ईरान ने मौजूदा संघर्ष को लेकर अपना रुख और कड़ा कर दिया है। साफ शब्दों में कहा गया है कि जब तक युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक लड़ाई जारी रहेगी। साथ ही तेहरान ने यह भी मांग रखी है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं और अमेरिका की ओर से भविष्य में किसी भी तरह की दखलअंदाजी न करने की ठोस गारंटी दी जाए।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश इस समय किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि सेना पूरी ताकत के साथ अपने ऑपरेशन चला रही है और नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में हालात को मजबूती से संभाला जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ी तो संघर्ष को लंबा खींचने के लिए भी तैयार है।
रजेई ने यह भी दावा किया कि यह जंग इतनी लंबी नहीं खिंचनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, शुरुआती दौर में ही संघर्ष खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख ने हालात को बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि एक समय पर अमेरिका युद्धविराम के लिए राजी था और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले जारी रखने पर जोर दिया, जिससे टकराव बढ़ता चला गया।
उनके अनुसार, युद्ध के लगभग दो हफ्ते बाद अमेरिका को भी यह समझ आने लगा था कि इस संघर्ष में किसी भी पक्ष के लिए स्पष्ट जीत संभव नहीं है, फिर भी हालात काबू में नहीं आ सके और लड़ाई जारी रही। वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले ही संकेत दे चुके हैं कि देश की जनता हमलावरों को कड़ी सजा देने के पक्ष में है। उन्होंने कहा था कि आम लोग चाहते हैं कि इस हमले का जवाब पूरी ताकत से दिया जाए, जिससे दुश्मनों को कड़ा संदेश मिले।
कुल मिलाकर, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसकी प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं चाहे वह मुआवजा हो, प्रतिबंधों का अंत हो या अमेरिका की गैर-दखल की गारंटी तब तक संघर्ष खत्म होने की संभावना बेहद कम है।




