तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, काम का दबाव और बदलती आदतों के बीच आज की युवा पीढ़ी अनजाने में अपनी सेहत से समझौता कर रही है। यही वजह है कि अब वे बीमारियां, जो कभी बढ़ती उम्र से जोड़ी जाती थीं, आज 20 से 50 साल के लोगों में आम होती जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ओपीडी में आने वाले मरीजों की उम्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बड़ी संख्या में युवा अब डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट से जुड़ी समस्याओं के साथ डॉक्टरों तक पहुंच रहे हैं।
युवाओं में कौन-कौन सी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं?
आज की युवा आबादी में कई स्वास्थ्य परेशानियां एक साथ देखने को मिल रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- मोटापा और ब्लड शुगर की समस्या
कम शारीरिक गतिविधि के कारण वजन बढ़ रहा है और HbA1C लेवल सामान्य से ऊपर पाया जा रहा है। - विटामिन की कमी
विटामिन D और विटामिन B12 की कमी अब लगभग हर दूसरे व्यक्ति में देखी जा रही है। - दिल और रक्त से जुड़ी दिक्कतें
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और होमोसिस्टीन लेवल भविष्य में गंभीर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा रहे हैं। - रीढ़ और जोड़ों की परेशानी
लंबे समय तक गलत तरीके से बैठकर काम करने से गर्दन, कमर दर्द और डिस्क प्रोलैप्स के मामले बढ़े हैं।
कम उम्र में ही बीमारियों की जड़ क्या है?
30–40 की उम्र में ही पुरानी बीमारियों का शिकार होने के पीछे कुछ आम लेकिन खतरनाक आदतें जिम्मेदार हैं:
- बैठकर बिताया गया पूरा दिन – 9–10 घंटे कुर्सी पर बैठे रहना और एक्सरसाइज न करना
- अनहेल्दी डाइट – जंक फूड, फास्ट फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजों का ज्यादा सेवन
- नींद की कमी और तनाव – रोज़ाना 6–7 घंटे से कम नींद और लगातार मानसिक दबाव
- नशे की आदतें – स्मोकिंग और शराब शरीर के मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंचा रहे हैं
सेहत को कैसे रखें कंट्रोल में?
अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर लिए जाएं, तो इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है:
- नींद और व्यायाम को प्राथमिकता दें
रोज़ कम से कम 7 घंटे की नींद और 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी ज़रूरी है। - दिनभर एक्टिव रहें
अगर ऑफिस का काम बैठकर करना पड़ता है, तो हर 40–45 मिनट में उठकर थोड़ा चलना फायदेमंद है। - खानपान सुधारें
डाइट में प्रोटीन बढ़ाएं, रिफाइंड कार्ब्स और चीनी कम करें। कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाइयों से दूरी बनाएं। - नशा और तनाव से दूरी
स्मोकिंग और शराब छोड़ें। मेडिटेशन, योग या वॉक जैसी गतिविधियों से तनाव कम करें। - रेगुलर हेल्थ चेकअप
साल में कम से कम एक बार पूरी बॉडी की जांच कराएं ताकि बीमारी शुरुआती दौर में ही पकड़ में आ जाए।




