आज के दौर में तनाव सिर्फ हमारी अपनी समस्याओं से ही नहीं, बल्कि दूसरों की परेशानियों से भी पैदा होने लगा है। कई बार ऐसा होता है कि बिना किसी ठोस कारण के मन भारी रहता है, चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है और समझ नहीं आता कि आखिर परेशानी की जड़ क्या है। दरअसल, यह स्थिति ‘सेकेंड हैंड स्ट्रेस’ का संकेत हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक तरह का भावनात्मक प्रभाव है जो हमारे आसपास के माहौल से हम तक पहुंचता है। अगर परिवार, दोस्त या सहकर्मी लगातार तनाव में रहते हैं, तो उनका असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है। धीरे-धीरे यह तनाव हमारी सोच और व्यवहार को प्रभावित करने लगता है।
डॉक्टरों का कहना है कि दिमाग कई बार सीधे और अप्रत्यक्ष तनाव में अंतर नहीं कर पाता। इसी वजह से हम दूसरों की समस्याओं को भी अपनी तरह महसूस करने लगते हैं। खासकर सोशल मीडिया और लगातार नकारात्मक खबरें देखने से यह समस्या और बढ़ जाती है।
कैसे पहचानें यह तनाव?
अगर आप बिना वजह बेचैन रहते हैं, छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाते हैं या लगातार थकान महसूस करते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आप सेकेंड हैंड स्ट्रेस से गुजर रहे हैं।
बचाव के आसान उपाय
- भावनात्मक सीमाएं तय करें: हर समस्या को अपनी जिम्मेदारी न बनाएं। जब तक कोई आपसे मदद न मांगे, खुद को उसमें पूरी तरह शामिल न करें।
- खुद का ध्यान रखें: योग, ध्यान और गहरी सांसों के अभ्यास से मन को शांत रखें। इससे मानसिक मजबूती बढ़ती है।
- डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं: लगातार नकारात्मक खबरों और सोशल मीडिया से दूरी बनाना जरूरी है।
- जो आपके नियंत्रण में है, उसी पर ध्यान दें: दूसरों के व्यवहार या भावनाओं को आप नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया जरूर संभाल सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते इस तरह के तनाव को न समझा जाए, तो यह धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं को पहचानें और खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित रखें।




