मिडिल ईस्ट की आग से भारत तक महंगाई की लपटें? पेट्रोल-डीजल ₹200 के करीब जाने का डर, रोजमर्रा की चीज़ों पर असर तय !

मिडिल ईस्ट की आग से भारत तक महंगाई की लपटें? पेट्रोल-डीजल ₹200 के करीब जाने का डर, रोजमर्रा की चीज़ों पर असर तय !

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा झटका अब ऊर्जा बाज़ारों पर दिखने लगा है। हालिया घटनाक्रमों के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसके अहम ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो पूरे क्षेत्र के आर्थिक ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल की आशंका गहराती जा रही है।


ईरान का सख्त संदेश: तेल 200 डॉलर तक जा सकता है

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ अधिकारी जनरल इब्राहिम जब्बारी के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में मिडिल ईस्ट के “आर्थिक केंद्र” खतरे में पड़ सकते हैं। उनका दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। उनका अनुमान है कि मौजूदा 80 डॉलर के आसपास चल रहा कच्चा तेल तेजी से उछलकर 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है—जो भारतीय संदर्भ में 159 लीटर पर करीब ₹18,000 से ज्यादा बैठता है।


2024 के बाद पहली बार 85 डॉलर के पार ब्रेंट

तनाव बढ़ते ही ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया, जुलाई 2024 के बाद यह स्तर पहली बार देखा गया। बाजारों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार की आवाजाही होती है, यानी रोज़ाना करीब 2 करोड़ बैरल।


LNG सप्लाई भी खतरे में

तेल ही नहीं, गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात से होने वाली LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। किसी भी लंबी रुकावट से एशिया और यूरोप दोनों प्रभावित होंगे।


भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी ज़रूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। अगर सप्लाई बाधित हुई और अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंचाई पर रहीं, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तेज़ी से बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ेगा—जिससे दूध, सब्ज़ी, अनाज और रोज़मर्रा की अन्य ज़रूरी चीज़ें महंगी होना तय है।