सैलरी कम, EMI ज्यादा: कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे नौकरीपेशा लोग, कैसे करें बाहर निकलने की प्लानिंग

सैलरी कम, EMI ज्यादा: कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे नौकरीपेशा लोग, कैसे करें बाहर निकलने की प्लानिंग

भारत में नौकरीपेशा लोगों के बीच कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने इस समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया। एक व्यक्ति जिसकी मासिक आय ₹2 लाख है, वह हर महीने ₹3.3 लाख की EMI चुका रहा है। यानी उसकी कमाई से ₹1.3 लाख ज्यादा रकम सिर्फ कर्ज में जा रही है।

दिखावे की लाइफस्टाइल और आसान लोन का जाल

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल लोग अपनी सामाजिक छवि बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। डिजिटल लेंडिंग ऐप्स ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। ये ऐप्स तुरंत लोन तो दे देते हैं, लेकिन उनकी ऊंची ब्याज दरें लोगों को धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंसा देती हैं। बाहर से लाइफस्टाइल भले ही शानदार दिखे, लेकिन असलियत में कई लोग भारी कर्ज के दबाव में जी रहे होते हैं।

छोटे-छोटे लोन बनते हैं बड़ा बोझ

विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार लोग अलग-अलग जगहों से छोटे-छोटे लोन ले लेते हैं। ये संख्या में ज्यादा होते हैं और मानसिक तनाव बढ़ाते हैं। इन्हें पहले खत्म करना जरूरी है, क्योंकि इससे EMI का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।

महंगे कर्ज से जल्दी छुटकारा जरूरी

डिजिटल प्लेटफॉर्म या फिनटेक कंपनियों से लिए गए लोन आमतौर पर ज्यादा महंगे होते हैं। इसलिए दूसरे चरण में इन्हें चुकाना प्राथमिकता होनी चाहिए। ये लोन बार-बार उधार लेने की आदत को भी बढ़ाते हैं।

बोनस या बड़ी रकम का सही इस्तेमाल

अगर कभी एकमुश्त पैसा मिले, जैसे बोनस या किसी निवेश से रकम, तो उसे छोटे-छोटे खर्चों में बांटने के बजाय किसी एक बड़े लोन को खत्म करने में लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर होता है और भविष्य में सस्ता लोन मिलने की संभावना बढ़ती है।

NOC लेना और लोन अकाउंट बंद करना न भूलें

जब भी कोई लोन पूरा चुकाएं, तो बैंक या संस्था से NOC जरूर लें। साथ ही, संबंधित क्रेडिट लाइन को बंद कराना भी जरूरी है, ताकि दोबारा कर्ज लेने का प्रलोभन न बने।

असली समस्या आदतों में छिपी है

विशेषज्ञ मानते हैं कि कर्ज सिर्फ गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी आदतों और सोच से जुड़ा है। “Buy Now, Pay Later” जैसी सुविधाओं ने लोगों को बिना सोचे खर्च करने की आदत डाल दी है। जब तक खर्च करने की आदतों में बदलाव नहीं होगा, तब तक कर्ज से पूरी तरह बाहर निकलना मुश्किल रहेगा।

निष्कर्ष:
कमाई से ज्यादा EMI होना एक खतरनाक संकेत है। समय रहते सही रणनीति अपनाकर और खर्चों पर नियंत्रण रखकर ही इस कर्ज के चक्र से बाहर निकला जा सकता है।