मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में कुछ नरमी दिखाई दी है। ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि शर्तें अनुकूल रहीं तो अमेरिका समझौते के लिए बातचीत करने को तैयार है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेतृत्व की ओर से लगातार संपर्क किया जा रहा है और वे बातचीत के इच्छुक नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को बातचीत से कोई समस्या नहीं है, लेकिन किसी भी समझौते का आधार शर्तें ही होंगी।
सीजफायर की पहल तेज
मौजूदा हालात में रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों ने युद्ध विराम की पहल की है। इन देशों की ओर से दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सलाह दी जा रही है। ऐसे माहौल में ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सलाहकारों ने भी दिया समझौते का सुझाव
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के कई सलाहकारों ने उन्हें युद्ध को लंबा खींचने से बचने और समझौते का रास्ता तलाशने की सलाह दी है। उनका मानना है कि लंबा संघर्ष अमेरिका के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों तरह से नुकसानदेह हो सकता है।
खुफिया रिपोर्ट में तख्तापलट की संभावना खारिज
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन को सौंपी गई एक खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल ईरान में सरकार के खिलाफ तख्तापलट की स्थिति नहीं बन रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी जनता इस तरह के किसी बदलाव के लिए तैयार नहीं दिख रही।
हमले को ट्रंप ने बताया जरूरी
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान पर किए गए हमले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी दूत बातचीत के लिए गए थे, तब ईरान ने बार-बार टालमटोल किया। ट्रंप के मुताबिक उन्हें जानकारी दी गई थी कि ईरान करीब 11 परमाणु हथियार तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।
खाड़ी देशों पर हमलों की भी आलोचना
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया जिन्होंने उस पर हमला नहीं किया था। उनके मुताबिक यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक कदम है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का सख्त बयान
दूसरी ओर अमेरिका के रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि ईरान फिलहाल अकेला पड़ गया है और 11 मार्च को उस पर और कड़े हमले किए जा सकते हैं।
ड्रोन और मिसाइलों से हमला
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अब तक ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए करीब 2000 ड्रोन और 500 मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।




