शारदीय नवरात्रि का आगाज, पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना और कलश स्थापना; जानें शुभ-अशुभ समय, राहुकाल और पंचांग

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है। अगले नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। भक्त सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करके देवी का आह्वान करेंगे और इसके साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले व्रत, जप, तप तथा धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। इस दिन घरों और मंदिरों में माता रानी की पूजा-अर्चना के साथ दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि…

सर्व पितृ अमावस्या पर आज पितरों की विदाई, शनिवार को शनिदेव की पूजा का भी संयोग; जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

10 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला है। आज सर्व पितृ अमावस्या के साथ महालया श्राद्ध, शनिवार व्रत और शनिदेव की पूजा का संयोग बन रहा है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन मनाई जाने वाली सर्व पितृ अमावस्या पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं होती, वे भी इस दिन उनका श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। इसी वजह से इसे पितरों के निमित्त किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण दिनों में…

11 अक्टूबर से नौ दिन मां दुर्गा की आराधना, नवरात्रि की तैयारी के लिए घर पर पहले ही जुटा लें ये पूजन सामग्री

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह नौ दिवसीय पर्व मां दुर्गा की आराधना, उपवास और साधना के लिए समर्पित होता है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है। इस दौरान घरों और मंदिरों में माता रानी की चौकी सजाई जाती है, कलश स्थापित किया जाता है और कई श्रद्धालु शुभता के प्रतीक के रूप…

गुरु प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का महासंयोग आज, जानें पूजा के शुभ समय से लेकर व्रत कथा तक

8 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन भगवान शिव की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष माना जा रहा है। आज गुरु प्रदोष व्रत और आश्विन मास की मासिक शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि दोनों ही भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत माने जाते हैं। ऐसे में एक ही दिन इन दोनों पर्वों के आने से शिव भक्तों के लिए पूजा-पाठ और उपासना का विशेष अवसर बन गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने और रात में शिवरात्रि के निशिता काल में महादेव का…

7 अक्टूबर का पंचांग: इंदिरा एकादशी पारण से द्वादशी श्राद्ध तक, जानें राहुकाल, शुभ मुहूर्त और बुधवार पूजा का समय

आज 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण अवसर एक साथ रहेंगे। आज इंदिरा एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु पारण करेंगे, जबकि पितरों के निमित्त द्वादशी श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा। बुधवार होने के कारण गणेश जी की पूजा और बुध ग्रह से जुड़े उपायों का भी विशेष महत्व रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी, जो देर रात 11:16 बजे तक चलेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। दिनभर मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और रात 9:40 बजे के बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र लग जाएगा। आज चंद्रमा सिंह…

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर को होगी कलश स्थापना, जानें सुबह-दोपहर के शुभ मुहूर्त से लेकर राहुकाल तक पूरी जानकारी

शारदीय नवरात्रि का पर्व इस बार 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। भक्त इस दिन मां दुर्गा का आह्वान करते हैं और अगले नौ दिनों तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत, जप और आराधना करते हैं। नवरात्रि के समापन पर कन्या पूजन और हवन के माध्यम से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने की परंपरा है। इस साल प्रतिपदा तिथि के आधार पर…

पितृ पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान, मान्यता है कि पितरों की कृपा से घर में आती है सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। यह समय केवल श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की परंपराओं और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने से भी जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों की कृपा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक होती है। यही वजह है कि इस अवधि में…

साधक की मौत से लेकर लापता लोगों तक, वृंदावन आश्रम पर उठे सवाल; संतों ने जांच एजेंसियों से मांगा जवाब

मथुरा-वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम और वहां सामने आए कुछ मामलों को लेकर अब संत समाज के एक वर्ग ने सवाल खड़े किए हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी और जूना अखाड़े के संत राधानंद गिरि ने आश्रम से जुड़े मामलों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोनों संतों की ओर से खास तौर पर एक युवा साधक की मौत, आश्रमों में नाबालिगों के रहने और कुछ लोगों के कथित तौर पर लापता होने से जुड़े मामलों को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की…

3 अक्टूबर, शनिवार का दिन क्यों है खास? जितिया, कालाष्टमी और अष्टमी श्राद्ध का आज बना संयोग, देखें पूरा पंचांग

आज 3 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज एक साथ कई महत्वपूर्ण व्रत और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत होगी और सुबह 07:59 बजे के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। आज जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत भी रखा जा रहा है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से माताएं इस दिन निर्जला उपवास करती हैं। इसके अलावा आज मासिक कालाष्टमी, अष्टमी श्राद्ध और शनिवार व्रत भी हैं। कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा की जाती है,…

मातृ नवमी श्राद्ध 2026: 4 या 5 अक्टूबर को होगा? जानें सही तारीख, मुहूर्त, महत्व और तर्पण-पिंडदान की पूरी विधि

पितृ पक्ष में आने वाली सभी तिथियों का अपना अलग धार्मिक महत्व माना गया है, लेकिन मातृ नवमी को विशेष रूप से महिला पितरों को समर्पित माना जाता है। इस दिन परिवार की दिवंगत माताओं, दादियों, नानियों और अन्य महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। कई लोग मातृ नवमी की तारीख को लेकर असमंजस में हैं कि वर्ष 2026 में यह श्राद्ध 4 अक्टूबर को किया जाएगा या 5 अक्टूबर को। पंचांग की गणना के अनुसार इस बार मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्टूबर को ही किया जाएगा। 5 अक्टूबर को नवमी तिथि का श्राद्ध…

अक्टूबर में त्योहारों की धूम, फिर भी शादी के लिए क्यों नहीं मिल रहा मुहूर्त? जानिए पूरा कारण

अक्टूबर का महीना आते ही देशभर में त्योहारों का माहौल बन जाता है। नवरात्रि से लेकर दशहरा और करवा चौथ तक कई बड़े पर्व इसी दौरान आते हैं। बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है, घरों में धार्मिक आयोजन शुरू हो जाते हैं और कई लोग नए काम या शुभ कार्यों की शुरुआत भी करते हैं। ऐसे में उन परिवारों के लिए यह सवाल स्वाभाविक है जिनके घर में शादी की तैयारी चल रही है कि जब अक्टूबर इतना शुभ और त्योहारों से भरा हुआ है, तो इसी महीने विवाह के लिए शुभ तारीखें क्यों नहीं मिल रही हैं। खासकर उन…

आश्विन मास में त्योहारों की लंबी श्रृंखला, नवरात्रि-दशहरा से लेकर शरद पूर्णिमा तक जानें पूरी तारीखें

हिंदू पंचांग में आश्विन मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस महीने में पितरों के लिए किए जाने वाले श्राद्ध कर्म से लेकर देवी आराधना, नवरात्रि, दशहरा और शरद पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। वर्ष 2026 में आश्विन मास का समापन 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के साथ होगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ेंगे। हालांकि इस बार कुछ पर्वों की तारीख को लेकर पंचांगों में अंतर दिखाई दे रहा है। खास तौर पर दुर्गा नवमी और विजयादशमी को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अलग तारीखें बताई गई हैं। ऐसे में श्रद्धालु अपने क्षेत्र में प्रचलित…

सर्वपितृ अमावस्या 2026: जिन पितरों की मृत्यु तिथि नहीं मालूम, उनका श्राद्ध कब होगा? जानें तारीख और पूरा मुहूर्त

पितृ पक्ष के दौरान हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा दान करने की परंपरा रही है। पितृ पक्ष की अलग-अलग तिथियों पर परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, लेकिन इस पूरे पक्ष में एक ऐसी तिथि भी आती है, जिसे सभी पितरों से जोड़कर देखा जाता है। इसे सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन भी हो जाता है। खास बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति को अपने किसी पूर्वज की…

सोमवार व्रत और पितृपक्ष का दूसरा दिन आज, शिव पूजा के साथ करें पितरों का तर्पण; जानें 28 सितंबर का पूरा पंचांग

28 सितंबर 2026 को सोमवार के साथ पितृपक्ष के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि का श्राद्धकर्म किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में दिवंगत पूर्वजों का स्मरण, तर्पण, पिंडदान और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए आज शिव आराधना और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार आज द्वितीया तिथि शाम 07:13 बजे तक रहेगी और इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। रेवती नक्षत्र सुबह 10:16 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र का आरंभ होगा। आज…

पितृपक्ष में क्यों खास है उज्जैन का सिद्धवट? रामघाट से जुड़ी है भगवान राम के पिंडदान की मान्यता, जानें 2026 की सभी श्राद्ध तिथियां

पितृपक्ष शुरू होते ही देशभर में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। हिंदू धार्मिक परंपरा में इन दिनों को पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय माना जाता है। कई परिवार अपने घरों में ही श्राद्ध कर्म करते हैं, जबकि कुछ लोग धार्मिक और तीर्थ स्थलों पर जाकर पिंडदान और तर्पण की परंपरा निभाते हैं। मध्य प्रदेश का उज्जैन भी ऐसे प्रमुख धार्मिक स्थानों में गिना जाता है, जहां क्षिप्रा नदी के तट पर लंबे समय से पितृ कर्म किए जाने की परंपरा चली आ रही है। उज्जैन को आमतौर पर महाकाल…

पितृपक्ष आज से शुरू, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या: जानें 16 दिनों की श्राद्ध तिथियां, तर्पण और पिंडदान के नियम

पितृपक्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा के बाद आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस बार 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, जबकि पूर्वजों के लिए पहला नियमित श्राद्ध 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि पर किया जाएगा। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। सनातन परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण का समय माना जाता है। इन दिनों परिवार अपने दिवंगत सदस्यों की आत्मिक शांति और तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक…

पितृ पक्ष से पहले कब है भाद्रपद पूर्णिमा? 26 सितंबर को रहेगा पर्व, जानें लक्ष्मी पूजा, चंद्र अर्घ्य और श्राद्ध का समय

सितंबर महीने के आखिरी दिनों में हिंदू धर्म के लिहाज से कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ रही हैं। इनमें भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह पूर्णिमा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसके तुरंत बाद पितृ पक्ष का आरंभ होने जा रहा है। पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा, स्नान-दान, माता लक्ष्मी की आराधना और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। वहीं जिन लोगों के परिवार में किसी पूर्वज का निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ है, उनके लिए इसी दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात में शुरू हो…

गुरु प्रदोष व्रत आज: प्रदोष काल में ऐसे करें शिव पूजा, जानें शुभ समय, मंत्र और पूरी विधि

भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को विशेष महत्व दिया जाता है। इस बार गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत या बृहस्पति प्रदोष के नाम से जाना जाता है। 24 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के अवसर पर यह व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। अगर आप आज गुरु प्रदोष व्रत रख रहे हैं या केवल शाम के समय भगवान शिव की पूजा करना चाहते हैं, तो पूजा…

पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध? मृत्यु की तारीख मालूम है तो पंचांग से ऐसे खोजें सही तिथि

पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार परिवार में जिस व्यक्ति का निधन जिस हिंदू तिथि को हुआ हो, उसी तिथि पर पितृ पक्ष के दौरान उसका श्राद्ध किया जाता है। यही वजह है कि श्राद्ध के लिए अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से ज्यादा महत्वपूर्ण उस दिन की हिंदू तिथि मानी जाती है। कई परिवारों में ऐसी स्थिति भी होती है जब किसी बुजुर्ग या परिजन के निधन की तारीख तो परिवार को याद रहती है, लेकिन यह जानकारी नहीं होती कि…

जलझूलनी एकादशी पर बन रहा खास संयोग: विष्णु पूजा के साथ शाम को तुलसी दीपक और मंगलवार के ये उपाय जरूर करें

आज मंगलवार, 22 सितंबर को जलझूलनी एकादशी मनाई जा रही है। इसे डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। इस बार एकादशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ रही है और गणेश उत्सव का समय भी चल रहा है। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, गणेश जी और मंगल ग्रह से जुड़े पूजन किए जा सकते हैं। शाम के समय तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। जलझूलनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा…