एनसीआर में दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। चौथे दिन भी गाजियाबाद की हवा बेहद जहरीली बनी हुई है। पूरे देश में यूपी के एनसीआर शहरों की हालत सबसे गंभीर मानी जा रही है। गाजियाबाद पहले नंबर पर है। उसके बाद नोएडा की हवा भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। पिछले चार दिनों से गाजियाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार बढ़ रहा है। रविवार को AQI 334 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह 314 था। देशभर में गाजियाबाद का AQI सबसे अधिक है। देखिए दो तस्वीरें सुबह से सांस लेने में हो रही परेशानी सुबह और रात के समय हल्की ठंड पड़ रही है। रविवार सुबह न्यूनतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पर हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हालात में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गाजियाबाद के बाद नोएडा, मुजफ्फरनगर और हापुड़ की हवा भी बेहद खराब श्रेणी में है। देश के पांच प्रमुख शहरों में चार यूपी के हैं। बल्लभगढ़ की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। सोमवार को हवा और खराब होने का अनुमान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का पूर्वानुमान है कि सोमवार को हवा और भी खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। ऐसे में सांस संबंधी रोगियों के लिए यह और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्या हो सकती है। गाजियाबाद का लोनी इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां AQI 344 दर्ज किया गया, जो रेड जोन में आता है। वसुंधरा में AQI 324 और इंदिरापुरम में 233 दर्ज हुआ। संजय नगर में AQI 335 पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और बाहर लंबे समय तक रहने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। वहीं, प्रशासन ने भी प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश में सबसे अधिक AQI वाले 5 शहर यूपी के प्रमुख व एनसीआर के जिलों का AQI अभी ग्रेप-वन लागू है बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए डीएम रविंद्र मांदड़ के निर्देश पर लोनी और शहर क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही है। प्रदूषण विभाग की टीम ने अभियान चलाकर पिछले 4 दिनों में 23 फैक्ट्रियों को सील किया है। अभी ग्रेप-वन लागू है, जहां नगर निगम द्वारा छिड़काव किया जा रहा है। ग्रेप-वन में सड़क के किनारे भोजनालयों और रेस्तराओं में कोयले के इस्तेमाल पर रोक होती है। साथ ही इस दौरान खुले में कचरा जलाने पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है। ये हैं शहरों में पॉल्यूशन के बड़े कारण एनसीआर में दिवाली से पहले हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। चौथे दिन भी गाजियाबाद की हवा बेहद जहरीली बनी हुई है। पूरे देश में यूपी के एनसीआर शहरों की हालत सबसे गंभीर मानी जा रही है। गाजियाबाद पहले नंबर पर है। उसके बाद नोएडा की हवा भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। पिछले चार दिनों से गाजियाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार बढ़ रहा है। रविवार को AQI 334 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह 314 था। देशभर में गाजियाबाद का AQI सबसे अधिक है। देखिए दो तस्वीरें सुबह से सांस लेने में हो रही परेशानी सुबह और रात के समय हल्की ठंड पड़ रही है। रविवार सुबह न्यूनतम तापमान 18.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पर हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हालात में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गाजियाबाद के बाद नोएडा, मुजफ्फरनगर और हापुड़ की हवा भी बेहद खराब श्रेणी में है। देश के पांच प्रमुख शहरों में चार यूपी के हैं। बल्लभगढ़ की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। सोमवार को हवा और खराब होने का अनुमान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का पूर्वानुमान है कि सोमवार को हवा और भी खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। ऐसे में सांस संबंधी रोगियों के लिए यह और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्या हो सकती है। गाजियाबाद का लोनी इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां AQI 344 दर्ज किया गया, जो रेड जोन में आता है। वसुंधरा में AQI 324 और इंदिरापुरम में 233 दर्ज हुआ। संजय नगर में AQI 335 पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और बाहर लंबे समय तक रहने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। वहीं, प्रशासन ने भी प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश में सबसे अधिक AQI वाले 5 शहर यूपी के प्रमुख व एनसीआर के जिलों का AQI अभी ग्रेप-वन लागू है बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए डीएम रविंद्र मांदड़ के निर्देश पर लोनी और शहर क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही है। प्रदूषण विभाग की टीम ने अभियान चलाकर पिछले 4 दिनों में 23 फैक्ट्रियों को सील किया है। अभी ग्रेप-वन लागू है, जहां नगर निगम द्वारा छिड़काव किया जा रहा है। ग्रेप-वन में सड़क के किनारे भोजनालयों और रेस्तराओं में कोयले के इस्तेमाल पर रोक होती है। साथ ही इस दौरान खुले में कचरा जलाने पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है। ये हैं शहरों में पॉल्यूशन के बड़े कारण उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
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यमुनानगर में खोखों में लगी आग:10 से ज्यादा दुकानें जलीं, दिवाली पर बेचने के लिए रखा सामान हुआ राख, यमुनानगर में शनिवार देर रात दीवाली को लेकर सजी दुकानों में आग लग गई। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक 10 से ज्यादा खोखे राख हो गए। इनमें दीवाली पर बेचने के लिए सामान रखा गया था प्रतापनगर में ये दुकानें सजाई गई थीं। आग का धुआं देख मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। उनकी सूचना पर डायल-112 की गाड़ी भी मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग लगने के कारण का पता नहीं चल पाया है। लेकिन दुकानदारों का कहना है कि इस घटना में उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। रात दो बजे लगी आग स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि दिवाली के अवसर पर प्रतापनगर में अस्पताल के पास सामान बेचने के लिए कई खोखे बने हुए हैं। शनिवार रात को करीब दो बजे उसे सड़क पर से शोर सुनाई दिया, जिसके बाद बाहर आकर देखा तो आठ से 10 खोखों में भयंकर आग लगी हुई थी। आसपास के लोग अपने स्तर पर आग को बुझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल था। सूचना मिलते ही मौके पर डायल-112 की टीम भी पहुंच चुकी थी, जिसने मौके से दमकल विभाग को कॉल की । कुछ ही देर में दमकल कर्मी भी वहां पहुंच गए। लाखों रुपए का हुआ नुकसान कर्मचारियों ने आधे से एक घंटे में आग पर काबू पाया, लेकिन इतने में दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो चुका था। खोखा चलाने वाले भी मौके पर पहुंच चुके थे, जोकि अपनी आंखों के सामने अपना नुकसान होता देख रहे थे। इस आगजनी से लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। कहीं शरारतीतत्वों ने तो नहीं लगाई आग वहीं अभी आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। कई लोगों का कहना है कि यह किसी शरारती तत्व द्वारा किया गया है तो कुछ इसे शॉर्ट सर्किट के वजह से बता रहे हैं। प्रतापनगर थाना प्रभारी नरसिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है वे जांच कर रहे हैं। फिलहाल कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

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बताया जा रहा है कि जगुआर कार चला रहा युवक पूरी तरह से नशे में धुत था। हादसे के बाद वह बुरी तरहसे डर गया और कार के गेट अंदर से लॉक कर लिए। बाहर मौजूद लोग उससे गेट खोलने के लिए कहते रहे, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। जब पुलिस आई, तब युवक को बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे अस्पताल भेजा गया। जगुआर कार की कीमत 70 लाख से डेढ़ करोड़ के बीच है। अब तस्वीरें देखिए नशे में धुत था कार का ड्राइवर
घायलों में दो बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। दरअसल, दिवाली की खरीदारी को लेकर बाजार में काफी भीड़ थी। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने अचानक नियंत्रण खो दिया। पहले उसने आगे जा रही 3 गाड़ियों को को टक्कर मारी। इसके बाद लोगों को रौंद दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के वक्त गाड़ी रचित मध्यान चला रहा था। वह लूकरगंज का रहने वाला है और कामधेनु स्वीट्स के परिवार का सदस्य है। वह नशे में धुत था और अकेले ही गाड़ी चला रहा था। कार की स्पीड काफी ज्यादा थी। हालांकि, कार केएसएन फूड एलएलपी के नाम पर रजिस्टर्ड है। आरटीओ के दस्तावेजों में इसका पता 122 लूकरगंज दर्ज है। हादसे के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। लोगों ने जगुआर कार में तोड़-फोड़ कर दी। गुस्साए लोगों ने राजरूपपुर चौराहे पर रोड जाम कर दिया और जमकर नारेबाजी की। इस हादसे में मरने वाला प्रदीप पटेल इलेक्ट्रीशियन था। उसके परिजनों ने मृतक का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। सूचना पर पहुंचे पुलिस अधिकारी लोगों को शांत कराने में जुटे हैं। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से स्थिति को नियंत्रित कर यातायात बहाल किया। एक प्रत्यक्षदर्शी रामानंद अग्रहरि ने बताया कि जगुआर कार ड्राइवर बहुत ज्यादा नशे में था। करीब 100 की स्पीड से कार दौड़ा रहा था। गाड़ियों को टक्कर मारते हुए उसने 8 लोगों को रौंदा दिया। इसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कार ने पहले चौराहे पर कटलेट के ठेले में टक्कर मारी। इस दौरान दुकानदार और उसका 10 साल का बेटा घायल हो गया। एक आदमी अपने घर से सामान लेने निकाला था। उसे भी कार ने रौंद दिया। खबर लगातार अपडेट हो रही है बहन को धोखा दिया तो देवर का प्राइवेट पार्ट काटा:कमरे में सो रहा था, प्रयागराज में आधी रात भाभी ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला किया प्रयागराज में छोटी बहन को प्यार में धोखा देने पर भाभी ने चाकू से देवर का प्राइवेट पार्ट काट डाला। इसके बाद भाभी वहां से भाग निकली। देवर दर्द से छटपटाता रहा। शोर सुनकर परिजन भागते हुए आए। उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। पढ़ें पूरी खबर…
