हिमाचल प्रदेश के धौलाधार की ऊंची चोटियों में कनाडा की एक महिला पैराग्लाइडर मेगन एलिजाबेथ रॉबर्ट्स लापता हो गई हैं। उन्होंने शनिवार सुबह करीब 9:45 बजे बीड़-बिलिंग से उड़ान भरी थी, जिसके बाद उनका अब तक कोई सुराग नहीं चल पाया। आशंका है कि वह धौलाधार पर्वत श्रृंखला के ऊपरी धर्मशाला या त्रिउंड क्षेत्र में फंसी हुई हैं। महिला के निर्धारित समय पर लैंडिंग न करने पर हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने तत्काल खोज और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकारी शिल्पी बेक्टा ने बीड़ पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन (BPA) को निजी हेलिकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए बीड़-बिलिंग और धर्मशाला क्षेत्र में लैंडिंग की विशेष अनुमति दी है। गग्गल एयरपोर्ट को ईंधन भरने के निर्देश कांगड़ा हवाई अड्डा (गग्गल) के निदेशक को भी निर्देश दिए गए कि आवश्यकता पड़ने पर सर्च ऑपरेशन में लगे हेलिकॉप्टर को ईंधन भरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरे ऑपरेशन का खर्च बीपीए द्वारा ही वहन किया जाएगा। स्थानीय पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन ने रविवार सुबह से निजी हेलिकॉप्टर के माध्यम से हवाई खोज-अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। जमीनी स्तर पर स्थानीय प्रशासन, पहाड़ी बचाव दल, बीपीए सदस्य और पुलिस दल भी इस अभियान में शामिल होंगे। पायलटों को दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह बता दें कि यह पैराग्लाइडिंग क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदलता है। इससे पर्यटकों के फंसने व रास्ता भटकने की संभावना रहती है। प्रशासन ने सभी पायलटों को स्थानीय निर्देशों और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। हिमाचल प्रदेश के धौलाधार की ऊंची चोटियों में कनाडा की एक महिला पैराग्लाइडर मेगन एलिजाबेथ रॉबर्ट्स लापता हो गई हैं। उन्होंने शनिवार सुबह करीब 9:45 बजे बीड़-बिलिंग से उड़ान भरी थी, जिसके बाद उनका अब तक कोई सुराग नहीं चल पाया। आशंका है कि वह धौलाधार पर्वत श्रृंखला के ऊपरी धर्मशाला या त्रिउंड क्षेत्र में फंसी हुई हैं। महिला के निर्धारित समय पर लैंडिंग न करने पर हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने तत्काल खोज और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकारी शिल्पी बेक्टा ने बीड़ पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन (BPA) को निजी हेलिकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए बीड़-बिलिंग और धर्मशाला क्षेत्र में लैंडिंग की विशेष अनुमति दी है। गग्गल एयरपोर्ट को ईंधन भरने के निर्देश कांगड़ा हवाई अड्डा (गग्गल) के निदेशक को भी निर्देश दिए गए कि आवश्यकता पड़ने पर सर्च ऑपरेशन में लगे हेलिकॉप्टर को ईंधन भरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरे ऑपरेशन का खर्च बीपीए द्वारा ही वहन किया जाएगा। स्थानीय पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन ने रविवार सुबह से निजी हेलिकॉप्टर के माध्यम से हवाई खोज-अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। जमीनी स्तर पर स्थानीय प्रशासन, पहाड़ी बचाव दल, बीपीए सदस्य और पुलिस दल भी इस अभियान में शामिल होंगे। पायलटों को दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह बता दें कि यह पैराग्लाइडिंग क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदलता है। इससे पर्यटकों के फंसने व रास्ता भटकने की संभावना रहती है। प्रशासन ने सभी पायलटों को स्थानीय निर्देशों और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। हिमाचल | दैनिक भास्कर
Related Posts
Himachal में Monsoon त्रासदी: लगातार बारिश, Landslides और भारी नुक़सान
बरसात और अलर्ट मॉनसून के चलते हिमाचल का मौसम इन दिनों लगातार बेकाबू है: नुकसान और आंकड़े ढांचा व अव्यवस्था…
हिमाचल में शाम 5 बजे से नहीं चलेगी लोकल बसें:यात्रा प्लान करके घर से निकलना होगा; HRTC के ड्राइवर-कंडक्टर भी मना सकेंगे दिवाली
हिमाचल में शाम 5 बजे से नहीं चलेगी लोकल बसें:यात्रा प्लान करके घर से निकलना होगा; HRTC के ड्राइवर-कंडक्टर भी मना सकेंगे दिवाली हिमाचल प्रदेश में दिवाली पर आज शाम पांच बजे के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) लोकल बसें नहीं चलाएगा। इससे लोगों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। लोकल बसे कल सुबह 8 बजे के बाद चलाई जाएगी। इस अवधि में लौंग रूट की भी कम बसें ही चलेगी। परिवहन निगम ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि HRTC के ड्राइवर-कंडक्टर भी दिवाली पर्व को अपने घर पर परिवार के साथ मना सके। aहिमाचल में 3000 सरकारी बसें, अधिकांश नहीं चलेगी प्रदेश में HRTC की लगभग 3000 बसें है। इनमें से अधिकांश बसें शाम पांच बजे के बाद नहीं दौड़ेगी। हिमाचल में 95 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू आबादी है। इसलिए, यहां अधिकांश लोग दिवाली को हर्षोल्लास से मनाते हैं। ऐसे में प्राइवेट बसें भी कम ही सड़कों पर नजर आएगी। यात्रा प्लान करके घरों से निकले इसे देखते हुए लोगों को अपनी यात्रा पहले ही प्लान करके घर से निकलना होगा। या फिर सरकारी बसों का इंतजार नहीं करना होगा। दिवाली पर 257 स्पेशल बसें चलाई वहीं निगम ने हिमाचल से बाहर दूसरे राज्यों में रोजगार को गए लोगों को दिवाली पर वापस घर लाने के लिए 17 से 19 नवंबर तक 257 स्पेशल बसें चलाई। इनमें से अधिकांश बसें हिमाचल वापस लौट आई है।
हिमाचल के DC नहीं मानते हाईकोर्ट-सरकार के ऑर्डर:पंचायतों में नहीं लगाया रिजर्वेशन रोस्टर; 25 सितंबर तक लगाना था, इलेक्शन पर संशय
हिमाचल के DC नहीं मानते हाईकोर्ट-सरकार के ऑर्डर:पंचायतों में नहीं लगाया रिजर्वेशन रोस्टर; 25 सितंबर तक लगाना था, इलेक्शन पर संशय हिमाचल सरकार और सभी जिलों के DC हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं। पंचायतीराज विभाग के सेक्रेटरी के आदेशों के बावजूद पंचायत चुनाव के लिए किसी भी DC ने अब तक आरक्षण रोस्टर नहीं लगाया, जबकि आरक्षण रोस्टर 25 सितंबर तक हर हाल में लगना जरूरी था। हिमाचल हाईकोर्ट ने मनीष धर्मेक बनाम स्टेट केस में साल 2020 में पंचायत और नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर कमेंसमेंट ऑफ इलेक्शन प्रोसेस से 90 दिन पहले लगाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा- चुनाव प्रोसेस होने से तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर लगाया जाए, ताकि किसी व्यक्ति को यदि आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति है और वह उसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, इससे व्यक्ति आरक्षण रोस्टर के खिलाफ अदालत में अपील कर सकेगा। कोर्ट को भी आरक्षण रोस्टर पर मिलने वाली अपील के निपटारे के लिए वक्त मिलेगा। यदि आरक्षण रोस्टर देरी से लगेगा और इधर इलेक्शन कमीशन चुनाव की तिथियां घोषित कर दी गई तो अपीलकर्ता से आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने का अधिकार छिन जाएगा या फिर इससे इलेक्शन में देरी होगी। 25 सितंबर को लगना जरूरी थी आरक्षण रोस्टर हिमाचल में साल 2020 में पंचायतों की पहली मीटिंग 1 फरवरी 2021 को हुई। लगभग 35 दिन का वक्त चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने में लगा। इस लिहाज से तीन महीने पहले यानी 25 सितंबर को हर हाल में आरक्षण रोस्टर लगाना जरूरी था। सेक्रेटरी पंचायतीराज ने भी 15 सितंबर को अपने आदेशों को हाईकोर्ट का जिक्र करते हुए सभी जिलों के DC को पत्र लिखा। इसमें 25 सितंबर तक प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए। पंचायत सेक्रेटरी द्वारा तय तिथि से लगभग 28 दिन अधिक हो गए। मगर अब तक रोस्टर नहीं लग पाया। पंचायत में उप प्रधान ऐसा पद होता है जिसके लिए आरक्षण रोस्टर नहीं लगता। BJP बार बार सरकार को घेरती रही आरक्षण रोस्टर में देरी पर भारतीय जनता पार्टी बार बार सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेरती रही है। बीजेपी का आरोप है कि चुनाव में हार के डर से कांग्रेस सरकार चुनाव नहीं कराना चाह रही। सीएम-मंत्री के दावे भी अब तक झूठे वहीं सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी कई बार कह चुके हैं कि चुनाव तय समय पर होंगे। मगर अब तक आरक्षण रोस्टर नहीं लगाया जा सका। इससे चुनाव समय पर होंगे, इस पर संशय बना हुआ है। अपील के निपटारे को वक्त मिलेगा मनीष धर्मेक बनाम स्टेट केस में हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव प्रोसेस होने से तीन महीने पहले आरक्षण रोस्टर लगना चाहिए, ताकि यदि किसी व्यक्ति को आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति है और वह उसे कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो 90 दिन का वक्त होने से व्यक्ति ऐसा कर पाएगा। कोर्ट को भी आरक्षण रोस्टर पर मिलने वाली अपील के निपटारे को वक्त मिलेगा। दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित चुनाव हिमाचल में 3577 पंचायतें है। इनमें इसी साल दिसंबर में चुनाव होने हैं। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 23 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। स्टेट इलेक्शन कमीशन को 23 जनवरी से पहले चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। इलेक्शन कमीशन दिसंबर में ही वोटिंग करवाना चाह रहा है, क्योंकि जनवरी में शिमला, मंडी, लाहौल स्पीति, किन्नौर, कांगड़ा, कुल्लू और सिरमौर जिला के कई भागों में भारी बर्फबारी होती है। बर्फबारी में चुनाव करा पाना टेडी खीर साबित हो सकता है।
