धनतेरस पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 खास उपाय, जानें किस दिन है धनत्रयोदशी और क्यों खास है प्रदोष काल

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और खरीदारी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली महापर्व का आगाज धनतेरस से होता है। हिंदू धर्म में इस दिन को बेहद खास माना गया है। मान्यता है कि धनतेरस के अवसर पर विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ नई वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी शुभ वस्तुएं…

करवाचौथ पर कब करें चंद्रमा की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, व्रत खोलने का सही समय, पूजा के मंत्र और आरती

करवाचौथ का पर्व पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह से शुरू होने वाले इस उपवास में महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं और रात में चंद्रमा के दर्शन तथा पूजा करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। कई परिवारों में पति के हाथों से पानी पीकर उपवास खोलने की परंपरा भी निभाई जाती है। उत्तर भारत में करवाचौथ को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है।…

करवा चौथ पर 29 अक्टूबर को ही क्यों रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा का शुभ समय, चंद्रोदय पूरी जानकारी

करवा चौथ का त्योहार नजदीक आते ही महिलाओं के बीच व्रत की तारीख, पूजा के शुभ मुहूर्त और चांद निकलने के समय को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इस साल खास तौर पर 28 और 29 अक्टूबर की तारीख को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो जान लें कि उत्तर भारत में प्रचलित पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखेंगी। नई दिल्ली के लिए…

आज से कार्तिक मास की शुरुआत, जानें 5 प्रमुख स्नान की तारीखें और किन चीजों का करना चाहिए दान, भगवान विष्णु की मिलेगी कृपा

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, भक्ति, स्नान और दान-पुण्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु की आराधना करने, पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। इसी वजह से इस महीने को आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के लिए विशेष माना जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास का आरंभ 27 अक्टूबर, मंगलवार से हो…

भाई दूज 2026: किस समय करें भाई के माथे पर तिलक? जानें 11 नवंबर का शुभ मुहूर्त, पूजा की थाली और दान का महत्व

दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का समापन भाई दूज के साथ होता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते, स्नेह और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। वहीं, भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति प्यार जताते हैं और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं। हिंदू धर्म में भाई दूज को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि…

26 अक्टूबर को मनाई जाएगी वाल्मीकि जयंती, जानिए रामायण के रचयिता से जुड़ी ये खास बातें और पूजा विधि

हिंदू धर्म में महर्षि वाल्मीकि का स्थान अत्यंत सम्माननीय है। उन्हें संस्कृत साहित्य का आदिकवि कहा जाता है और उनकी पहचान महान ग्रंथ रामायण के रचयिता के रूप में है। हर साल उनकी जयंती के अवसर पर देशभर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों और वाल्मीकि आश्रमों में पूजा-अर्चना होती है, शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और रामायण से जुड़ी शिक्षाओं को याद किया जाता है। यह पर्व केवल एक महान ऋषि के जन्मोत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान, भक्ति, सदाचार और जीवन में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा भी देता है। साल 2026 में वाल्मीकि जयंती की…

करवा चौथ पर इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है शुभ, सुख-समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी हैं ये मान्यताएं

करवा चौथ का पर्व भारतीय परंपरा में प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख बनाए रखने की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। त्योहार नजदीक आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में पूजा सामग्री, रंग-बिरंगी चूड़ियों, मेहंदी, साड़ियों, चुनरी और मिठाइयों की खरीदारी भी बढ़ जाती है। हालांकि, करवा चौथ पर खरीदारी का संबंध केवल त्योहार की तैयारियों से ही नहीं, बल्कि कई धार्मिक परंपराओं और शुभ-अशुभ की मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है।…

कार्तिक मास 2026: करवा चौथ से गुरु नानक जयंती तक, जानें कब मनाए जाएंगे बड़े त्योहार

हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में कई ऐसे पर्व आते हैं, जिनका धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी विशेष स्थान है। दीपावली की रौनक, गोवर्धन पूजा की परंपरा, छठ महापर्व में सूर्य उपासना और देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह जैसे आयोजन इस महीने को खास बनाते हैं। साल 2026 में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के अंतिम दिनों तक कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अगर आप पहले से पूजा की तैयारी करना…

शरद पूर्णिमा पर कब करें लक्ष्मी पूजन और खीर का भोग? जानें 2026 की तारीख, शुभ समय और धार्मिक मान्यताएं

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इन्हीं महत्वपूर्ण तिथियों में शरद पूर्णिमा भी शामिल है, जिसे लेकर हर साल श्रद्धालुओं के मन में व्रत, पूजा और चंद्रमा की आराधना से जुड़े कई सवाल रहते हैं। वर्ष 2026 में भी शरद पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि यह पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 26 अक्टूबर को। इस दिन चंद्रदेव की पूजा करने, रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने और अगले दिन प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा प्रचलित है। इसके अलावा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना तथा…

कार्तिक मास: 27 अक्टूबर से शुरू होगा पवित्र महीना, जानें किन धार्मिक कार्यों से मिलता है पुण्य लाभ

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष स्थान रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, स्नान, दीप जलाने, व्रत रखने और जरूरतमंदों की सहायता करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि देशभर में श्रद्धालु कार्तिक महीने के दौरान अपनी दिनचर्या में धार्मिक गतिविधियों को शामिल करते हैं। कई लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं और शाम के समय घर के आंगन या तुलसी के…

Dussehra 2026: कब और किस मुहूर्त में होगा रावण दहन? जानें शस्त्र पूजा का शुभ समय, पूजन विधि और विजयादशमी की मान्यताएं

दशहरा यानी विजयादशमी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में गिना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है। इस दिन भगवान श्रीराम की लंकापति रावण पर विजय और देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। उत्तर भारत के अनेक शहरों में रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं, कई परिवारों और संस्थानों में शस्त्र पूजा, वाहन पूजन तथा अपने कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा करने की परंपरा…

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना से मिलता है सिद्धियों का आशीर्वाद, यहां पढ़ें आरती और पूजा मंत्र

शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए विशेष माना जाता है। महानवमी के अवसर पर मंदिरों से लेकर घरों तक माता रानी की भक्ति और आराधना का माहौल रहता है। श्रद्धालु सुबह स्नान करने के बाद पूजा की तैयारी करते हैं, मां को फूल, फल और भोग अर्पित करते हैं तथा मंत्रों का जाप करके परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आरती करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धि, ज्ञान, विवेक…

नवरात्रि अष्टमी पर मां महागौरी की आराधना: सफेद वस्त्र पहनकर करें पूजा, नारियल के भोग का है विशेष महत्व

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु अष्टमी के अवसर पर व्रत रखते हैं, मां के मंत्रों का जाप करते हैं और विधि-विधान से पूजा करके परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मां महागौरी को सफेद रंग प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि अष्टमी की पूजा में सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा प्रचलित है।…

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना, जानें पूजा का शुभ तरीका, प्रिय भोग, शक्तिशाली मंत्र और आरती

शारदीय नवरात्रि में सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। देवी का यह रूप अधर्म, भय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को संकटों से लड़ने का साहस देती हैं और उन्हें निर्भय रहने की प्रेरणा देती हैं। उनका स्वरूप भले ही अत्यंत उग्र है, लेकिन भक्त उन्हें कल्याण करने वाली और शुभ फल प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजते हैं। इसी वजह से मां कालरात्रि को ‘शुभंकरी’ नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के सातवें दिन मंदिरों…

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व, पढ़ें पौराणिक कथा, आरती और प्रभावशाली मंत्र

नवरात्रि के छह दिन पूरे होने के साथ ही मां दुर्गा के छठे स्वरूप देवी कात्यायनी की उपासना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी अपने भक्तों के कष्ट दूर करने वाली और उन्हें साहस, शक्ति तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देने वाली देवी हैं। नवरात्रि के छठे दिन विधि-विधान से माता की पूजा करने के साथ उनकी कथा सुनना और मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कात्यायनी की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं…

नवरात्रि पंचमी पर मां स्कंदमाता की आराधना से लेकर विशेष उपायों तक, जानें पूजा विधि, शुभ समय और भोग की पूरी जानकारी

शारदीय नवरात्रि में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि की पंचमी तिथि मां स्कंदमाता को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के इस स्वरूप की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति की कामना की जाती है। साथ ही, भक्त जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति और अपने कार्यों में सफलता पाने के लिए भी माता का आशीर्वाद मांगते हैं। इस दिन नियमित पूजा के अलावा कुछ विशेष धार्मिक उपाय करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इन उपायों को…

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को कैसे करें प्रसन्न? जानें पूजा के नियम, मंत्र और भोग की खास परंपरा

नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग रूप की आराधना की जाती है और भक्त परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी हैं। इसी वजह से उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और जगत को ऊर्जा प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन श्रद्धालु…

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना, जानें पूजा का शुभ तरीका, प्रिय प्रसाद, शक्तिशाली मंत्र और आरती

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है। देवी के इस रूप को शक्ति, पराक्रम, निर्भयता और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। माता का ध्यान करने से व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की परंपरा है और तीसरा दिन विशेष रूप से मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इनके…

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से मिलता है धैर्य और साधना का आशीर्वाद, जानें पूजा का सही तरीका, मंत्र, पौराणिक कथा और आरती

नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में हर दिन देवी के एक अलग स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के इस स्वरूप की आराधना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, संयम, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, त्याग, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे…

शारदीय नवरात्रि का आगाज, पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना और कलश स्थापना; जानें शुभ-अशुभ समय, राहुकाल और पंचांग

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है। अगले नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। भक्त सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करके देवी का आह्वान करेंगे और इसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले व्रत, जप, तप तथा धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। इस दिन घरों और मंदिरों में माता रानी की पूजा-अर्चना के साथ दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि…