यौन आरोपों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: कहा– ‘सच सामने आएगा, ईश्वर और अंतरात्मा पर विश्वास’

यौन आरोपों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: कहा– ‘सच सामने आएगा, ईश्वर और अंतरात्मा पर विश्वास’

प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा मामला चर्चा में बना हुआ है। नाबालिगों से जुड़े यौन शोषण के आरोपों के बाद अब इस पूरे प्रकरण पर शंकराचार्य की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि वह कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर पूरा विश्वास रखते हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि यदि पुलिस या जांच एजेंसी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाती है या हिरासत में लेना चाहती है, तो वह किसी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उनके अनुसार, अंतिम फैसला सच्चाई और तथ्यों के आधार पर ही होगा।

उन्होंने कहा कि वह स्वयं को निर्दोष मानते हैं और उनकी अंतरात्मा इस बात की गवाही देती है। उन्होंने ईश्वर पर विश्वास जताते हुए कहा कि सत्य को ज्यादा समय तक छिपाया नहीं जा सकता। चाहे किसी व्यक्ति के खिलाफ कितने भी आरोप लगाए जाएं, लेकिन जांच और समय के साथ वास्तविकता सामने आ जाती है।

शंकराचार्य ने आरोपों को बताया गलत

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगना एक अलग बात है, जबकि आरोपों का प्रमाणित होना अलग विषय है।

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और जांच एजेंसियों को सभी पक्षों को ध्यान में रखकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर मामले की सही तरीके से जांच होगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि वह जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि कानून के तहत उनसे किसी भी प्रकार की जानकारी मांगी जाती है तो वह सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

गुरुकुल से संबंध नहीं होने का किया दावा

मामले में जिन बच्चों का नाम सामने आ रहा है, उनके संबंध में भी शंकराचार्य ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि संबंधित बच्चे उनके गुरुकुल या आश्रम से जुड़े हुए नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे हरदोई के एक विद्यालय में पढ़ते हैं। शंकराचार्य के अनुसार, उनके पास ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि उनका संस्थान उन बच्चों की शिक्षा या गतिविधियों से संबंधित नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी व्यक्ति या संस्थान से बच्चों का सीधा संबंध ही नहीं है, तो मामले को उससे जोड़ने का आधार क्या है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान इन सभी तथ्यों की जांच होनी चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

सीडी और वीडियो को लेकर उठाए सवाल

मामले में चर्चा में आई सीडी और कथित वीडियो को लेकर भी शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई रिकॉर्डिंग या वीडियो मौजूद है तो उसे जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी के पास सीडी होने का दावा किया जा रहा है तो उसे सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोप की पुष्टि के लिए प्रमाण आवश्यक होते हैं और केवल चर्चाओं के आधार पर किसी व्यक्ति के बारे में राय नहीं बनाई जानी चाहिए।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगर कोई वीडियो या रिकॉर्डिंग मौजूद है तो उसकी सत्यता, उसे तैयार करने वाले व्यक्ति और उसके समय की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी साक्ष्य किसी भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों का हवाला देते हुए कहा कि घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी की व्यवस्था मौजूद थी।

उन्होंने कहा कि जिस समय की घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है, उस दौरान वह और उनका वाहन सड़क पर मौजूद थे। उनके अनुसार, यदि किसी प्रकार की गलत गतिविधि हुई होती तो वह सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में दिखाई दे सकती थी।

उन्होंने जांच एजेंसियों से अपील की कि उपलब्ध सभी तकनीकी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जाए। उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच से ही सही तथ्य सामने आ सकते हैं।

कानून और न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसा

शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और जांच प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में किसी भी व्यक्ति की छवि प्रभावित होने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी मामले में अंतिम निर्णय जांच पूरी होने से पहले न लें।

उनके अनुसार, सच्चाई हमेशा सामने आती है और न्याय व्यवस्था के माध्यम से ही सही निर्णय लिया जा सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी हुई सामने

इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और शंकराचार्य के समर्थन में बयान दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है और बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, मामला अभी जांच के चरण में है और पुलिस की जांच के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर

प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान आरोपों, दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों को देखा जाएगा।

वहीं, शंकराचार्य ने अपने बयान में साफ किया है कि वह कानून का पालन करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आने में समय लग सकता है, लेकिन निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच, कानूनी प्रक्रिया और सामने आने वाले नए तथ्यों पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।