जंग के साए में भारतीय बासमती, पश्चिम एशिया संकट से अरबों का निर्यात फंसा

जंग के साए में भारतीय बासमती, पश्चिम एशिया संकट से अरबों का निर्यात फंसा

पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात का सीधा असर अब भारत के कृषि निर्यात पर पड़ता दिख रहा है। क्षेत्र में सैन्य टकराव गहराने के बाद भारत से होने वाला बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह अटक गया है। सबसे ज्यादा चिंता उस बाजार को लेकर है, जो भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है।


अचानक रुका व्यापार, समुद्र में अटकी खेप

बीते कुछ महीनों में विदेशी खरीदारों की मजबूत मांग के चलते भारत में बासमती चावल की कीमतों में उछाल आया था। निर्यातकों को अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी और बड़ी मात्रा में ऑर्डर भी बुक किए जा चुके थे। लेकिन जैसे ही क्षेत्रीय संघर्ष तेज हुआ, हालात पलट गए। कई शिपमेंट बीच रास्ते में फंस गई हैं। जहाजों की सुरक्षा, बीमा कवर और भुगतान को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। निर्यातक असमंजस में हैं कि माल गंतव्य तक पहुंचेगा भी या नहीं।


2 अरब डॉलर से ज्यादा का सौदा खतरे में

उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि भारत के कुल बासमती निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों में जाता है। अकेले एक देश भारत से होने वाले कुल निर्यात का करीब एक-चौथाई हिस्सा खरीदता है। साल 2025 में इस बाजार में भारत ने 1 अरब डॉलर से अधिक का बासमती भेजा था। अब मौजूदा संकट के कारण करीब 20 लाख टन चावल और अरबों डॉलर का व्यापार अधर में लटक गया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो आसपास के अन्य बाजारों पर भी असर पड़ेगा।


चावल ही नहीं, चाय का व्यापार भी दबाव में

इस संकट की मार केवल बासमती तक सीमित नहीं है। बीते वित्त वर्ष में भारत से बड़ी मात्रा में चाय का निर्यात भी इसी क्षेत्र में हुआ था। अब युद्ध जैसे हालात और भुगतान में जोखिम बढ़ने से इस कारोबार के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


कमजोर मुद्रा और नए शुल्क ने बढ़ाई मुश्किल

पहले से आर्थिक दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था पर इस तनाव ने दोहरी मार डाली है। स्थानीय मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट से लोगों की क्रयशक्ति कमजोर हो चुकी है। वहीं आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा ने भारतीय निर्यातकों की परेशानी और बढ़ा दी है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो भारत का एक अहम कृषि निर्यात लंबे समय तक संकट में फंसा रह सकता है।