ईरान की कड़ी चेतावनी: ‘ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ तो पूरे मिडिल ईस्ट के तेल-गैस ठिकाने जला देंगे’

ईरान की कड़ी चेतावनी: ‘ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ तो पूरे मिडिल ईस्ट के तेल-गैस ठिकाने जला देंगे’

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चेतावनी दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि यदि उसके ऊर्जा ढांचे या बंदरगाहों को निशाना बनाया गया तो पूरे क्षेत्र के तेल और गैस से जुड़े अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दिया जाएगा।

ईरान के सरकारी टीवी IRIB के मुताबिक IRGC ने साफ किया कि देश के तेल, गैस और बंदरगाहों पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो जवाब बेहद कठोर और विनाशकारी होगा। संगठन ने कहा कि ऐसे हालात में अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों से जुड़े ऊर्जा ठिकानों को आग के हवाले कर दिया जाएगा। इसी बीच ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि युद्ध छेड़ना आसान हो सकता है, लेकिन इसे कुछ ट्वीट्स से नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक अमेरिका को अपने कदमों पर पछतावा न हो जाए।

खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरानी बलों पर आरोप है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बना रहे हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका ने ईरान के भीतर 5500 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि वह इन हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजरायली सेना ने तेहरान के एक तेल डिपो पर हमला किया। इस हमले के बाद इलाके में भीषण आग लग गई और कई दिनों तक राजधानी के आसमान में धुआं छाया रहा। इजरायली सेना ने दावा किया था कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया जो ईरानी सेना और IRGC द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे, न कि आम नागरिकों के ढांचे को। इस बीच IRGC की खुफिया इकाई ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे अमेरिका के सैनिकों की जानकारी साझा करें। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान का दावा है कि करीब 11 हजार अमेरिकी सैनिक होटलों और निजी इमारतों में रह रहे हैं।

अपील में लोगों से कहा गया है कि वे ऐसे सैनिकों की मौजूदगी की सूचना दें और उन्हें ठहरने की जगह न दें। ईरान ने इसे ‘इस्लामी कर्तव्य’ बताते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिकों के ठिकानों की सटीक जानकारी देना जरूरी है।