दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। पांच दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया भर से सरकार, उद्योग और रिसर्च से जुड़े दिग्गज एक मंच पर जुटे हैं। चौथे दिन के सत्र में भारत और विदेशों के शीर्ष नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर बड़े और स्पष्ट संकेत दिए।
समिट का उद्घाटन 16 फरवरी को नरेंद्र मोदी ने किया था। कार्यक्रम में 110 से अधिक देशों की भागीदारी है, जिनमें 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 30 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और 500 से अधिक वैश्विक AI विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 CEO और फाउंडर्स, 150 से ज्यादा शिक्षाविद व रिसर्चर, 400 CTO/VP और 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी मौजूद हैं।
PM मोदी: तकनीक बड़ी हो, पर नियंत्रण और नैतिकता जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि AI की गति और विस्तार हमारी कल्पना से कहीं आगे जा चुका है। ऐसे में जरूरी है कि बड़े लक्ष्य तय किए जाएं, लेकिन उनके साथ जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि AI किसी एक देश या कंपनी की जागीर नहीं बननी चाहिए। हमें यह सोचना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए किस तरह की तकनीक छोड़ रहे हैं। इतिहास गवाह है कि विज्ञान ने विनाश भी दिखाया है और समाधान भी चुनाव हमारे हाथ में है।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत के युवा जिस आत्मविश्वास के साथ AI को अपना रहे हैं, वह भविष्य के लिए शुभ संकेत है। कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दिख रहे नवाचार ‘मेक इन इंडिया’ की सोच को मजबूती देते हैं।
गूगल CEO पिचाई: AI से अरबों लोगों की जिंदगी बदलेगी
समिट में गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में अरबों लोगों के जीवन पर सीधा असर डालेगी। सही नीतियों और समावेशी दृष्टिकोण के साथ यह तकनीक विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है।
मैक्रों की सराहना: भारत का डिजिटल मॉडल दुनिया के लिए उदाहरण
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब नागरिकों के लिए डिजिटल पहचान, हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन संभालने वाला पेमेंट सिस्टम और सैकड़ों मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी, यह सब भारत ने कर दिखाया, जो किसी और देश के लिए आसान नहीं था।
मैक्रों ने यह भी कहा कि आज AI, GPU और चिप्स सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं रह गए हैं, बल्कि जियोपॉलिटिक्स और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अहम कारक बन चुके हैं। भारत द्वारा स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स (SML) को अपनाना एक सोच-समझकर लिया गया संप्रभु निर्णय है। सरकार समर्थित पहले AI मॉडल और स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर 38,000 GPUs उपलब्ध कराना भारत की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह संदेश साफ कर दिया है कि AI का भविष्य सिर्फ ताकतवर तकनीक में नहीं, बल्कि साझा विकास, जिम्मेदारी और समान अवसर में छिपा है।




