तकिया साफ न करने की आदत बन सकती है बीमारी की वजह, जानिए सही समय और तरीका

तकिया साफ न करने की आदत बन सकती है बीमारी की वजह, जानिए सही समय और तरीका

हममें से ज्यादातर लोग तकिए का कवर बदलकर ही संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन असल गंदगी तकिए के अंदर छिपी होती है। रोजाना इस्तेमाल के दौरान इसमें पसीना, बालों का तेल, धूल, डेड स्किन और बैक्टीरिया धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। बाहर से साफ दिखने वाला तकिया अंदर से गंदगी का अड्डा बन सकता है, जो न सिर्फ नींद की क्वालिटी खराब करता है बल्कि सेहत पर भी असर डालता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तकिए को लंबे समय तक बिना धोए इस्तेमाल करना कई तरह की समस्याओं को जन्म दे सकता है। आमतौर पर हर 3 से 6 महीने के भीतर तकिए की अच्छी तरह सफाई कर लेना जरूरी माना जाता है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा पसीना आता है, एलर्जी की समस्या है या वह अपने पालतू जानवरों के साथ सोता है, तो उसे 2 से 3 महीने के अंतराल में ही तकिए को धो लेना चाहिए। इसके साथ ही तकिया कवर को हर हफ्ते धोना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही गंदगी को तकिए के अंदर जाने से रोकता है।

अगर तकिए की नियमित सफाई नहीं की जाए, तो उसमें डस्ट माइट्स और एलर्जन तेजी से बढ़ने लगते हैं। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर एलर्जी, खांसी, छींक और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां पैदा कर सकते हैं। इतना ही नहीं, गंदा तकिया त्वचा के लिए भी नुकसानदायक होता है। चेहरे के लगातार संपर्क में रहने की वजह से इसमें मौजूद गंदगी और बैक्टीरिया मुंहासों, रैशेज और स्किन इरिटेशन को बढ़ा सकते हैं। कई बार तकिए से बदबू आने लगती है और नमी रहने पर फफूंदी भी पनप सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए और अधिक हानिकारक होती है।

सफाई का तरीका तकिए के प्रकार पर निर्भर करता है। माइक्रोफाइबर और डाउन से भरे तकिए आमतौर पर वॉशिंग मशीन में हल्के डिटर्जेंट के साथ धोए जा सकते हैं। वहीं, मेमोरी फोम या कुछ खास मटेरियल वाले तकियों को पूरी तरह पानी में डुबोने के बजाय हल्के गीले कपड़े और माइल्ड साबुन से साफ करना बेहतर होता है, ताकि उनका आकार और सपोर्ट बना रहे। सफाई के बाद तकिए को अच्छी तरह सुखाना सबसे अहम चरण है। अगर अंदर थोड़ी भी नमी रह जाती है, तो उसमें फफूंदी और बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। इसलिए धूप में सुखाना सबसे सुरक्षित और असरदार तरीका माना जाता है, जबकि जरूरत पड़ने पर ड्रायर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि नियमित सफाई के बावजूद तकिए की एक सीमित उम्र होती है। समय के साथ इसका शेप और सपोर्ट कम होने लगता है, जिससे गर्दन और रीढ़ पर गलत दबाव पड़ सकता है। आमतौर पर 1 से 2 साल के भीतर तकिया बदल देना चाहिए। अगर तकिए में गांठें बनने लगें, वह दबने के बाद वापस अपने आकार में न आए, उसमें लगातार बदबू बनी रहे या सुबह उठते समय गर्दन में दर्द महसूस हो, तो यह संकेत है कि अब उसे बदल देना चाहिए।

साफ और सही स्थिति में रखा गया तकिया न सिर्फ आपकी नींद को बेहतर बनाता है, बल्कि स्किन और श्वसन से जुड़ी समस्याओं से भी बचाव करता है। इसलिए छोटी सी लापरवाही को नजरअंदाज न करें और तकिए की नियमित सफाई और समय पर बदलाव की आदत जरूर अपनाएं।