चैत्र नवरात्र 2026 का छठा दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित है। इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा के साथ मां की उपासना करते हैं और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर भय, रोग और दुख दूर हो जाते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए कठोर तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें वरदान दिया कि वह स्वयं उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। बाद में देवी ने उनके घर जन्म लिया और कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं। इसी दौरान महिषासुर नामक दैत्य का अत्याचार बढ़ गया था, जिससे देवता और मानव सभी परेशान थे। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से उत्पन्न देवी ने महर्षि कात्यायन के घर अवतार लेकर महिषासुर का संहार किया। इसी कारण मां को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनके चार हाथ होते हैं। एक हाथ अभय मुद्रा में भक्तों को निर्भयता देता है, जबकि दूसरा हाथ वरदान देने के लिए होता है। अन्य दो हाथों में वे तलवार और कमल धारण करती हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं इस दिन व्रत रखकर मां से मनचाहा वर मांगती हैं। पूजा के दौरान लाल वस्त्र पहनना और मां को शहद का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही साधक इस दिन अपने मन को आज्ञा चक्र में केंद्रित कर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
ब्रज क्षेत्र में मां कात्यायनी को विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर मां कात्यायनी की आराधना की थी। कहा जाता है कि मां कात्यायनी की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।




