मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया की नजरें अब Strait of Hormuz पर टिक गई हैं। वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम इस समुद्री मार्ग पर United States ने कड़ा कदम उठाते हुए नाकेबंदी लागू करने का फैसला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरान से जुड़े बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों की जांच और रोक शुरू कर दी जाएगी।
इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर पड़ता दिख रहा है। नाकेबंदी की खबर सामने आते ही कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया और ब्रेंट व WTI दोनों ही 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए। इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस कार्रवाई को ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद Iran की तेल बिक्री को रोकना और उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना है। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि हाल के घटनाक्रम में ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और उसके कई जहाज नष्ट किए जा चुके हैं।
दूसरी ओर, ईरान ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को शुल्क देना होगा। ईरान के इस बयान ने तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे किसी बड़े टकराव की आशंका भी जताई जा रही है।
इसी बीच, The Wall Street Journal की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि Pakistan में हुई बातचीत के विफल रहने के बाद अमेरिका फिर से सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने भी साफ कर दिया है कि हालात के अनुसार आगे कोई भी कदम उठाया जा सकता है।
वैश्विक राजनीति में उबाल
इस घटनाक्रम ने सिर्फ अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि कई बड़े देशों को भी सीधे तौर पर प्रभावित किया है। China को लेकर भी अमेरिका ने सख्त रुख दिखाया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि चीन ने ईरान की किसी भी तरह की सैन्य मदद की, तो उस पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे। इससे अमेरिका-चीन संबंधों में और तनाव बढ़ सकता है।
वहीं, Israel से जुड़ा एक विवाद भी सामने आया है। इजराइल के एक मंत्री के अल-अक्सा मस्जिद दौरे पर जॉर्डन ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे भड़काऊ कदम बताया। इस घटना ने क्षेत्र में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
सुरक्षा और खुफिया मोर्चे पर हलचल
ईरान ने दावा किया है कि उसने जासूसी के आरोप में करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर अमेरिका और इजराइल को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि खुफिया स्तर पर भी दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हो गया है।
दुनिया पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों में आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।
फिलहाल, हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि आगे अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है।



