54 साल बाद इंसानों की चांद के करीब वापसी, नासा का आर्टेमिस-II मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च

54 साल बाद इंसानों की चांद के करीब वापसी, नासा का आर्टेमिस-II मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए अपने महत्वाकांक्षी Artemis II मिशन की शुरुआत कर दी है। यह मिशन इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि करीब पांच दशकों के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) से आगे बढ़कर चंद्रमा के आसपास की यात्रा पर निकल रहे हैं।

2 अप्रैल को फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center से NASA के शक्तिशाली Space Launch System (SLS) रॉकेट ने उड़ान भरी। इस रॉकेट के ऊपर Orion spacecraft लगाया गया है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर दोबारा इंसानों को उतारने और मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की NASA की लंबी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Artemis II मिशन सीधे चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग नहीं करेगा, बल्कि यह एक मानवयुक्त चंद्र फ्लाईबाई मिशन है। इसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर यात्रा करेंगे और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटेंगे।

Artemis II मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Artemis II का सबसे बड़ा उद्देश्य भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण करना है।

इस मिशन में विशेष रूप से लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच की जाएगी। यह सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में सुरक्षित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

मिशन के दौरान वैज्ञानिक और इंजीनियर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि—

  • अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जीवन समर्थन प्रणाली कितनी प्रभावी है?
  • Orion spacecraft लंबे अंतरिक्ष सफर के दौरान कैसा प्रदर्शन करता है?
  • संचार प्रणाली कितनी भरोसेमंद रहती है?
  • अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को कैसे बेहतर तरीके से समझा जा सकता है?

इन परीक्षणों से भविष्य के Artemis III और अन्य गहरे अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी में मदद मिलेगी।

Apollo 17 के बाद पहली बार इंसानों का चंद्रमा के पास सफर

NASA का आखिरी मानव चंद्र मिशन Apollo 17 वर्ष 1972 में हुआ था। उसके बाद से इंसान कभी भी पृथ्वी की निचली कक्षा से इतनी दूर नहीं गया।

Artemis II के जरिए अंतरिक्ष यात्री फिर से उस क्षेत्र में पहुंचेंगे जहां से मानव ने दशकों पहले चंद्रमा की यात्रा की थी।

इस मिशन की सफलता भविष्य में चंद्रमा पर मानव वापसी के लिए आधार तैयार करेगी। NASA का लक्ष्य केवल चंद्रमा तक पहुंचना नहीं है, बल्कि वहां लंबे समय तक वैज्ञानिक गतिविधियां संचालित करने की क्षमता विकसित करना है।

करीब 10 दिन चलेगा मिशन

Artemis II मिशन लगभग 10 दिनों तक चलने की योजना है। इस दौरान Orion spacecraft पृथ्वी से दूर जाकर चंद्रमा के आसपास की कक्षा में यात्रा करेगा और फिर वापस लौटेगा।

इस सफर में अंतरिक्ष यात्री लगभग 11 लाख किलोमीटर (करीब 6,85,000 मील) की दूरी तय करेंगे।

यह दूरी मानव अंतरिक्ष यात्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को भविष्य के और लंबे मिशनों के लिए जरूरी अनुभव मिलेगा।

लॉन्च से पहले आई तकनीकी चुनौती

हर बड़े अंतरिक्ष मिशन की तरह Artemis II के लॉन्च से पहले भी इंजीनियरों को कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

उड़ान से ठीक पहले Launch Abort System से जुड़ी समस्या सामने आई। यह सिस्टम किसी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को रॉकेट से सुरक्षित अलग करने के लिए बनाया गया है।

NASA की इंजीनियरिंग टीम ने तुरंत समस्या की जांच की और आवश्यक सुधार किए। इसके बाद काउंटडाउन को रोककर सभी महत्वपूर्ण प्रणालियों की दोबारा जांच की गई।

सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही मिशन को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।

उड़ान के बाद संचार में आई परेशानी

लॉन्च के बाद भी मिशन टीम को कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

रिपोर्टों के अनुसार, उड़ान के लगभग 51 मिनट बाद सैटेलाइट हैंडओवर प्रक्रिया के दौरान कुछ समय के लिए संचार में बाधा आई।

इस दौरान ग्राउंड कंट्रोल सेंटर से आवाज अंतरिक्ष यात्रियों तक पहुंच रही थी, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों की प्रतिक्रिया नीचे मौजूद टीम तक नहीं पहुंच पा रही थी।

NASA की टीम ने स्थिति की जांच की और बाद में संचार व्यवस्था सामान्य हो गई।

इस तरह की तकनीकी समस्याएं अंतरिक्ष मिशनों में असामान्य नहीं होतीं और इन्हें मिशन कंट्रोल टीम लगातार मॉनिटर करती रहती है।

Orion spacecraft में आई छोटी तकनीकी समस्या

मिशन के शुरुआती चरण में Orion spacecraft के अंदर मौजूद टॉयलेट सिस्टम में भी समस्या आने की जानकारी सामने आई।

अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने इस समस्या को ठीक करने में मदद की।

अंतरिक्ष में छोटी से छोटी सुविधा भी बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि अंतरिक्ष यात्रियों को कई दिनों तक सीमित जगह में रहना पड़ता है। इसलिए जीवन समर्थन प्रणाली, भोजन व्यवस्था और व्यक्तिगत सुविधाओं का सही तरीके से काम करना मिशन की सफलता के लिए जरूरी होता है।

पहली बार हुआ मैनुअल कंट्रोल टेस्ट

Artemis II मिशन के दौरान एक महत्वपूर्ण परीक्षण भी किया गया। पायलट विक्टर ग्लोवर ने लगभग एक घंटे तक Orion spacecraft को मैनुअली नियंत्रित किया।

यह पहली बार था जब इस कैप्सूल को हाथ से नियंत्रित करके इसकी प्रतिक्रिया और संचालन क्षमता को परखा गया।

इस परीक्षण का उद्देश्य यह समझना था कि आवश्यकता पड़ने पर अंतरिक्ष यात्री किस तरह spacecraft को नियंत्रित कर सकते हैं।

विक्टर ग्लोवर ने अंतरिक्ष से दिखाई देने वाले नजारे को शानदार बताया और मिशन कंट्रोल टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

अंतरिक्ष यात्रियों की दिनचर्या कैसी होगी?

अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने लॉन्च सूट हटाकर आरामदायक कपड़े पहन लिए।

मिशन के दौरान उनकी दिनचर्या को बेहद व्यवस्थित रखा जाएगा। इसमें शामिल हैं—

  • नियमित मेडिकल जांच।
  • ग्राउंड टीम के साथ स्वास्थ्य अपडेट साझा करना।
  • spacecraft सिस्टम की निगरानी।
  • वैज्ञानिक परीक्षणों में भाग लेना।
  • मिशन से जुड़े तकनीकी डेटा एकत्र करना।

इसके अलावा आगे के चरण में Orion spacecraft की कक्षा को और ऊंचा करने के लिए इंजन का संचालन भी किया जाएगा।

Artemis II मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री

इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।

रीड वाइजमैन

रीड वाइजमैन इस मिशन के कमांडर हैं। वह एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री और टेस्ट पायलट हैं। मिशन का नेतृत्व करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है।

क्रिस्टीना कोच

क्रिस्टीना कोच NASA की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। वह लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं।

Artemis II मिशन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि पहली बार कोई महिला अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के इतने करीब तक जाएगी।

जेरेमी हैनसन

जेरेमी हैनसन कनाडा के अंतरिक्ष यात्री हैं। वह इस मिशन के माध्यम से चंद्र यात्रा करने वाले पहले कनाडाई अंतरिक्ष यात्री बनने जा रहे हैं।

विक्टर ग्लोवर

विक्टर ग्लोवर मिशन के पायलट हैं। वह चंद्रमा के आसपास पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनने जा रहे हैं।

यह मिशन अंतरिक्ष क्षेत्र में विविधता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी प्रतीक माना जा रहा है।

Apollo यान से Orion spacecraft कितना अलग है?

Orion spacecraft को आधुनिक तकनीक के साथ डिज़ाइन किया गया है। यह पुराने Apollo spacecraft की तुलना में कई मामलों में अधिक उन्नत है।

इसमें मौजूद सुविधाओं में शामिल हैं—

  • आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम।
  • बेहतर संचार तकनीक।
  • अधिक सुरक्षित जीवन समर्थन प्रणाली।
  • सोलर पावर सिस्टम।
  • अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बेहतर रहने की व्यवस्था।
  • आधुनिक नेविगेशन सिस्टम।

Orion को इस तरह बनाया गया है कि यह भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों में उपयोग किया जा सके।

Artemis कार्यक्रम का भविष्य क्या है?

Artemis II के बाद NASA का अगला लक्ष्य Artemis III मिशन के जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारना है।

इसके बाद Artemis कार्यक्रम के माध्यम से चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव गतिविधियों की संभावना तलाशने की योजना है।

NASA भविष्य में चंद्रमा को मंगल ग्रह की यात्रा के लिए एक परीक्षण स्थल के रूप में भी देख रहा है।

चंद्रमा पर स्थायी आधार तैयार करने से वैज्ञानिकों को लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी अनुभव मिलेगा।

चंद्रमा के पीछे से मिलेगी ऐतिहासिक तस्वीरें

Artemis II मिशन का सबसे रोमांचक हिस्सा वह समय होगा जब Orion spacecraft चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के पास पहुंचेगा।

इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसे दृश्य देखने को मिल सकते हैं जिन्हें अब तक केवल रोबोटिक मिशनों के माध्यम से देखा गया है।

इन तस्वीरों और वैज्ञानिक आंकड़ों से चंद्रमा और गहरे अंतरिक्ष को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।

Artemis II केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। यह मिशन यह तय करने में मदद करेगा कि भविष्य में इंसान चंद्रमा और उससे आगे मंगल जैसे ग्रहों तक कैसे सुरक्षित पहुंच सकता है। चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ शुरू हुआ यह सफर आने वाले वर्षों के मानव अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।