अमेरिका में टैरिफ को लेकर एक ही दिन में जबरदस्त सियासी और कानूनी हलचल देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक करार देने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पूरी दुनिया पर 10% का नया टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रम्प सरकार के पहले से लागू ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के मुताबिक टैक्स और टैरिफ तय करने का अधिकार संसद के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।
इस फैसले के करीब तीन घंटे के भीतर ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नया कदम उठाने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि वे एक नए आदेश पर साइन करेंगे, जिसके तहत सभी देशों पर 10% का समान वैश्विक टैरिफ लागू होगा। पहले भारत पर कुल मिलाकर करीब 18% टैरिफ लग रहा था, लेकिन नए फैसले के बाद यह घटकर 10% रह जाएगा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से व्यापार समझौता कर चुके देशों—जिनमें भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ शामिल हैं—अब पहले तय दर की बजाय इस नए 10% ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आएंगे। ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया।
ट्रम्प का कोर्ट पर तीखा हमला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रम्प ने कुछ जजों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जजों में देशहित में सही फैसला लेने का साहस नहीं है और वे राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।
ट्रम्प ने फैसले को “बेहद निराशाजनक” बताते हुए कहा कि कुछ जज अमेरिका को मजबूत बनाने वाले हर कदम का विरोध करते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अहम बातें
- नए टैरिफ लागू करने के लिए उन्हें संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं है, वे राष्ट्रपति को मिले अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे।
- टैरिफ के रूप में वसूले गए पैसे की वापसी को लेकर कोर्ट ने कुछ स्पष्ट नहीं कहा है, इसलिए सरकार रिफंड नहीं देगी।
- यह मामला आने वाले वर्षों तक अदालतों में चल सकता है।
- ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर है।
- उनका कहना है कि अगर पहले के राष्ट्रपति समय रहते टैरिफ लगाते, तो अमेरिका कमजोर नहीं होता।




