अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर आज (17 फरवरी 2026) स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दूसरे दौर की बातचीत हो रही है। इस बैठक से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह सीधे नहीं, बल्कि इनडायरेक्ट तरीके से इस बातचीत पर नजर रखेंगे। ट्रम्प ने एयर फोर्स वन में मीडिया से कहा कि ईरान इस बार समझौते को लेकर ज्यादा गंभीर दिख रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान की सोच बदली है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर डील नहीं हुई, तो इसके नतीजे ईरान के लिए भारी हो सकते हैं।
बातचीत के केंद्र में क्या-क्या मुद्दे हैं?
- यूरेनियम संवर्धन: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यहां यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे या बेहद सीमित स्तर पर रखे।
- यूरेनियम भंडार: वॉशिंगटन की मांग है कि ईरान अपने हाई-ग्रेड संवर्धित यूरेनियम को या तो नष्ट करे, पतला करे या देश से बाहर भेजे।
- प्रतिबंधों में राहत: बदले में ईरान चाहता है कि उस पर लगे तेल, बैंकिंग और वित्तीय प्रतिबंध हटाए जाएं।
वार्ता के बीच ईरान का शक्ति प्रदर्शन
परमाणु बातचीत से पहले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में नौसैनिक अभ्यास शुरू कर दिया है। इस दौरान जहाजों को चेतावनी भी दी गई है कि कुछ इलाकों में फायरिंग ड्रिल हो सकती है।
ईरान का संकेत: डील मुमकिन है
ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा है कि अगर अमेरिका प्रतिबंधों पर बातचीत को तैयार हो, तो ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम में रियायत देने पर विचार कर सकता है। उन्होंने 60% तक संवर्धित यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव देने की बात भी कही। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम उसकी ‘रेड लाइन’ है और इस पर कोई बातचीत नहीं होगी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी तैनाती
ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड समेत कई युद्धपोत, फाइटर जेट और निगरानी विमान क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं। कुल मिलाकर एक तरफ जिनेवा में बातचीत की मेज सजी है, दूसरी ओर खाड़ी में सैन्य हलचल तेज है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह वार्ता समझौते तक पहुंचती है या तनाव और बढ़ेगा।




