भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों में बड़ा बदलाव लाने वाला व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकता है। जुलाई 2025 में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो चुके हैं और अब दोनों देश इसे एक साथ लागू करने की दिशा में तैयारियां कर रहे हैं। हालांकि, समझौते के अमल में आने से पहले ब्रिटेन की संसद की मंजूरी जरूरी है। फिलहाल वहां हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स में इस पर चर्चा और समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है।
इस समझौते के लागू होने पर भारत को बड़ा निर्यात लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके तहत भारत के करीब 99 प्रतिशत उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश कर सकेंगे। इससे कपड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, खिलौने और खेल सामग्री जैसे क्षेत्रों को विशेष बढ़त मिलने की संभावना है।
वहीं दूसरी ओर, भारत ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार को धीरे-धीरे खोलने पर सहमत हुआ है। स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क को 150 प्रतिशत से घटाकर पहले 75 प्रतिशत किया जाएगा और फिर 2035 तक इसे 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इसी तरह, ऑटोमोबाइल पर लगने वाला भारी शुल्क, जो अभी 110 प्रतिशत तक है, उसे पांच साल में घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक उत्पादों को भी भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी।
व्यापार समझौते के साथ-साथ दोनों देशों ने दोहरा अंशदान संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इससे अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योगदान दो बार नहीं देना पड़ेगा, जिससे पेशेवरों और कंपनियों दोनों को राहत मिलेगी।इस पूरे समझौते का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 56 अरब डॉलर से भी अधिक करना है। यदि संसद से मंजूरी मिल जाती है, तो यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।



