एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर हाल ही में फैली खबरों पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स को गलत बताया, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि उपभोक्ताओं को अब ज्यादा दिनों बाद ही अगला सिलेंडर बुक करने की अनुमति मिलेगी।
मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह ही जारी है। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन बाद ही नई बुकिंग कर सकते हैं। इस बीच, सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही ‘पैनिक बुकिंग’ की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और जरूरत के अनुसार ही सिलेंडर बुक करें।
दूसरी ओर, कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने 22 मार्च को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सप्लाई में 20% की अतिरिक्त बढ़ोतरी की थी। इससे कुल आवंटन अब 50% तक पहुंच गया है, हालांकि इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने में थोड़ा समय लग सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हॉर्मुज रूट को लेकर जो ‘वॉर टैक्स’ या अतिरिक्त शुल्क की बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां आवागमन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
अब तक उठाए गए प्रमुख कदम:
- 6 मार्च: सिलेंडर बुकिंग के बीच 21 दिन का अंतर तय किया गया
- 9 मार्च: शहरों में इसे बढ़ाकर 25 दिन किया गया
- 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन का गैप लागू हुआ
- 14 मार्च: PNG उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर रखना अवैध घोषित किया गया
सरकार का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं और स्थिति नियंत्रण में है।




