ईरान–अमेरिका टकराव: ट्रम्प का दावा, संघर्ष कई हफ्तों तक खिंच सकता है, निर्णायक कार्रवाई अभी बाकी

ईरान–अमेरिका टकराव: ट्रम्प का दावा, संघर्ष कई हफ्तों तक खिंच सकता है, निर्णायक कार्रवाई अभी बाकी

ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य टकराव में अमेरिका की सक्रिय भूमिका के साथ हालात और गंभीर हो गए हैं। जंग के तीसरे दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया कि यह संघर्ष अल्पकालिक नहीं रहेगा और जरूरत पड़ी तो अमेरिका लंबी अवधि तक ऑपरेशन चलाने में सक्षम है। व्हाइट हाउस में बयान देते हुए ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका फिलहाल अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। इससे पहले CNN को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इशारा किया था कि ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले अभी होने बाकी हैं। ट्रम्प के अनुसार, दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना अमेरिका के पास है और उसे रणनीतिक तरीके से तैनात किया जा रहा है।


ईरान की जवाबी कार्रवाई

तीसरे दिन ईरान ने मिडिल ईस्ट के चार देशों में फैले छह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। कुवैत में तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कुवैती एयर डिफेंस ने इन्हें गलती से दुश्मन विमान समझ लिया था। राहत की बात यह रही कि सभी पायलट सुरक्षित बताए गए हैं।


बातचीत से इनकार

ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने साफ कहा है कि तेहरान वॉशिंगटन से किसी भी तरह की वार्ता नहीं करेगा। यह प्रतिक्रिया उन अटकलों के बाद आई जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईरान फिर से अमेरिका से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।


नुकसान और आंकड़े

अल जजीरा के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के एक हजार से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। शुरुआती करीब 30 घंटों में दो हजार से ज्यादा बम गिराए जाने की जानकारी है। इन हमलों में ईरान में अब तक 555 लोगों की जान जा चुकी है और 740 से अधिक घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल फोर्सेस के मुताबिक ईरानी हमलों में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई है।


संघर्ष की शुरुआत

यह सैन्य टकराव 28 फरवरी को शुरू हुआ था। शुरुआती दिन की भीषण बमबारी में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि की गई थी, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।