इजरायल–ईरान हमले पर नया खुलासा: पीएम मोदी के दौरे के बाद क्यों बना सैन्य हालात?

इजरायल–ईरान हमले पर नया खुलासा: पीएम मोदी के दौरे के बाद क्यों बना सैन्य हालात?

इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले को लेकर समय और वजहों पर अब अलग तरह से बात सामने आई है। भारत में तैनात इजरायली राजदूत रूवेन अजार का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। उनके मुताबिक, यह फैसला किसी राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान नहीं, बल्कि बाद में सामने आए हालात के आधार पर लिया गया।

अजार ने बताया कि जब प्रधानमंत्री मोदी इजरायल में थे, तब तक यह साफ नहीं था कि ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कदम उठाया जाएगा। मोदी के भारत लौटने के बाद खुफिया एजेंसियों से ऐसी जानकारी मिली, जिसने एक रणनीतिक अवसर तैयार किया। इसी इनपुट के आधार पर कार्रवाई पर विचार किया गया और आगे की प्रक्रिया शुरू हुई। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल से लौटने के करीब दो दिन बाद सुरक्षा कैबिनेट ने हमले की अनुमति दी। इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। अजार ने दो टूक कहा कि यह निर्णय किसी राजनयिक दौरे की वजह से नहीं, बल्कि पूरी तरह ऑपरेशनल जरूरतों के चलते लिया गया।

इजरायली पक्ष का दावा है कि ईरान से उन्हें लंबे समय से सुरक्षा खतरा बना हुआ है। राजदूत ने कहा कि ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता और हथियारों का जखीरा पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहा है। इसी आशंका को देखते हुए इजरायल ने वहां अपने खुफिया तंत्र को पहले से मजबूत किया हुआ था। हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़े हैं। ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके चलते क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं और तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और वैश्विक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

गौर करने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी के अंत में दो दिन के आधिकारिक दौरे पर इजरायल गए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए और द्विपक्षीय रिश्तों को नई मजबूती मिली। हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि इसके तुरंत बाद शुरू हुई सैन्य घटनाएं उस यात्रा का नतीजा नहीं थीं, बल्कि हालात के बदलने से लिया गया रणनीतिक फैसला थीं।