देश में कितना है कोयला स्टॉक, और अगर LPG खत्म हो जाए तो क्या होगा असर?

देश में कितना है कोयला स्टॉक, और अगर LPG खत्म हो जाए तो क्या होगा असर?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और गर्मी के मौसम की दस्तक के साथ भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. खासकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के आसपास हालात बिगड़ने से एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में देश के ऊर्जा सेक्टर से आई ताजा जानकारी राहत देने वाली है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने इस बार कोयले का रिकॉर्ड भंडार तैयार कर लिया है. कुल स्टॉक करीब 21 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी कारणवश कोयले का उत्पादन पूरी तरह रुक भी जाए, तो मौजूदा खपत के हिसाब से यह भंडार लगभग 88 दिनों तक बिजली की जरूरतें पूरी कर सकता है.

बिजलीघरों की स्थिति भी मजबूत नजर आ रही है. देश के थर्मल पावर प्लांट्स में इस समय करीब 5.41 करोड़ टन कोयला मौजूद है, जिससे लगभग 24 दिनों तक लगातार बिजली उत्पादन संभव है. वहीं, खदानों में भी भारी मात्रा में कोयला जमा है. कोल इंडिया और अन्य खदानों के पास कुल मिलाकर 15 करोड़ टन से ज्यादा पिटहेड स्टॉक उपलब्ध है, जो सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने में मदद करेगा.

अगर पिछले साल के मुकाबले देखें, तो कोयला भंडारण में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अप्रैल 2025 में जहां कोल इंडिया के पास करीब 10.68 करोड़ टन कोयला था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 12 करोड़ टन से अधिक हो गया. इसके अलावा, सिंगरेनी कोलियरीज और अन्य वाणिज्यिक खदानों के पास भी अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद है. करीब 1.4 करोड़ टन कोयला इस समय परिवहन के जरिए अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जा रहा है.

एलपीजी को लेकर स्थिति थोड़ी चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% गैस आयात करता है. अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं और सप्लाई प्रभावित होती है, तो घरेलू उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इस स्थिति में बिजली एक मजबूत विकल्प बनकर उभर सकती है.

यदि रसोई गैस की कमी होती है, तो लोग इंडक्शन स्टोव और इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर रुख कर सकते हैं. चूंकि देश की अधिकांश बिजली उत्पादन कोयले पर आधारित है, इसलिए यह बड़ा कोयला भंडार बढ़ती बिजली मांग को संभालने में अहम भूमिका निभा सकता है. यही वजह है कि मौजूदा हालात में कोयले का यह स्टॉक देश के लिए एक मजबूत बैकअप साबित हो रहा है।