मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आइलैंड पर हमला किया है। इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अमेरिका अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz के आसपास के द्वीपों पर कब्जा करने की योजना बना रहा है। इसी बीच खबर आई कि ट्रंप प्रशासन ने करीब 2500 मरीन सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने का आदेश दिया है। इस कदम को लेकर सैन्य विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है।
पूर्व नेवी अधिकारी ने बताया जोखिम भरा कदम
अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी और रक्षा विश्लेषक Malcolm Nance ने इस संभावित योजना को बेहद खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट के द्वीपों पर कब्जा करना किसी भी सैन्य अभियान के लिए आसान नहीं होगा और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नैंस के अनुसार, इस तरह के ऑपरेशन को अंजाम देने में कम से कम दो हफ्ते का समय लग सकता है, लेकिन असली चुनौती वहां की भौगोलिक स्थिति और ईरान की सैन्य तैयारी है।
दशकों पहले भी हुआ था सैन्य आकलन
मैल्कम नैंस ने बताया कि अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने करीब 40 साल पहले इस तरह के अभियान का विश्लेषण किया था। उस समय अनुमान लगाया गया था कि केवल 2500 नहीं बल्कि लगभग 6000 मरीन सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की जरूरत पड़ेगी। योजना के मुताबिक पहले लारक, होर्मुज और केशम द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित कर ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास को घेरने की रणनीति थी। इसके बाद समुद्री मार्ग को नियंत्रित करते हुए आगे की कार्रवाई की जानी थी।
1988 में भी नहीं अपनाया गया था ऐसा कदम
नैंस ने यह भी याद दिलाया कि 1988 में जब ईरान ने खाड़ी में बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल कर अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, तब भी अमेरिका ने इस तरह के जोखिम भरे अभियान की योजना नहीं बनाई थी।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ सकता है बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका इस इलाके में सैन्य कार्रवाई करता है तो ईरान की सैन्य इकाइयां, खासकर Islamic Revolutionary Guard Corps और बासिज बल, पहाड़ी इलाकों से जवाबी हमले कर सकते हैं। ऐसे में द्वीपों पर तैनात सैनिकों को लगातार मिसाइल हमलों, ड्रोन और आत्मघाती नौकाओं का सामना करना पड़ सकता है।
रसद और सप्लाई भी बड़ी चुनौती
मैल्कम नैंस ने लॉजिस्टिक सपोर्ट को भी बड़ी समस्या बताया। उनके अनुसार अमेरिकी सैनिकों की सप्लाई मुख्य रूप से United Arab Emirates और Qatar के ठिकानों से हो सकती है, लेकिन इन ठिकानों पर भी हमलों का खतरा रहेगा। ऐसी स्थिति में सैन्य सप्लाई को उसी विवादित जलमार्ग से गुजरना पड़ेगा, जहां युद्ध का सबसे बड़ा जोखिम मौजूद है।
ईरान की बारूदी सुरंगों से बढ़ी चिंता
हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि ईरान Strait of Hormuz में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा है। इससे किसी भी नौसैनिक अभियान की जटिलता कई गुना बढ़ सकती है। नैंस का कहना है कि अगर पेंटागन इटली से एक्सपेडिशनरी सी बेस जहाज को हिंद महासागर में तैनात करता है तो अमेरिका को ऑपरेशन के लिए एक सुरक्षित मंच मिल सकता है। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई स्पष्ट तैयारी नजर नहीं आ रही।
उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह का सैन्य अभियान जल्दबाजी और जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है।



