1.5 करोड़ की रकम जमा होते ही Rajpal Yadav को मिली अस्थायी रिहाई, 18 मार्च तक जेल से बाहर रहने की अनुमति

1.5 करोड़ की रकम जमा होते ही Rajpal Yadav को मिली अस्थायी रिहाई, 18 मार्च तक जेल से बाहर रहने की अनुमति

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बड़ी राहत मिली है। साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े आर्थिक विवाद के कारण उन्हें तिहाड़ जेल में जाना पड़ा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की, जिससे वह अपने परिवार के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हो सकें।

अदालत ने राजपाल यादव को उनकी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की राहत दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिली है। इस दौरान उन्हें अदालत द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करना होगा।

यह मामला कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और इसमें फिल्म निर्माण के लिए लिए गए कर्ज, चेक बाउंस और भुगतान से जुड़े विवाद शामिल हैं। राजपाल यादव की ओर से अदालत में आर्थिक स्थिति और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए राहत की मांग की गई थी।

1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर मिली राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी थी। अदालत ने अभिनेता को 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित समय के भीतर राशि जमा होने पर ही अंतरिम राहत दी जाएगी। अदालत की ओर से तय समय सीमा के अनुसार दोपहर 3 बजे तक रकम जमा करनी थी। निर्धारित समय के अंदर राशि जमा कर दी गई, जिसके बाद राजपाल यादव को जेल से बाहर आने की अनुमति मिल गई।

अदालत ने इसके साथ ही कुछ अन्य शर्तें भी रखीं। इनमें पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश शामिल है, ताकि मामले की सुनवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है। उस दौरान अदालत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार करेगी।

पहले अदालत ने नहीं दी थी राहत

इससे पहले 12 फरवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने राजपाल यादव की याचिका पर सख्त रुख अपनाया था। न्यायालय ने कहा था कि भावनात्मक और व्यक्तिगत परिस्थितियां अपनी जगह हैं, लेकिन कानून के प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है।

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया था कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद अभिनेता ने समय पर आत्मसमर्पण नहीं किया था। इसके बाद राजपाल यादव ने 5 फरवरी को तिहाड़ जेल पहुंचकर सरेंडर किया था।

कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले राहत देने से इनकार किया था। हालांकि बाद में पारिवारिक कारणों और तय शर्तों को पूरा करने के आधार पर उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की गई।

फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने की मदद

राजपाल यादव ने पहले अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि बकाया राशि का भुगतान करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड के कई कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की।

बताया गया कि सलमान खान, सोनू सूद, अजय देवगन, वरुण धवन और डेविड धवन सहित कई लोगों ने सहयोग किया। वहीं गायक मीका सिंह ने भी आर्थिक मदद से जुड़ी जानकारी साझा की थी।

राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने मीडिया से बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि मुश्किल समय में मिले सहयोग को वह हमेशा याद रखेंगी।

क्या है राजपाल यादव और ‘अता पता लापता’ से जुड़ा विवाद

यह पूरा मामला साल 2010 से जुड़ा हुआ है, जब फिल्म निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से आर्थिक सहायता ली गई थी।

बताया जाता है कि फिल्म बनाने के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ साल 2012 में रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाई।

फिल्म के प्रदर्शन के बाद आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और कर्ज की राशि का भुगतान समय पर नहीं हो सका। इसके बाद कंपनी की ओर से भुगतान को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

मामला तब और गंभीर हो गया जब भुगतान के लिए दिए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज कराया।

निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला

चेक बाउंस मामले में साल 2018 में निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत छह महीने की सजा सुनाई थी।

इसके बाद मामले को आगे चुनौती दी गई और सत्र अदालत में अपील की गई। साल 2019 में सत्र अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

इसके बाद राजपाल यादव की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। मामला लगातार कानूनी प्रक्रिया में बना रहा और दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की जाती रहीं।

बकाया राशि बढ़कर कई करोड़ रुपये तक पहुंची

समय बीतने के साथ बकाया राशि पर ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ते गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

जून 2024 में हाई कोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए अभिनेता को बकाया राशि के भुगतान के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था।

अदालत ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया था कि मामले में राहत पाने के लिए भुगतान प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाना होगा। हालांकि बाद में तय शर्तों का पालन नहीं होने के कारण अदालत ने दोबारा आत्मसमर्पण का निर्देश दिया।

कानूनी प्रक्रिया के बीच अभिनेता को मिली अस्थायी राहत

राजपाल यादव को मिली अंतरिम जमानत केवल सीमित अवधि के लिए है। इसका उद्देश्य उन्हें पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर देना है। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

चेक बाउंस और आर्थिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालतें आमतौर पर भुगतान, कानूनी अनुपालन और संबंधित पक्षों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती हैं।

राजपाल यादव का मामला भी इसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें एक फिल्म से जुड़ा आर्थिक विवाद कई वर्षों बाद भी अदालत में चल रहा है।