आज की शादियां अब सिर्फ धूम-धड़ाके और दिखावे तक सीमित नहीं रहीं। नई पीढ़ी के लिए विवाह एक निजी, भावनात्मक और सोच-समझकर रचा गया अनुभव बन चुका है। इसी सोच से जन्म ले रहा है ‘क्वाइट लग्जरी वेडिंग’ का चलन, जिसमें कम शोर, कम तामझाम और ज्यादा सुकून दिखाई देता है।
क्यों बदल रही है शादी की परिभाषा?
आज के युवा शादी को जीवन की शुरुआत के रूप में देखते हैं, न कि केवल एक दिन के बड़े आयोजन के तौर पर। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर यह पीढ़ी अपनी शर्तों पर शादी करना चाहती है, जहां हर रस्म, हर डिटेल और हर चुनाव उनके व्यक्तित्व को दर्शाए। इसलिए अब “ज्यादा” की जगह “बेहतर” पर फोकस है। ‘क्वाइट लग्जरी’ का मतलब है ऐसी लग्जरी जो चिल्लाती नहीं, बल्कि महसूस होती है। भारी ब्रांडिंग या चमक-दमक की बजाय अच्छे फैब्रिक, क्लासिक कट्स, सॉफ्ट रंग और बारीक फिनिशिंग को तरजीह दी जा रही है। ईको-फ्रेंडली वेन्यू, सस्टेनेबल डेकोर और सीमित लेकिन अपने लोगों की मौजूदगी—यही इस ट्रेंड की पहचान है।
डेकोर और म्यूजिक में भी आया बदलाव
आजकल कई जोड़े भड़कीले फूलों और ओवर-द-टॉप लाइटिंग से दूरी बना रहे हैं। पेस्टल शेड्स, सफेद रंग और नेचुरल एलिमेंट्स ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। वहीं, तेज डीजे म्यूजिक की जगह सूफी, ग़ज़ल या लाइव अकूस्टिक नाइट्स जैसी शांत और भावनात्मक महफिलें प्लान की जा रही हैं।
पहनावे में बैलेंस, न कि बोझ
ब्राइडल फैशन में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। भारी-भरकम लहंगों की जगह ऐसे आउटफिट्स चुने जा रहे हैं, जिनमें परंपरा की झलक के साथ आधुनिकता का संतुलन हो। कपड़े ऐसे हों जिन्हें पहनकर दुल्हन सहज महसूस करे—यही प्राथमिकता है।गहनों को लेकर भी सोच बदली है। अब ज्वैलरी सिर्फ तिजोरी में रखने की चीज नहीं रही। पोलकी और हल्के डिज़ाइन ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं, जिन्हें शादी के बाद भी अलग-अलग मौकों पर पहना जा सके। एक ही भारी सेट को हर फंक्शन में दोहराने का चलन कम हो रहा है। मेकअप में भी “नेचुरल इज ब्यूटीफुल” का सिद्धांत अपनाया जा रहा है। ट्रायल के बाद स्किन टोन के हिसाब से लुक चुना जाता है, ताकि दुल्हन शादी के दिन खुद जैसी लगे, न कि किसी और की कॉपी।
कुल मिलाकर, ‘क्वाइट लग्जरी’ वाली शादियां इस बात का संकेत हैं कि नई पीढ़ी के लिए शादी दिखाने का नहीं, जीने का पल है। शांति, अपनापन और अर्थपूर्ण चुनाव—यही आज की मॉडर्न वेडिंग की असली पहचान बनते जा रहे हैं।




