अमेरिका में Donald Trump के नेतृत्व वाली सरकार इन दिनों असाधारण राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल के दौर से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े हालात, का सीधा असर अब अमेरिकी प्रशासनिक ढांचे पर दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार तेजी से अपने शीर्ष अधिकारियों की समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने या बदलने में देर नहीं कर रही।
पिछले कुछ समय में घटनाक्रम बहुत तेजी से बदला है। सबसे पहले होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की प्रमुख Kristi Noem को पद से हटाया गया। उनके हटने की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई, लेकिन लंबे समय से उनकी कार्यशैली, फैसलों और सार्वजनिक बयानों को लेकर सवाल उठ रहे थे। आलोचकों का मानना था कि वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी में सक्रिय थीं, जिससे विभाग की छवि और सरकार दोनों पर दबाव बन रहा था। उनके हटने के बाद यह संकेत मिला कि सरकार अब सख्त फैसले लेने के मूड में है।
इसके तुरंत बाद अटॉर्नी जनरल Pam Bondi को भी पद से हटा दिया गया। उनकी विदाई के पीछे सबसे बड़ा कारण Jeffrey Epstein से जुड़ा मामला माना जा रहा है, जो लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और न्याय व्यवस्था के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के शोषण और एक बड़े नेटवर्क के संचालन के गंभीर आरोप थे, जिसमें कई प्रभावशाली और अमीर लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जाती रही है।
जनता और मीडिया लंबे समय से ‘क्लाइंट लिस्ट’ सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे, ताकि यह पता चल सके कि इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका थी। इस बढ़ते दबाव के बीच बॉन्डी ने कुछ लोगों को व्हाइट हाउस बुलाकर “Epstein Files Phase 1” नाम का फोल्डर सौंपा। उम्मीद की जा रही थी कि इसमें कोई बड़ा खुलासा होगा, लेकिन जब दस्तावेज सामने आए तो उनमें कोई नई या चौंकाने वाली जानकारी नहीं मिली। इससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई और मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। अंततः यह कदम बॉन्डी के लिए उल्टा पड़ गया और उनकी स्थिति कमजोर हो गई, जिसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
इसी बीच एक और बड़ा फैसला लेते हुए सेना प्रमुख Randy George को समय से पहले ही रिटायर होने का आदेश दिया गया। उनका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ था, लेकिन अचानक लिए गए इस निर्णय ने सैन्य हलकों में भी हलचल पैदा कर दी। रक्षा मंत्री Pete Hegseth के नेतृत्व में यह कदम उठाया गया और माना जा रहा है कि सेना के शीर्ष स्तर पर व्यापक बदलाव की तैयारी चल रही है।
रैंडी जॉर्ज के स्थान पर वाइस चीफ Christopher LaNeve को कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई है। ला नेव पहले से ही रक्षा मंत्री के करीबी माने जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि नई टीम में भरोसेमंद अधिकारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जॉर्ज की नियुक्ति पिछली सरकार के दौरान हुई थी, और अक्सर नई सरकारें अपने रणनीतिक एजेंडे को लागू करने के लिए शीर्ष पदों पर अपने लोगों को लाना पसंद करती हैं।
इन घटनाओं के बाद अब जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें Kash Patel और Tulsi Gabbard शामिल हैं। काश पटेल पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की बात कही जा रही है। आरोप है कि उन्होंने सरकारी विमान का इस्तेमाल निजी कार्यक्रमों, जैसे खेल देखने, के लिए किया। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि उन्होंने अपनी करीबी को विशेष सुरक्षा मुहैया कराई, जो आमतौर पर उच्च जोखिम वाले ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होती है।
उनके कार्यकाल के दौरान FBI के भीतर बड़े पैमाने पर अधिकारियों को हटाने के फैसले भी विवादों में रहे हैं। खासकर वे अधिकारी जो ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच में शामिल थे या जिनकी वफादारी पर सवाल उठाए जा रहे थे। इस मुद्दे ने कानूनी रूप ले लिया है और कुछ बर्खास्त एजेंट अदालत पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से हटाया गया और यह एक तरह की बदले की कार्रवाई थी।
दूसरी ओर, Tulsi Gabbard को लेकर भी प्रशासन के भीतर असहजता बताई जा रही है। गबार्ड ने कुछ मामलों में सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाया है, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को उस स्तर तक विकसित नहीं किया है, जैसा कि सैन्य कार्रवाई के औचित्य के रूप में पेश किया जा रहा था।
इसके अलावा उन्होंने एक ऐसे पूर्व अधिकारी का बचाव किया, जिसने ईरान के खिलाफ युद्ध का विरोध करते हुए इस्तीफा दिया था। इस रुख ने प्रशासन के भीतर उनकी स्थिति को कमजोर किया है, क्योंकि सरकार इस समय एकजुट संदेश देने की कोशिश कर रही है। हालांकि ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा है कि गबार्ड की सोच उनसे अलग हो सकती है, लेकिन इससे उनकी भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होती, फिर भी अंदरूनी स्तर पर उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
इन सभी घटनाओं को एक साथ देखने पर यह साफ होता है कि यह सिर्फ अलग-अलग फैसले नहीं हैं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक बदलाव का हिस्सा हैं। पहले Donald Trump अपने दूसरे कार्यकाल में बड़े अधिकारियों को हटाने से बचते रहे थे, खासकर मिडटर्म चुनावों से पहले ऐसा न करने की नीति अपनाई गई थी। उन्हें लगता था कि ऐसा करना राजनीतिक रूप से कमजोर दिख सकता है।
लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है और राजनीतिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार अब ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रशासनिक ढांचे को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि ट्रम्प प्रशासन “कंट्रोल और लॉयल्टी” के मॉडल पर काम कर रहा है, जहां रक्षा, सुरक्षा और खुफिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सिर्फ उन्हीं लोगों को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जो सरकार की रणनीति और निर्णयों के साथ पूरी तरह तालमेल रखते हों। आने वाले दिनों में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे अमेरिकी राजनीति और वैश्विक समीकरण दोनों पर असर पड़ना तय है।



