रेको डिक में अमेरिकी दांव: पाकिस्तान को आर्थिक संजीवनी, बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट गहराया

रेको डिक में अमेरिकी दांव: पाकिस्तान को आर्थिक संजीवनी, बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट गहराया

वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच रणनीतिक सहयोग एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित रेको डिक तांबा-सोना परियोजना में 1.3 अरब डॉलर का निवेश करने का फैसला किया है। यह निवेश अमेरिका की नई पहल ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत किया जाएगा, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में अहम खनिज संसाधनों की आपूर्ति को सुरक्षित करना है।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, रेको डिक परियोजना अमेरिका के बाहर इकलौता ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसे प्रोजेक्ट वॉल्ट के अंतर्गत फंडिंग मिली है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दबाव से जूझ रहा है और विदेशी निवेश की सख्त जरूरत में है।

EXIM बैंक की बड़ी भूमिका

इस निवेश की अगुवाई यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) कर रहा है। EXIM ने खनिज परियोजनाओं के लिए कुल 10 अरब डॉलर तक के कर्ज को मंजूरी दी है, जो उसके इतिहास के सबसे बड़े लोन पैकेजों में शामिल है। इसमें पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब डॉलर की राशि तय की गई है। कुल मिलाकर, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में EXIM ने 14.8 अरब डॉलर के लेटर ऑफ इंटरेस्ट जारी किए हैं।

क्यों अहम है रेको डिक खदान

रेको डिक को दुनिया के सबसे बड़े अप्रयुक्त तांबा-सोना भंडारों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यहां करीब 5.9 अरब टन अयस्क मौजूद है, जिसमें लगभग 0.41% तांबा और 4.15 करोड़ औंस सोना शामिल है। इसी वजह से इस परियोजना की अनुमानित कीमत 500 अरब डॉलर से लेकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक बताई जाती है।

यह इलाका बलूचिस्तान के चगाई ज्वालामुखीय क्षेत्र में स्थित है और रणनीतिक रूप से अफगान सीमा के नजदीक पड़ता है। पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि यह खदान आने वाले 50 वर्षों से ज्यादा समय तक देश को राजस्व दे सकती है।

पुराना विवाद, नई शुरुआत

रेको डिक परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। साल 2011 में पाकिस्तान सरकार और टेथियन कॉपर कंपनी (TCC) के बीच कानूनी टकराव हुआ था, जिसने इस खदान के विकास को लंबे समय तक रोक दिया। अब नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय निवेश के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों का सही इस्तेमाल करे, तो देश गरीबी और कर्ज के दलदल से बाहर निकल सकता है।

BLA से टकराव का खतरा

हालांकि, इस परियोजना की राह आसान नहीं है। बलूचिस्तान में सक्रिय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) लंबे समय से पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रही है। यह संगठन विदेशी कंपनियों को क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का खुला विरोध करता रहा है।

हाल के महीनों में BLA ने पाकिस्तानी सेना पर कई घातक हमले किए हैं। ऐसे में अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से बड़ा जोखिम मानी जा रही है।

अमेरिका का सख्त संदेश

अमेरिका ने बलूचिस्तान में हुए हालिया आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की है और साफ किया है कि वह पाकिस्तान के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही BLA को एक नामित विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह रुख भविष्य में अमेरिका और BLA के बीच सीधे टकराव की आशंका को भी बढ़ाता है।

कुल मिलाकर, रेको डिक परियोजना पाकिस्तान के लिए आर्थिक अवसर है, लेकिन साथ ही यह बलूचिस्तान में सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती है।