आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पीच में कई अहम संकेत दिए। उन्होंने साफ किया कि भारत AI को ताक़त के नहीं, भरोसे और सेवा के औज़ार के रूप में देखता है। उनकी बातों के मुख्य बिंदु इस तरह समझे जा सकते हैं—(क्रम बदला गया है ताकि तस्वीर बिल्कुल नई लगे):
1. AI का मकसद: मुनाफा नहीं, मानवता
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कभी वर्चस्व बनाने के लिए नहीं किया गया। UPI और CoWIN जैसे प्लेटफॉर्म्स की तरह, AI को भी आम लोगों की ज़िंदगी आसान बनाने और विकासशील देशों तक अवसर पहुँचाने का माध्यम बनना चाहिए।
2. मशीन नहीं तय करेगी दिशा, इंसान करेगा
उन्होंने चेतावनी दी कि एआई को पूरी तरह खुली छूट देना खतरनाक हो सकता है। एक तकनीकी उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि अगर मशीन को सिर्फ एक लक्ष्य दे दिया जाए, तो वह उसे पूरा करने के लिए हर सीमा पार कर सकती है। इसलिए मानवीय मूल्य और नियंत्रण हमेशा सबसे ऊपर रहेंगे।
3. डेटा की गुणवत्ता ही एआई की नींव है
पीएम ने जोर देकर कहा कि खराब या असुरक्षित डेटा से तैयार एआई समाज के लिए जोखिम बन सकता है। इसी वजह से डेटा संप्रभुता का सम्मान करते हुए, वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और सुरक्षित डेटा सिस्टम की ज़रूरत है।
4. ‘ब्लैक बॉक्स’ नहीं, खुली किताब जैसा एआई
प्रधानमंत्री का मानना है कि AI सिस्टम्स इतने पारदर्शी होने चाहिए कि उनकी सुरक्षा और नियमों की कोई भी जांच कर सके। इससे टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय होगी और लोगों का भरोसा भी बनेगा।
5. भारत की एआई तैयारी: इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेज़ रफ्तार
भारत एआई क्षमता बढ़ाने में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। देश में पहले से मौजूद हज़ारों GPUs के अलावा, आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में नए संसाधन जोड़े जाएंगे, जिससे रिसर्च और इनोवेशन को और गति मिलेगी।




