ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा है कि देश ने अपने खिलाफ चलाए गए “अन्यायपूर्ण और अवैध युद्ध” में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है और दुश्मन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। परिषद के अनुसार हालात अब ऐसे बन गए हैं कि विरोधी पक्ष समझौते की दिशा में आने को मजबूर हो गया है।
बयान में पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की शहादत को याद करते हुए उन्हें इस्लामी क्रांति का बड़ा प्रतीक बताया गया। साथ ही मौजूदा नेतृत्व और सैन्य बलों की भूमिका को इस स्थिति तक पहुंचने में निर्णायक बताया गया। ईरान का कहना है कि देश की एकजुटता और सैनिकों की बहादुरी ने युद्ध का रुख पूरी तरह बदल दिया।
ईरान के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत में दुश्मन को भरोसा था कि वह जल्द ही ईरान को अस्थिर कर देगा और उसकी सैन्य क्षमताओं को खत्म कर देगा। लेकिन इसके उलट ईरानी बलों ने मजबूत जवाब दिया और दुश्मन के कई ठिकानों, बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया।
परिषद ने दावा किया कि कुछ ही दिनों के भीतर विरोधी पक्ष को यह एहसास हो गया कि वह इस संघर्ष में जीत हासिल नहीं कर सकता। इसके बाद उसने अलग-अलग माध्यमों से युद्धविराम की कोशिशें शुरू कर दीं और लगातार संघर्ष रोकने की बात कहने लगा।
ईरान ने अपनी शर्तों को भी स्पष्ट किया है, जिनमें सभी प्रतिबंधों को हटाना, परमाणु कार्यक्रम पर अधिकार की मान्यता, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना, क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का अंत और मुआवजे की मांग शामिल है। परिषद का कहना है कि इन बिंदुओं पर सहमति के बिना कोई अंतिम समझौता नहीं होगा।
आगे की रणनीति के तहत ईरान ने बताया कि जल्द ही इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की जाएगी, जो लगभग दो सप्ताह तक चलेगी। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह बातचीत युद्ध के अंत का संकेत नहीं है, बल्कि संघर्ष का ही एक विस्तार मानी जाएगी।
सरकार ने देश के लोगों से अपील की है कि वे एकजुट रहें और किसी भी तरह के आंतरिक मतभेद से बचें। बयान में कहा गया है कि यह समय राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का है और सभी वर्गों को इस प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए। ईरान ने यह भी साफ किया है कि यदि उसकी शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया तो संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।
अंत में परिषद ने कहा कि भले ही अधिकतर लक्ष्य हासिल कर लिए गए हों, लेकिन स्थायी समाधान और सुरक्षा सुनिश्चित होने तक प्रयास जारी रहेंगे और आगे की रणनीति बेहद सावधानी से तय की जाएगी।




