अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump एक बड़े सैन्य कदम पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान में छिपाकर रखे गए लगभग 400 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कब्जे में लेने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बना सकता है। यह मिशन बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है, क्योंकि इसके तहत अमेरिकी सैनिकों को ईरान की जमीन पर कई दिनों तक सक्रिय रहना पड़ सकता है।
परमाणु सामग्री पर सख्त रुख
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जाना चाहिए। उन्होंने अपने सहयोगियों को साफ संकेत दिया है कि अगर बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता, तो अमेरिका जबरन कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
बातचीत और दबाव दोनों विकल्प खुले
हालांकि सैन्य कार्रवाई एक विकल्प के रूप में मौजूद है, लेकिन अमेरिका कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखना चाहता है। प्रस्ताव यह है कि ईरान किसी समझौते के तहत अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंप दे। फिलहाल, दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान के पास कितना है यूरेनियम?
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 से पहले ईरान के पास 60% तक संवर्धित 400 किलोग्राम से ज्यादा यूरेनियम मौजूद था, जबकि करीब 200 किलोग्राम 20% संवर्धित सामग्री भी थी।
Rafael Grossi के अनुसार, यह स्टॉक मुख्य रूप से इस्फहान की भूमिगत सुविधा और नतांज के भंडार में रखा गया है। इन दोनों ठिकानों पर पहले हमले भी हो चुके हैं, लेकिन माना जा रहा है कि सामग्री अब भी सुरक्षित है।
तेल ठिकानों पर भी नजर
इसी बीच, अमेरिका ईरान के ऊर्जा संसाधनों पर भी नजर बनाए हुए है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि खर्ग द्वीप जैसे अहम तेल टर्मिनल पर कब्जा करने का विकल्प भी विचाराधीन है, जहां से ईरान का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि वह ईरान के तेल संसाधनों को अपने नियंत्रण में लेना चाहते हैं।
बढ़ती तनातनी से बढ़ी चिंता
इन घटनाक्रमों ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थिति कब किस दिशा में जाएगी, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।



