हिंदू नववर्ष के आरंभ के साथ ही 30 मार्च 2026, सोमवार को साल का पहला प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं।
त्रयोदशी तिथि और व्रत का समय
पंचांग के मुताबिक, चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 31 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत उस दिन रखा जाता है जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में विद्यमान हो, इसलिए यह व्रत 30 मार्च को ही किया जाएगा।
प्रदोष काल में ही करें पूजा
प्रदोष व्रत में शाम का समय यानी प्रदोष काल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और आरती करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्त इस समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि त्रयोदशी की शाम भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इस समय सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाती है और जीवन में सुख-शांति लाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि प्रदोष काल में शिव दर्शन करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सोम प्रदोष का विशेष प्रभाव
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए जब प्रदोष व्रत इस दिन पड़ता है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन व्रत रखने और शिव-पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है, घर में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति मिलती है।
चंद्र दोष से मुक्ति का उपाय
ज्योतिष के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। जिन लोगों को चंद्र दोष या मानसिक अशांति की समस्या होती है, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है। नियमित रूप से यह व्रत करने से मन स्थिर होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
व्रत रखने के लाभ
इस दिन व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास करते हैं और शाम के समय पूजा के बाद ही व्रत खोलते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सफलता के नए रास्ते खुलते हैं।
इस प्रकार, नववर्ष का पहला सोम प्रदोष व्रत भक्तों के लिए बेहद खास अवसर है, जिसमें भगवान शिव की कृपा पाने का सुनहरा मौका मिलता है।




