रविवार क्यों है छुट्टी का दिन? मजदूर संघर्ष और ऐतिहासिक परंपरा की कहानी

रविवार क्यों है छुट्टी का दिन? मजदूर संघर्ष और ऐतिहासिक परंपरा की कहानी

भारत में रविवार अब हर किसी के लिए आराम और वीकेंड का दिन है, लेकिन कभी ऐसा नहीं था। ब्रिटिश शासन के दौरान मुंबई की कपड़ा मिलों में मजदूरों को सप्ताह के सातों दिन लगातार काम करना पड़ता था। लंबे समय तक लगातार काम से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था।


मजदूरों के लिए बदलाव लाए नारायण मेघाजी लोखंडे

मजदूरों के अधिकारों के लिए साल 1881 से 1888 तक नारायण मेघाजी लोखंडे ने संघर्ष किया। उन्होंने विरोध प्रदर्शन किए और ब्रिटिश प्रशासन तक मजदूरों की मांग पहुंचाई। सात साल की मेहनत और मजदूरों की एकजुटता के बाद, 10 जून 1890 को भारत में रविवार को आधिकारिक साप्ताहिक छुट्टी घोषित की गई।


रविवार का दिन क्यों चुना गया

  • ब्रिटिश दृष्टिकोण: ईसाई धर्म में रविवार चर्च जाने का दिन था।
  • भारतीय परिप्रेक्ष्य: सूर्य देव और कुछ क्षेत्रों में भगवान खंडोबा की पूजा का दिन भी रविवार माना जाता था। इससे मजदूरों को आराम और धार्मिक पालन दोनों का अवसर मिला।

1700 साल पुरानी परंपरा

रविवार को आराम का दिन घोषित करने की परंपरा भारत में ब्रिटिश काल से पहले भी यूरोप में मौजूद थी। साल 321 ईस्वी में रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट ने रोमन साम्राज्य में रविवार को आराम का दिन घोषित किया था। धीरे-धीरे यह परंपरा ब्रिटेन के प्रशासनिक तंत्र में आई और फिर भारत तक पहुंची।


आज जब हम रविवार को आराम करते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं, तो इसके पीछे मजदूरों की मेहनत, सामाजिक न्याय और इतिहास की लंबी परंपरा छिपी हुई है।