शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन्हीं आस्था स्थलों में प्रमुख है जाखू मंदिर, जो शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ी पर लगभग 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर संकटमोचन भगवान हनुमान को समर्पित है और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।
पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, लंका युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मेघनाद के शक्ति बाण से अचेत हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर जा रहे थे। कहा जाता है कि इसी यात्रा के दौरान उन्होंने जाखू पहाड़ी पर विश्राम किया था। यहां एक यक्ष ऋषि तपस्या में लीन थे, जिनसे हनुमान जी ने संजीवनी के विषय में जानकारी प्राप्त की।
स्थानीय मान्यता है कि हनुमान जी के चरण स्पर्श से पहाड़ी का ऊपरी भाग दब गया, जिसके कारण जाखू पहाड़ी आज भी ऊपर से समतल दिखाई देती है।
चरणचिह्न और आस्था
किंवदंती है कि बाद में उसी स्थान पर हनुमान जी की स्वयंभू प्रतिमा प्रकट हुई और मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर परिसर में उनके पदचिह्नों को आज भी श्रद्धा के साथ सुरक्षित माना जाता है। विशेषकर मंगलवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
विशाल प्रतिमा बनी पहचान
जाखू मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की विशाल प्रतिमा दूर से ही नजर आती है और शिमला की पहचान बन चुकी है। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का यह संगम श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।




