Rajpal Yadav को चेक बाउंस मामले में बड़ी राहत मिली है। साल 2012 की फिल्म Ata Pata Laapata से जुड़े आर्थिक विवाद के चलते वह तिहाड़ जेल में बंद थे। 16 फरवरी को हुई सुनवाई में Delhi High Court ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वह अपनी भतीजी की शादी में शामिल हो सकें। अदालत ने उन्हें 18 मार्च तक के लिए राहत प्रदान की है।
1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त
हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत के लिए 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि दोपहर 3 बजे तक राशि जमा हो जाती है तो रिहाई दी जाएगी, अन्यथा अगली सुनवाई होगी। तय समय के भीतर रकम जमा कर दी गई, जिसके बाद उन्हें शाहजहांपुर में होने वाली पारिवारिक शादी में शामिल होने की अनुमति मिल गई। साथ ही, पासपोर्ट जमा कराने का आदेश भी दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय है।
पहले नहीं मिली थी राहत
12 फरवरी की सुनवाई में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। न्यायालय ने कहा था कि सहानुभूति अपनी जगह है, लेकिन कानून सर्वोपरि है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद अभिनेता ने समय पर सरेंडर नहीं किया था। बाद में उन्होंने 5 फरवरी को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया।
इंडस्ट्री से मिला समर्थन
आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए अभिनेता ने पहले कहा था कि उनके पास बकाया चुकाने का कोई स्पष्ट समाधान नहीं है। इसके बाद फिल्म जगत के कई लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया। बताया गया कि Salman Khan, Sonu Sood, Ajay Devgn, Varun Dhawan और David Dhawan ने सहयोग किया। वहीं गायक Mika Singh ने भी आर्थिक सहायता की जानकारी साझा की।
राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने मीडिया से बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री का आभार व्यक्त किया।
क्या है पूरा विवाद?
बताया जाता है कि 2010 में फिल्म निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये उधार लिए गए थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, जिसके बाद भुगतान नहीं हो सका। सात चेक बाउंस होने पर मामला दर्ज हुआ और 2018 में निचली अदालत ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई।
2019 में सत्र अदालत ने सजा को बरकरार रखा। बाद में हाई कोर्ट में अपील दायर की गई। जून 2024 में अदालत ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था, जो ब्याज और पेनल्टी मिलाकर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। हालांकि, शर्तों का पालन न होने पर 2 फरवरी को दोबारा सरेंडर का आदेश दिया गया था।



