भारत और फ्रांस के रिश्तों में आज एक अहम मोड़ आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच करीब ₹3.25 लाख करोड़ की डिफेंस डील को अंतिम रूप दिया गया।
डील की खास बातें
- भारत को कुल 114 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे
- यह अब तक की भारत की सबसे बड़ी सैन्य खरीद होगी
- डिलीवरी 2028–29 से शुरू होने की योजना
कौन-सा राफेल, कितना एडवांस?
- ज्यादातर विमान F-4 वर्जन के होंगे
- 24 जेट ‘सुपर राफेल’ (F-5) श्रेणी के होंगे
- F-5 वर्जन अभी डेवलपमेंट स्टेज में है और 2030 के बाद मिलेगा
मेक इन इंडिया को बड़ा बूस्ट
- 114 में से 96 राफेल भारत में बनाए जाएंगे
- लगभग 60% पार्ट्स स्वदेशी होंगे
- निर्माण में फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation भारतीय साझेदार के साथ काम करेगी
पहले से मौजूद राफेल ताकत
- भारत के पास पहले से 36 राफेल जेट हैं
- ये अंबाला और हासीमारा एयरबेस पर तैनात हैं
- मीटियोर, स्कैल्प और MICA मिसाइलों से लैस
सिर्फ डिफेंस नहीं, टेक्नोलॉजी भी एजेंडे में
बैठक में रक्षा के अलावा:
- इंडो-पैसिफिक रणनीति
- समुद्री सहयोग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- उभरती और डीप-टेक तकनीक
भारत–फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026
- दोनों नेताओं ने भारत–फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026 का उद्घाटन किया
- फोकस: AI, स्टार्टअप्स, ग्रीन एनर्जी और रिसर्च
- फ्रांस से 110+ कंपनियों का बिजनेस डेलिगेशन भारत आया
क्यों अहम है यह डील?
- भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग
- भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिनके पास सुपर-एडवांस राफेल क्षमता होगी
कुल मिलाकर, यह समझौता सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तकनीक की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


