मीठे पेय बन रहे ‘साइलेंट ट्रिगर’? किशोरों में चिंता का जोखिम 34% तक अधिक

मीठे पेय बन रहे ‘साइलेंट ट्रिगर’? किशोरों में चिंता का जोखिम 34% तक अधिक

नई दिल्ली। हालिया अध्ययन में संकेत मिला है कि शुगर से भरपूर पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले टीनएजर्स में एंग्जायटी का खतरा 34% तक बढ़ सकता है।

ब्रिटेन की Bournemouth University के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन Journal of Human Nutrition and Dietetics में प्रकाशित हुआ है। इसमें किशोरों के खानपान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

किन ड्रिंक्स पर चिंता?

शोध में शामिल पेय पदार्थों में सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, मीठे पैक्ड जूस, शुगर वाली चाय-कॉफी और फ्लेवर मिल्क शामिल हैं—जिनमें पोषण कम और चीनी अधिक होती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

World Health Organization के अनुसार, 10 से 19 वर्ष के हर सात में से एक किशोर मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में खानपान की आदतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

हालांकि अध्ययन सीधे तौर पर कारण साबित नहीं करता, लेकिन शुगरी ड्रिंक्स और एंग्जायटी के बीच मजबूत संबंध की ओर इशारा जरूर करता है।