होर्मुज स्ट्रेट संकट ने बढ़ाई ट्रम्प प्रशासन की चिंता, युद्ध खत्म करने की रणनीति स्पष्ट नहीं

होर्मुज स्ट्रेट संकट ने बढ़ाई ट्रम्प प्रशासन की चिंता, युद्ध खत्म करने की रणनीति स्पष्ट नहीं

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिकी प्रशासन के पास फिलहाल युद्ध को समाप्त करने की स्पष्ट रणनीति दिखाई नहीं दे रही। वहीं होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

दरअसल, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फरवरी में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे थे, तब उनके कई सलाहकारों का मानना था कि इस संघर्ष का तेल बाजार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी उस समय एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले साल हुए हमलों के दौरान तेल बाजार ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ था, इसलिए इस बार भी स्थिति काबू में रह सकती है।

हालांकि जमीन पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बना सकता है। यही वह रणनीतिक समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है। इस धमकी के बाद खाड़ी क्षेत्र में कई व्यावसायिक जहाजों ने अपने मार्ग रोक दिए, जिससे तेल की कीमतें एक समय 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इस स्थिति ने अमेरिकी प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और आर्थिक असर को कम करने के लिए नई नीतियों पर विचार किया जा रहा है। कई अधिकारियों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान की प्रतिक्रिया को कम करके आंका था।

पिछले साल हुई 12 दिन की झड़पों की तुलना में इस बार ईरान का जवाब कहीं अधिक आक्रामक बताया जा रहा है। ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों, मिडिल ईस्ट के कई शहरों और इजराइल के आबादी वाले इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण कुछ अमेरिकी दूतावासों को खाली कराना पड़ा और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने पड़े। इसी बीच अमेरिकी सांसदों को बंद कमरे में इस पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टोफर मर्फी ने सोशल मीडिया पर कहा कि फिलहाल प्रशासन के पास होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने की ठोस योजना नहीं है। प्रशासन के अंदर भी कुछ अधिकारी इस बात से निराश बताए जा रहे हैं कि युद्ध समाप्त करने का स्पष्ट रास्ता अभी सामने नहीं है।

ईरान को लेकर ट्रम्प और उनके कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विचार भी अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। ट्रम्प जहां ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसे बड़े लक्ष्य की बात करते हैं, वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का कहना है कि अमेरिका का मकसद केवल ईरान की सैन्य क्षमता और मिसाइल ताकत को कमजोर करना है, न कि किसी बड़े राजनीतिक बदलाव को थोपना। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान की तरफ से किए गए जवाबी हमलों की तीव्रता का अंदाजा पेंटागन को पूरी तरह नहीं था। उनके मुताबिक यह स्थिति दिखाती है कि ईरान खुद को बड़े दबाव में महसूस कर रहा है और इसी वजह से आक्रामक कदम उठा रहा है।

इस बीच तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से ट्रम्प ने नाराजगी भी जताई है। उन्होंने कहा कि तेल टैंकरों के चालक दल को साहस दिखाना चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। हालांकि जमीनी स्थिति इतनी आसान नहीं है, क्योंकि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था। इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी सेना ने हाल ही में स्ट्रेट के आसपास ईरान के 16 जहाजों को निशाना बनाया, जिन पर सुरंगें बिछाने की तैयारी का शक था।

इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह टकराव केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह संकट किस दिशा में आगे बढ़ेगा और क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का कोई रास्ता निकल पाएगा।