पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हालिया संघर्षविराम अब डगमगाता नजर आ रहा है। Islamic Republic News Agency (IRNA) के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए तय हुआ सीजफायर अब नए तनाव की वजह से कमजोर पड़ गया है। इसकी मुख्य वजह लेबनान में Hezbollah के ठिकानों पर Israel के लगातार और बड़े पैमाने पर हमले बताए जा रहे हैं।
इसी तनाव के बीच ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz को एक बार फिर सीमित कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही रोक दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाल सकता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
दूसरी तरफ, Israel Defense Forces (IDF) ने अपने सैन्य अभियान को लेकर खुलासा किया है कि लेबनान में की जा रही कार्रवाई एक बड़े और समन्वित ऑपरेशन का हिस्सा है। सेना के अनुसार, “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के तहत बेरूत, बेका वैली और दक्षिणी लेबनान में 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन टारगेट्स में कमांड सेंटर, हथियार भंडारण स्थल और मिसाइल सिस्टम से जुड़े ठिकाने शामिल थे।
इजरायली सेना ने यह भी बताया कि हमले बेहद सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए और इसकी तैयारी कई हफ्तों से चल रही थी। सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल Eyal Zamir ने साफ कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और उत्तरी इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उधर, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इन हमलों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 800 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इससे इलाके में मानवीय संकट और गहरा गया है।
राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हिजबुल्लाह से उत्पन्न खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल सीजफायर का समर्थन तभी करेगा, जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोले और क्षेत्र में सभी हमले बंद हों।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह इस संघर्षविराम समझौते का हिस्सा नहीं था, इसलिए इजरायल की कार्रवाई को उस एग्रीमेंट का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। लेबनान में जारी हमलों, ईरान के कड़े कदम और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी ने पूरे क्षेत्र को फिर से अस्थिर बना दिया है, जिससे सीजफायर के टिके रहने पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।




