दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म अवॉर्ड Academy Awards यानी ऑस्कर जीतना हर कलाकार का सपना होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ट्रॉफी को आप चाहकर भी खुले बाजार में नहीं बेच सकते। दरअसल, 1951 के बाद से Academy of Motion Picture Arts and Sciences ने इस पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। नियम के अनुसार, अगर कोई विजेता अपनी ऑस्कर ट्रॉफी बेचना चाहता है, तो उसे सबसे पहले इसे अकादमी को ही सिर्फ 1 डॉलर में ऑफर करना होगा। यही नियम उनके परिवार या वारिसों पर भी लागू होता है, ताकि यह सम्मान किसी नीलामी या व्यापार का हिस्सा न बन सके।
हालांकि, 1951 से पहले दिए गए ऑस्कर इस नियम के दायरे में नहीं आते, और इसी वजह से इतिहास में कई ट्रॉफियां करोड़ों में बिक चुकी हैं। सबसे चर्चित उदाहरण पॉप स्टार Michael Jackson का है, जिन्होंने क्लासिक फिल्म Gone with the Wind का बेस्ट पिक्चर ऑस्कर करीब 1.5 मिलियन डॉलर में खरीदा था। इसी तरह Citizen Kane से जुड़ी ट्रॉफी भी भारी रकम में नीलाम हुई थी। इन घटनाओं ने दिखाया कि ऑस्कर ट्रॉफी सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि एक कीमती कलेक्टर आइटम भी बन चुकी थी।
ऑस्कर ट्रॉफी का डिजाइन भी अपने आप में खास है। इसे Cedric Gibbons ने डिजाइन किया था और मूर्तिकार George Stanley ने इसे आकार दिया। यह एक योद्धा की आकृति होती है जो तलवार पकड़े फिल्म रील पर खड़ा होता है, जो सिनेमा की पांच प्रमुख शाखाओं का प्रतीक माना जाता है। देखने में यह भले ही सोने की बनी लगे, लेकिन असल में यह गोल्ड-प्लेटेड ब्रॉन्ज से तैयार की जाती है।
ऑस्कर की बढ़ती खरीद-फरोख्त और नीलामी को देखते हुए अकादमी को यह सख्त नियम लागू करना पड़ा, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं यह अवॉर्ड अपनी गरिमा न खो दे। अगर लोग इसे खुलेआम बेचने लगते, तो यह सम्मान कम और व्यापार ज्यादा बन जाता। यही कारण है कि आज ऑस्कर ट्रॉफी की असली कीमत उसकी धातु या बाजार मूल्य नहीं, बल्कि वह प्रतिष्ठा है जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म सम्मान बनाती है।




