अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और कूटनीतिक खींचतान के बीच परमाणु वार्ता एक बार फिर शुरू होने जा रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने बैठकर परमाणु कार्यक्रम और संभावित समझौते को लेकर बातचीत करेंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों में पिछले कुछ समय से तनाव बढ़ा हुआ है। एक तरफ जहां अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है, वहीं ईरान अपने परमाणु अधिकारों और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है।
वार्ता से ठीक पहले फारस की खाड़ी में ईरान की ओर से की गई कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। ईरानी अधिकारियों ने ईंधन की कथित तस्करी के आरोप में दो विदेशी तेल टैंकरों को अपने कब्जे में लिया है।
इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है।
फारस की खाड़ी में ईरान की बड़ी कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने फारस की खाड़ी में दो विदेशी तेल टैंकरों को जब्त किया है। इन जहाजों पर कथित रूप से अवैध तरीके से ईंधन ले जाने का आरोप लगाया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने अभी तक दोनों टैंकरों की राष्ट्रीयता या उनके झंडे से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के बाद दोनों जहाजों को बुशहर बंदरगाह ले जाया गया।
बुशहर ईरान का एक महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र है और यहां से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। ईरानी सुरक्षा बलों की ओर से की गई इस कार्रवाई ने क्षेत्र में निगरानी और समुद्री सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
टैंकरों में मिला करीब 10 लाख लीटर डीजल
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना के क्षेत्रीय कमांडर जनरल हैदर होनारियन मोजर्रद ने जानकारी दी कि दोनों टैंकरों में बड़ी मात्रा में डीजल मौजूद था।
उनके अनुसार, जहाजों में करीब 10 लाख लीटर डीजल था, जिसे कथित रूप से अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई फारसी द्वीप के आसपास के क्षेत्र में की गई।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री रास्तों से होने वाली ईंधन तस्करी को रोकने के लिए ऐसी कार्रवाई की जाती है। ईरान लंबे समय से अवैध ईंधन व्यापार के खिलाफ अभियान चलाने की बात कहता रहा है।
हालांकि, इस मामले में अभी तक जब्त किए गए जहाजों के मालिकों या उनसे जुड़े पक्षों की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
15 क्रू सदस्यों को हिरासत में लिया गया
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों टैंकरों पर मौजूद कुल 15 चालक दल के सदस्यों को न्यायिक हिरासत में लिया गया है।
हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इन क्रू सदस्यों की नागरिकता के बारे में जानकारी साझा नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
ईरान पहले भी समुद्री नियमों के उल्लंघन और कथित ईंधन तस्करी के आरोपों में कई विदेशी जहाजों को रोक चुका है। इन घटनाओं को लेकर कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं।
अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता पर दुनिया की नजर
तेल टैंकरों की जब्ती की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता होने वाली है।
मस्कट में होने वाली इस बैठक को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल होंगे।
वार्ता का मुख्य मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा रहेगा। इसमें वर्ष 2015 में हुए परमाणु समझौते यानी जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) को दोबारा सक्रिय करने या किसी नए समझौते की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।
2015 परमाणु समझौते पर फिर शुरू हुई कोशिशें
साल 2015 में ईरान और विश्व की प्रमुख शक्तियों के बीच परमाणु समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं तय की गई थीं और इसके बदले में उस पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी गई थी।
हालांकि, वर्ष 2018 में अमेरिका तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस समझौते से बाहर हो गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया।
ईरान ने भी समय के साथ परमाणु गतिविधियों से जुड़ी कुछ सीमाओं को पार करने की घोषणा की। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार इस मुद्दे पर बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश करता रहा है।
बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी
अमेरिका और ईरान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों पर मतभेद हैं।
अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा चिंताएं जाहिर करता रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे अपने अधिकारों के तहत काम करने की अनुमति होनी चाहिए।
ऐसे समय में होने वाली यह वार्ता दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का अवसर मानी जा रही है।
फारस की खाड़ी की रणनीतिक अहमियत
फारस की खाड़ी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है।
इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि फारस की खाड़ी में होने वाली हर सैन्य या समुद्री गतिविधि पर दुनिया की नजर रहती है।
ईरान की ओर से टैंकरों को जब्त किए जाने की घटना भी इसी रणनीतिक महत्व के कारण चर्चा में है।
परमाणु वार्ता से जुड़ी उम्मीदें और चुनौतियां
अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता को लेकर उम्मीदें भी हैं और चुनौतियां भी। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
जहां अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, वहीं ईरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग करता रहा है।
ऐसे में मस्कट में होने वाली बातचीत यह तय कर सकती है कि दोनों देश आगे किस दिशा में बढ़ते हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके परिणाम का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।




