कोर्ट के सामने बेबस हुए राजपाल यादव, तिहाड़ में आत्मसमर्पण से पहले छलका दर्द

कोर्ट के सामने बेबस हुए राजपाल यादव, तिहाड़ में आत्मसमर्पण से पहले छलका दर्द

बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं बल्कि लंबा चला आ रहा कानूनी मामला है। 25 लाख रुपये के चेक बाउंस केस में राजपाल यादव ने हाल ही में तिहाड़ जेल में सरेंडर किया। सरेंडर से पहले पुलिस के सामने दिया गया उनका बयान अब सामने आया है, जिसने सबको भावुक कर दिया है।

“मेरे पास कोई सहारा नहीं” – बयान में टूटा हौसला
पुलिस को दिए बयान में राजपाल यादव ने अपनी कमजोर आर्थिक हालत का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए इतनी बड़ी रकम चुकाना मुमकिन नहीं है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर भी इशारों-इशारों में तंज कसते हुए कहा कि मुश्किल वक्त में साथ देने वाला कोई दोस्त नहीं होता। उनके शब्दों में साफ झलक रहा था कि वह खुद को बेहद अकेला महसूस कर रहे हैं।

सरेंडर के वक्त भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए राजपाल
तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण के दौरान राजपाल यादव काफी परेशान और भावुक नजर आए। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद फैंस ने बॉलीवुड इंडस्ट्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई लोग यह कहते दिखे कि जब कलाकार मुश्किल में होता है, तब इंडस्ट्री चुप क्यों रह जाती है।

कहां से शुरू हुआ पूरा मामला?
इस केस की जड़ें साल 2010 तक जाती हैं। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई और लोन चुकाना मुश्किल हो गया। इसी दौरान कई चेक बाउंस हुए और मामला अदालत तक पहुंच गया।

कोर्ट का फैसला और बढ़ता कर्ज
साल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन मामला लंबा खिंचता चला गया। ब्याज और देरी के चलते कर्ज की रकम बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

आखिर क्यों देना पड़ा जेल जाना?
हालांकि राजपाल यादव ने समय-समय पर कुछ रकम चुकाई, जिसमें 2025 में दिए गए 75 लाख रुपये भी शामिल हैं, लेकिन लगातार देरी और शर्तों का पालन न होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए आखिरकार उन्हें सरेंडर करने का आदेश दे दिया।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि चमक-दमक भरी फिल्म इंडस्ट्री के पीछे कलाकारों की जिंदगी कितनी असुरक्षित और अनिश्चित हो सकती है।