गए। यहां मुजाहिद ने पूजा का घी बनाने का तरीका बताया। उसने चेहरे पर नकाब बांध रखा था। मुजाहिद: ये चर्बी वाला तेल है, जो जम गया है। इसे गर्म कर रहे हैं। रिपोर्टर: गर्म करके क्या करोगे? मुजाहिद: गर्म करके इसमें देसी घी मिलाएंगे। रिपोर्टर: देशी घी क्यों? मुजाहिद: देशी घी डाल देने से खुशबू देशी घी जैसे आने लगेगी। रिपोर्टर: कितना डालना होता है? मुजाहिद: इतने (छह किलो) में ढाई सौ ग्राम। रिपोर्टर: और इसमें क्या-क्या डालेंगे? मुजाहिद: इसमें पहले से ही सबकुछ पड़ा हुआ है। रिपोर्टर: अब क्या करेंगे? मुजाहिद: इसको अब डिब्बों में भर देंगे। रिपोर्टर: इस पीछे वाले कमरे में भी आपने माल रखा है क्या? मुजाहिद: माल हमारा सप्लाई हो चुका है। यह सैंपल के तौर पर है। रिपोर्टर: हमको कितने में मिल जाएगा? मुजाहिद: 90 रुपए किलो मिल जाएगा। बाहर हमारा माल 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। रिपोर्टर: यह माल कहां-कहां तक जाता है? मुजाहिद: कानपुर, उन्नाव, लखनऊ के अलावा दूसरे जिलों और प्रदेशों में। पूरे देश में ये ही चल रहा है। 100 ग्राम से लेकर 1 लीटर तक का पैक आपको मिल जाएगा। चलिए, अब दुकानों पर… जहां ये बिक रहा लखनऊ के यहियागंज मार्केट में जब हमने व्यापारियों से पूछा कि चर्बी वाला घी पूजा के लिए क्यों बेच रहे हैं तो उनका कहना था– हम लोग बेचना नहीं चाहते, लेकिन लोग पूजा के लिए सस्ता वाला घी मांगते हैं। तेजाबी चर्बी से कैंसर का खतरा राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेज (एनएचएमसी), लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. डीके सोनकर का कहना है कि तेजाबी चर्बी से बनने वाला घी खाने से उल्टी, दस्त, एनीमिया, चर्मरोग हो सकते हैं। चर्बी में केमिकल रिएक्शन से फीनॉल एवं एपॉक्सी बन जाता है। इसमें स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक ट्रांस फैट, एल्केनॉल भी होते हैं। प्रदूषण की वजह बन रहा चर्बी वाला घी लखनऊ विवि के रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर भरत कुमार का कहना है कि जानवरों की चर्बी या वसा को जलाने पर कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के साथ-साथ डाई ऑक्सिन जैसे परसिसटेंट एनवायरमेंटल पॉल्यूटेंट्स (Persistent Environmental Pollutants) निकलते हैं। ये सभी प्रदूषक मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माने गए हैं। डाई ऑक्सिन विशेष रूप से खतरनाक रासायनिक यौगिक है, जो जानवरों की वसा में पाया जाता है। यह लंबे समय तक पर्यावरण तथा मानव शरीर में बने रहते हैं। इससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब पढ़िए, क्या बोल रहे हैं अफसर उन्नाव में स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी बनने के मामले पर भास्कर ने सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त प्रियंका सिंह से बातचीत की। जब उनसे पूछा कि स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी निकलता है, आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं अभी नई आई हूं। ———————- भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- आपकी पूजा में केमिकल वाला नकली चंदन:यूपी में खिन्नी की लकड़ी पर परफ्यूम; ऐसे 100 कारखाने, कैमरे में देखिए ठगी ये लकड़ी होती है… खिन्नी की, इसमें कोई महक नहीं होती। इसमें कंपाउंड (केमिकल मिक्सचर) मिलाया जाता है चंदन का… फिर यह महकती है चंदन जैसी। जब जलइयो चंदन-सी खुशबू होगी। अगर इसमें असली चंदन की लकड़ियां मिला दें, तो पहचानना मुश्किल हो जाता है। हम ही लोग पहचान पाते हैं। ये हैं यूपी के चंदन के बड़े कारोबारी, लेकिन ये चंदन होता नकली है। पढ़ें पूरी खबर महिलाएं कागजों पर ‘नेता’, कुर्सी पर पति का कब्जा:भास्कर टीम मिलने पहुंची तो पति बोले- हम ही सबकुछ संवैधानिक पदों पर महिलाओं को आरक्षण देने के बाद महिलाएं कितनी एक्टिव हुई हैं? क्या ये अपने क्षेत्र का काम खुद संभाल रही हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर में 10 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। हम कुशीनगर से 25 किमी दूर सेवरही ब्लॉक पहुंचे। ऑफिस में भीड़ थी। अंदर गए तो महिला ब्लॉक प्रमुख अनु तिवारी की कुर्सी खाली थी। पढ़िए पूरी खबर मंत्री-विधायकों के गांवों में भी नहीं पहुंचा ‘हर घर जल’:विधायक की मां हैंडपंप से भर रहीं पानी; यूपी के जलशक्ति मंत्री का गांव भी प्यासा ‘रामप्यारी देवी। उम्र 75 साल, लेकिन जोर लगाकर हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर। रामप्यारी देवी कोई आम महिला नहीं। हमीरपुर के भाजपा विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति की मां हैं। इनके घर में जल जीवन मिशन की टोटी है, लेकिन पानी नहीं। पौथिया बुजुर्ग गांव विधायक डॉ. मनोज प्रजापति का पैतृक गांव है। सरकारी रिकॉर्ड में यहां जल जीवन मिशन का काम 100% हो गया है। अफसरों का दावा है कि यहां हर घर में पानी आ रहा है। पढ़ें पूरी खबर ‘ये चर्बी वाला तेल (जानवरों की पिघली हुई चर्बी) है, जो जम गई है, इसे गर्म किया, अब इसमें थोड़ा-सा देसी घी मिलाएंगे, इससे देशी घी वाली खुशबू आएगी। अब ये तैयार है। डिब्बों में पैक कर बाजार में बेच सकते हैं। ये हम 90 रुपए किलो देंगे। बाजार में 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। ये यूपी सहित दूसरे प्रदेशों में भी जाता है। पूरे देश में ये ही चल रहा है।’ ये कहना है पूजा में उपयोग होने वाला घी बनाने वालों का। ये जानवरों की पिघली हुई चर्बी से घी तैयार कर रहे हैं। ये यूपी में खूब बिक रहा है। इसकी 2 वजह हैं। पहली- बड़े से बड़े शॉपिंग मॉल से लेकर छोटी से छोटी दुकान पर ये आसानी से मिल रहा है। दूसरी- खाने वाले देसी घी की तुलना में इसकी कीमत आधी से भी कम है। इसलिए लोग इसे बगैर सोचे-समझे खरीद रहे हैं और भगवान के सामने घी का दीपक लगाकर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। यूपी में ये अपवित्र घी कहां बन रहा है? कैसे बन रहा है? जानवरों की चर्बी कहां से आ रही है? बस, इन्हीं सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने 15 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… कुछ महीने पहले आगरा के एत्मादपुर में पुलिस ने 3 घरों से देसी घी लिखे टीन के 82 डिब्बे जब्त किए। यहां जानवरों की चर्बी और हडि्डयां भी मिलीं। जांच में सामने आया कि यहां गाय, भैंसों को मारकर उनकी चर्बी से घी बनाकर ब्रांडेड कंपनी के देसी घी के नाम से बेचा जा रहा था। हमने आगरा से इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। यहां से पता चला कि कानपुर और उन्नाव के स्लाटर हाउस में ये काम धड़ल्ले से हो रहा है। हम लखनऊ से 90 किमी दूर कानपुर–उन्नाव की बाॅर्डर पर बिजलामऊ पहुंचे। यहां ऊबड़खाबड़ और कांटेदार झाड़ियों वाले रास्ते मिले। 1 किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन चिमनियां धुआं उगल रही थीं। यहां जानवरों के चमड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े कर खाद बनाई जा रही थी। किसी बाहरी व्यक्ति का कारखानों में प्रवेश प्रतिबंधित था। यहां हमारी कहानी का पहला किरदार मिला– राहुल। इससे हमारी बातचीत शुरू हुई… रिपोर्टर: यहां चर्बी वाला घी कहां मिलता है? राहुल: वो तो बंथर में। यहां तो खाद बनती है। रिपोर्टर: बंथर कहां है? राहुल: यहां से उन्नाव रोड पर 3 किलोमीटर पर है, यूपीएसआईडी (Uttar Pradesh State Industrial Development Authority) में। रिपोर्टर: कोई है जो काम करा दे? राहुल: हां, एक आदमी है जो ये सब काम करता है। बात करते हैं उससे। (किसी व्यक्ति को फोन लगाकर) हेलो… हमारे पास व्यापारी हैं, जो चर्बी वाले घी का काम करना चाहते हैं, कोई सिस्टम हो तो करवा दीजिए। पूजा वाला घी का काम करेंगे ये। हम नंबर दिए दे रहे हैं। ये आपसे बात कर लेंगे। रिपोर्टर: क्या नाम है उसका? राहुल: आतिफ भाई… ये नंबर है उसका। वो आपका काम करा देगा। रिपोर्टर: ठीक है। यहां से हम तत्काल निकलना चाहते थे, क्योंकि चारों ओर चमड़ा जलने की बदबू आ रही थी। हम मेन रोड पर पहुंचे और आतिफ को फोन मिलाया। रिपोर्टर: राहुल ने आपका नंबर दिया है। आतिफ: जी हां, फोन किया था उसने। रिपोर्टर: राहुल ने जो बताया है, वही वाला घी चाहिए। आतिफ: घी बनाने के लिए कायदे से ये आइटम (चर्बी) तो है ही नहीं। बस ये है कि ये हिन्दुस्तान है। यहां सब कुछ होता है। रिपोर्टर: हमको साबुन वाला नहीं, वही (पूजा) वाला चाहिए। आतिफ: साबुन वाले में हल्की महक होगी। वो (पूजा) वाले में महक नहीं होगी। बस यही अंतर है। और महक ऐसी होगी कि आपको उसमें यह नहीं पता चलेगा कि ये चर्बी वाला है। वो महक थोड़ा दूसरे टाइप की होगी। रिपोर्टर: यानी कि हमको वहां से केवल गली हुई चर्बी मिलेगी। आतिफ: हां, गली हुई चर्बी मिलेगी। आपको उसको सिर्फ पैक करना होगा। हम लाेग भी टैलो का काम करते हैं। पैकिंग में मार्जिन है। हम आपको विकास भाई का नंबर देंगे। वो रिसेल का काम करते हैं। वो स्लाटर हाउस से टैलो लेकर पैकिंग करके सप्लाई करते हैं। आपको कुछ नहीं करना है, उनसे माल लेकर बेचना रहेगा। रिपोर्टर: ठीक है तो कल मिलो आप। आतिफ: सुनो, विकास भाई का नंबर दे देते हैं आपको। उनसे बना बनाया माल मिल जाएगा। ले जाकर बेचिए। हम कल उनसे आपकी बात करा देंगे। आप कल आओ… मिलो। उनसे बात करा देंगे। आपका आसानी से काम हो रहा है कि यहां आना भी न पड़े और आपको माल भी मिल जाए। रिपोर्टर: अच्छा। आतिफ: हम लोग भी टैलो का काम करते हैं, जो साबुन वाला है। 25 हजार लीटर हफ्ते में टैंकर बेचते हैं। अगले दिन भी आतिफ सामने नहीं आया अगले दिन हम आतिफ से मिलने पहुंचे। फोन लगाया लेकिन वह सामने नहीं आया। जब शाम को हमने मैसेज किया तो उसने जुनैद का नंबर दिया। जुनैद में एक घंटे बाद हमको चांदपुर इंडस्ट्रियल एरिया में रुस्तम फैक्ट्री के पास बुलाया। हमने एक गैलेन (डिब्बा) खरीदा और शाम सात बजे इंडस्ट्रियल एरिया पहुंचे। जुनैद आगे और हम पीछे चल रहे थे। रास्ते में जुनैद ने दिलीप को बाइक पर बैठाया। वे दोनों हमें एक फैक्ट्री पर ले गए। जुनैद और दिलीप ने गेट पर किसी से बात की। अंदर से बताया कि टैलो मिल जाएगा, लेकिन क्वालिटी ठीक नहीं है। दोनों दूसरे स्लाटर हाउस ले गए। यह बहुत बड़ा था। यहां मंसूर से हमारी बात हुई। रिपोर्टर: मंसूर भाई आप हैं? मंसूर: जी भैया। रिपोर्टर: टैलो चाहिए। मंसूर: ठीक है, अभी दूसरी जगह से दिला देते हैं। रिपोर्टर: यहां से नहीं मिल पाएगा? मंसूर: यहीं का तेल दूसरी जगह से मिलेगा। रिपोर्टर: दरअसल, हमको मिल रहा था पर वह ओरिजिनल नहीं था। मंसूर: इस टाइम मुश्किल है। ये जम जाता है तो इसे गर्म करना पड़ता है। आप मॉर्निंग में ले लीजिएगा। रिपोर्टर: देखिए, अभी दिलवा दीजिए। मंसूर: ठीक है, अभी वो टैंकर लेकर जाएगा। उसको बोल दिया हूं। आप जाकर ले लीजिएगा। स्टैंडर्ड फ्रोजन स्लाटर फैक्ट्री के अंदर से जानवरों की चर्बी से बने घी का टैंकर निकला और एक दूसरे स्लाटर हाउस पहुंचा। ड्राइवर शकील गेट खोलकर बाहर आया। शकील: आपकी भाई से बात हुई है? रिपोर्टर: हां, मंसूर ने आपके मालिक शमशाद भाई से बात कर ली है। शकील: ठीक है, वही जानना चाहते हैं। रिपोर्टर: आप जो पैसा कहेंगे, वो दे देंगे। शकील: 77 रुपए किलो का रेट लगेगा। रिपोर्टर: बढ़िया वाला ही रहेगा न? शकील: उसमें कोई दिक्कत होगी तो हमारा गला पकड़ लीजिएगा। हमारे पास यही माल आता है। चाहें टैंकर से भेजें या टीना में भरें। रिपोर्टर: जम तो जाएगा न? शकील: अगर न जमे तो कहिएगा। गारंटी दे रहा हूं। पन्नी में लाकर तौलें। रिपोर्टर: नहीं, गैलन (डिब्बे) में लाकर दीजिए। शकील: ठीक है, ये टैंकर वाला माल गर्म है। इसका बिल बाउचर बन गया है। ये बाहर जाएगा। यही माल टीन में रखा है। उसी को गर्म करके दे रहे हैं। गार्ड बोला– टैलो के बारे में कुछ नहीं बता सकते शकील चर्बी वाला घी लेने चला गया। गार्ड रुम में गार्ड से हमने पूछा– यह टैलो कहां जाएगा? उसने कहा– इस बारे में न तो हम कुछ बता सकते हैं, न ही बताने का परमिशन है। जो भी बात करना है, आप मालिक से कर सकते हैं। मतलब इसके विषय में बातचीत नहीं कर सकते। ये क्या है, कहां से आता है, कहां जाता है। इस विषय में कोई जानकारी नहीं दे सकते। ये ऑर्डर नहीं है हमको। इसी बीच शकील चर्बी वाला घी लेकर आ गया। अपना ब्रांड बनाकर बेचें चर्बी वाला घी शकील: ये लीजिए घी। रिपोर्टर: कितना होगा? शकील: यही, साढ़े छह किलो होगा। माल बहुत अच्छा है। चाहें तो आप चलकर देख लीजिए। रिपोर्टर: हां, चलिए… पास से देख लें। शकील: ये देखिए। कितना बढ़िया माल है। अब ये पूरी तरह से तैयार है। रिपोर्टर: यानी अपने ब्रांड में ले जाकर बेचें? शकील: हां, अपने डिब्बे में पैक कर लेना। रिपोर्टर: यह माल कहां जाएगा? शकील: यह टैंकर असम जाएगा। रिपोर्टर: अब इसमें कुछ डालने की जरूरत है कि नहीं? शकील: नहीं, एकदम तैयार है। यदि इससे थोड़ा और अच्छा करना है तो इसमें हाइड्रोजन डाल सकते हैं। ये जितना है, इसमें प्लास्टिक के गिलास से एक गिलास बहुत है। रिपोर्टर: कहां मिलता है? शकील: हम लोग कानपुर से लाते हैं। दो नंबर वाले माल में डालने के लिए लाते हैं। रिपोर्टर: इसमें कुछ और डालना होगा। शकील: नहीं एकदम तैयार है। इसमें कोई जरूरत ही नही है। अपनी कंपनी के ब्रांड में डालकर बेचें। अब सबसे अहम सवाल… चर्बी से पूजा का घी कैसे बनता है? आइए जानते हैं शकील से साढ़े छह किलो चर्बी वाला घी यानी टैलो लेकर हम जाजमऊ के एक घर ले गए। यहां मुजाहिद ने पूजा का घी बनाने का तरीका बताया। उसने चेहरे पर नकाब बांध रखा था। मुजाहिद: ये चर्बी वाला तेल है, जो जम गया है। इसे गर्म कर रहे हैं। रिपोर्टर: गर्म करके क्या करोगे? मुजाहिद: गर्म करके इसमें देसी घी मिलाएंगे। रिपोर्टर: देशी घी क्यों? मुजाहिद: देशी घी डाल देने से खुशबू देशी घी जैसे आने लगेगी। रिपोर्टर: कितना डालना होता है? मुजाहिद: इतने (छह किलो) में ढाई सौ ग्राम। रिपोर्टर: और इसमें क्या-क्या डालेंगे? मुजाहिद: इसमें पहले से ही सबकुछ पड़ा हुआ है। रिपोर्टर: अब क्या करेंगे? मुजाहिद: इसको अब डिब्बों में भर देंगे। रिपोर्टर: इस पीछे वाले कमरे में भी आपने माल रखा है क्या? मुजाहिद: माल हमारा सप्लाई हो चुका है। यह सैंपल के तौर पर है। रिपोर्टर: हमको कितने में मिल जाएगा? मुजाहिद: 90 रुपए किलो मिल जाएगा। बाहर हमारा माल 150 से 200 रुपए किलो बिकता है। रिपोर्टर: यह माल कहां-कहां तक जाता है? मुजाहिद: कानपुर, उन्नाव, लखनऊ के अलावा दूसरे जिलों और प्रदेशों में। पूरे देश में ये ही चल रहा है। 100 ग्राम से लेकर 1 लीटर तक का पैक आपको मिल जाएगा। चलिए, अब दुकानों पर… जहां ये बिक रहा लखनऊ के यहियागंज मार्केट में जब हमने व्यापारियों से पूछा कि चर्बी वाला घी पूजा के लिए क्यों बेच रहे हैं तो उनका कहना था– हम लोग बेचना नहीं चाहते, लेकिन लोग पूजा के लिए सस्ता वाला घी मांगते हैं। तेजाबी चर्बी से कैंसर का खतरा राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल काॅलेज (एनएचएमसी), लखनऊ के प्रोफेसर डॉ. डीके सोनकर का कहना है कि तेजाबी चर्बी से बनने वाला घी खाने से उल्टी, दस्त, एनीमिया, चर्मरोग हो सकते हैं। चर्बी में केमिकल रिएक्शन से फीनॉल एवं एपॉक्सी बन जाता है। इसमें स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक ट्रांस फैट, एल्केनॉल भी होते हैं। प्रदूषण की वजह बन रहा चर्बी वाला घी लखनऊ विवि के रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर भरत कुमार का कहना है कि जानवरों की चर्बी या वसा को जलाने पर कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के साथ-साथ डाई ऑक्सिन जैसे परसिसटेंट एनवायरमेंटल पॉल्यूटेंट्स (Persistent Environmental Pollutants) निकलते हैं। ये सभी प्रदूषक मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माने गए हैं। डाई ऑक्सिन विशेष रूप से खतरनाक रासायनिक यौगिक है, जो जानवरों की वसा में पाया जाता है। यह लंबे समय तक पर्यावरण तथा मानव शरीर में बने रहते हैं। इससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब पढ़िए, क्या बोल रहे हैं अफसर उन्नाव में स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी बनने के मामले पर भास्कर ने सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त प्रियंका सिंह से बातचीत की। जब उनसे पूछा कि स्लॉटर हाउस से चर्बी वाला घी निकलता है, आप कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं अभी नई आई हूं। ———————- भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबरें भी पढ़ें- आपकी पूजा में केमिकल वाला नकली चंदन:यूपी में खिन्नी की लकड़ी पर परफ्यूम; ऐसे 100 कारखाने, कैमरे में देखिए ठगी ये लकड़ी होती है… खिन्नी की, इसमें कोई महक नहीं होती। इसमें कंपाउंड (केमिकल मिक्सचर) मिलाया जाता है चंदन का… फिर यह महकती है चंदन जैसी। जब जलइयो चंदन-सी खुशबू होगी। अगर इसमें असली चंदन की लकड़ियां मिला दें, तो पहचानना मुश्किल हो जाता है। हम ही लोग पहचान पाते हैं। ये हैं यूपी के चंदन के बड़े कारोबारी, लेकिन ये चंदन होता नकली है। पढ़ें पूरी खबर महिलाएं कागजों पर ‘नेता’, कुर्सी पर पति का कब्जा:भास्कर टीम मिलने पहुंची तो पति बोले- हम ही सबकुछ संवैधानिक पदों पर महिलाओं को आरक्षण देने के बाद महिलाएं कितनी एक्टिव हुई हैं? क्या ये अपने क्षेत्र का काम खुद संभाल रही हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर में 10 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया। हम कुशीनगर से 25 किमी दूर सेवरही ब्लॉक पहुंचे। ऑफिस में भीड़ थी। अंदर गए तो महिला ब्लॉक प्रमुख अनु तिवारी की कुर्सी खाली थी। पढ़िए पूरी खबर मंत्री-विधायकों के गांवों में भी नहीं पहुंचा ‘हर घर जल’:विधायक की मां हैंडपंप से भर रहीं पानी; यूपी के जलशक्ति मंत्री का गांव भी प्यासा ‘रामप्यारी देवी। उम्र 75 साल, लेकिन जोर लगाकर हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर। रामप्यारी देवी कोई आम महिला नहीं। हमीरपुर के भाजपा विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति की मां हैं। इनके घर में जल जीवन मिशन की टोटी है, लेकिन पानी नहीं। पौथिया बुजुर्ग गांव विधायक डॉ. मनोज प्रजापति का पैतृक गांव है। सरकारी रिकॉर्ड में यहां जल जीवन मिशन का काम 100% हो गया है। अफसरों का दावा है कि यहां हर घर में पानी आ रहा है। पढ़ें पूरी खबर उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
Related Posts
सिद्धू मूसेवाला की एल्बम 100 मिलियन क्लब में:4 महीने पहले हुई रिलीज, विरोध में आई BBC की डॉक्यूमेंट्री 2 मिलियन व्यूज ही बटोर पाई
सिद्धू मूसेवाला की एल्बम 100 मिलियन क्लब में:4 महीने पहले हुई रिलीज, विरोध में आई BBC की डॉक्यूमेंट्री 2 मिलियन व्यूज ही बटोर पाई पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के 32वें जन्मदिन पर रिलीज हुई उनके तीन गीतों की एल्बम मूस प्रिंट 100 मिलियन व्यू क्लब में शामिल हो गई है। मूसेवाला की मौत के बाद भी उनके फैंस में उनका पहले वाला ही क्रेज है। चार माह में 100 मिलियन व्यू यूट्यूब पर मिलने से उनके फैंस उत्साहित हैं।
एल्बम “मूस प्रिंट” में 3 गाने हैं, जिनमें 0008, नील और टेक नोट्स शामिल हैं। यूट्यूब पर रिलीज होते ही तीनों गाने ट्रेंड कर रहे हैं। टेक नोट टाइटल से बने गीत को 33 लाख व्यू 6 घंटे में मिल गए थे। अब 4 महीने बाद टेक नोट को 37 मिलियन, 0008 को 32 मिलियन और नील को 32 मिलियन लोग देख चुके हैं। इस एल्बम की रिलीज पर पिता बलकौर सिंह ने कहा था कि मौत से पहले बेटा खुद के, मेरे और अपनी मां के जन्मदिन पर गीत रिलीज करता रहा है। इस एल्बम को रिलीज करने के पीछे भी उनका यही मकसद है कि सिद्धू का शुरू किया गया ये सिलसिला थमे न। अभी सिद्धू के जितने भी गाने रिकॉर्ड हैं, उन्हें धीरे-धीरे रिलीज किया जा रहा है। इससे पहले एल्बम के पोस्टर के इंस्टाग्राम पर रिलीज होते ही उसे जबरदस्त रिस्पांस मिला था। इस पोस्टर पर ही फैंस के 1.3 मिलियन से ज्यादा लाइक मिले थे। जबकि परिवार को विरोध के उलट BBC पर रिलीज हुई सिद्धू की डॉक्यूमेंट्री को 2.10 मिलियन व्यू ही मिल पाए हैं। बता दें कि शुभदीप उर्फ सिद्धू मूसेवाला का जन्म 11 जून 1993 को मानसा जिला के गांव मूसा में हुआ था। 29 मई 2022 को सिद्धू मूसेवाला की मानसा के गांव जवाहरके में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। जानें 100 मिलियन पूरे होने पर क्या बोले फैंस… मूसा जट्ट ने लिखा- नील गीत मेरे दिल के बहुत करीब
सिद्धू मूसेवाला के तीन गीतों की एल्बम मूस प्रिंट में शामिल नील गीत के बारे में मूसा जट्ट नामक फैंस ने लिखा कि ये गीत उनके दिल के बहुत की करीब है। सिद्धू ने इस गीत को बहुत ही मार्मिक ढंग से गाया है। सिद्धू के दूसरे गानों की तरह ही ये एक बार सुनते ही दिल क छू लेता है।
आके नाम से यूजर ने लिखा- गोन वट नेवर फोरगोटन
RK नाम के एक यूजर ने लिखा कि भले ही सिद्धू मूसेवाला उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत आज भी उनका एहसास करवाते हैं। सिद्धू मूसेवाला बेशक चला गया है, लेकिन भूला नहीं है। इसी तरह अन्य फैंस ने भी सिद्धू के लिए जस्टिस फोर सिद्धू लिखा। हत्या के बाद फैन बढ़े, 8 गाने रिलीज हुए
सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद उनके 8 गाने रिलीज हो चुके हैं। उनके सभी गानों को पहले जैसी ही पॉपुलैरिटी मिली। ये सभी गाने उनके ऑफिशियल अकाउंट पर रिलीज किए गए। ब्रिटिश सिंगर स्टेफलॉन डॉन ने अपने गाने डिलेमा का प्रचार सिद्धू मूसेवाला के नाम से ही किया था। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सिद्धू मूसेवाला का वीडियो बनाया और अपने गाने में इस्तेमाल किया था। सिद्धू मूसेवाला के कुछ गाने दूसरे सिंगरों और रैपरों ने अपने-अपने चैनलों पर रिलीज किए हैं। नई एल्बम ‘साइन टू वार 2026 वर्ल्ड टूर’ की भी तैयारी करीब दो माह पहले पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर डाली गई एक पोस्ट चर्चा का विषय बन गई थी। इस पोस्ट में “साइन टू वार 2026 वर्ल्ड टूअर” नाम दिया गया है। इससे मूसेवाला की टीम ने एक रहस्यमय, लेकिन उत्साहजनक संकेत दिया गया है। उनके चाहने वाले इसको एक बड़ी और अच्छी खबर के रूप में देख रहे हैं। माना जा रह है कि 2026 में इसको रिलीज किया जा सकता है। हालांकि, अब तक इसकी कोई आधिकारिक तारीख, स्थान या शेड्यूल सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मूसेवाला की टीम ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी जल्द ही साझा की जाएगी। सिद्धू मूसेवाला की मैनेजमेंट टीम ने कहा है कि इस संभावित टूर की तैयारियां फिलहाल आंतरिक स्तर पर चल रही हैं। —————— सिद्धू मूसेवाला से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
सिद्धू मूसेवाला के बर्थडे पर 3 गाने रिलीज:तीनों गीत कर रहे ट्रेंड, पिता बोले- जिन गानों से मैंने रोका, वही रिलीज करने पडे़ पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का आज (11 जून) 32वां बर्थडे है। इस मौके पर सिद्धू की 3 गानों की एल्बम “मूस प्रिंट” रिलीज हुई है। इसमें 3 गाने हैं, जिनमें 0008, नील और टेक नोट्स शामिल हैं। यूट्यूब पर रिलीज होती ही तीनों गाने ट्रेंड कर रहे हैं। (पूरी खबर पढ़ें) सिद्धू मूसेवाला की मां ने बेटे को जन्म दिया:पिता ने शेयर की बच्चे की फोटो; चाचा बोले- शुभदीप सिंह ही नाम रखेंगे पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के घर किलकारियां गूंजी हैं। उनकी मां चरण कौर ने बेटे को जन्म दिया। सुबह करीब 5 बजे बठिंडा के प्राइवेट अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ। मूसेवाला के पिता बलकौर सिद्धू ने खुद यह जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है। उन्होंने बच्चे का फोटो भी शेयर किया है। (पूरी खबर पढ़ें)

Haryana: गांव चलो अभियान के तहत सीएम नायब सैनी पहुंचे रामगढ़, विकास के लिए 21 लाख की घोषणा, स्वास्थ्य और शिक्षा पर दिए बड़े बयान।
Haryana के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज ‘गांव चलो’ अभियान के तहत रामगढ़ की चौपाल का दौरा किया। सैनी…
CM Nayab Singh ने officials को दिए strict instructions – Road की Quality पर कोई compromise नहीं होगा
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में बनने वाली और मरम्मत होने वाली सड़कों की क्वालिटी को लेकर…
