नई दिल्ली/ढाका।
बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार को चटगांव बंदरगाह से जुड़ी अपनी बड़ी योजना पर कदम पीछे खींचने पड़े हैं। बढ़ते मजदूर विरोध और आम चुनाव से पहले बने दबाव के चलते सरकार ने प्रमुख कंटेनर टर्मिनल को विदेशी कंपनी को पट्टे पर देने के प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया है।
दरअसल, 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले चटगांव पोर्ट के मजदूरों ने सरकार के फैसले के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल छेड़ दी थी। इससे पहले भी वे छह दिन तक काम बंद रख चुके थे और दो दिन का अंतराल लेने के बाद फिर से आंदोलन पर उतर आए।
राजधानी ढाका में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश निवेश विकास प्राधिकरण (BIDA) के अध्यक्ष आशिक बिन हारुन ने साफ किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इस लीज पर आगे बढ़ना संभव नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे पर चर्चा चुनाव के बाद बनने वाली अगली सरकार के जिम्मे छोड़ी जा सकती है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दुबई की बहुराष्ट्रीय कंपनी डीपी वर्ल्ड को न्यू मूरिंग कंटेनर टर्मिनल (NCT) सौंपने को लेकर बातचीत लगभग अंतिम दौर में थी। हालांकि, हाल ही में डीपी वर्ल्ड ने बांग्लादेश सरकार को पत्र लिखकर बातचीत की दिशा की सराहना करते हुए मसौदा समझौते की समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
इधर, हड़ताल का असर सीधे बंदरगाह संचालन पर भी दिखा। चटोग्राम पोर्ट अथॉरिटी (CPA) के मुताबिक कंटेनर जहाज MSC पोलो तय समय पर बंदरगाह नहीं छोड़ सका। प्रदर्शनकारियों की वजह से जरूरी नेविगेशन और लॉजिस्टिक सेवाएं बाधित हो गई थीं। पहले ही एक बार रवानगी टाल चुके इस जहाज को एक्सपोर्ट कंटेनरों की कमी के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा।
हालात तब संभले जब अथॉरिटी ने टगबोट की व्यवस्था की और हाई टाइड के अंत में दो जहाजों को दोपहर करीब दो बजे रवाना किया जा सका।
गौरतलब है कि मजदूर सितंबर से ही इस लीज के खिलाफ रुक-रुक कर विरोध जता रहे हैं। वहीं कुछ लॉबिंग समूहों ने पोर्ट अथॉरिटी पर आरोप लगाया है कि डीपी वर्ल्ड को ऑपरेशन सौंपने को सही ठहराने के लिए जानबूझकर सर्विस चार्ज बढ़ाए गए।
कुल मिलाकर, मजदूरों के तीखे विरोध और चुनावी माहौल ने यूनुस सरकार को इस अहम फैसले पर फिलहाल ब्रेक लगाने के लिए मजबूर कर दिया है।



