ईरान युद्ध में बढ़ती दरार, नेतन्याहू की आक्रामक रणनीति से ट्रंप पर बढ़ा दबाव

ईरान युद्ध में बढ़ती दरार, नेतन्याहू की आक्रामक रणनीति से ट्रंप पर बढ़ा दबाव

ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अमेरिका और इज़राइल के बीच सोच का अंतर साफ नजर आने लगा है। जहां एक तरफ Donald Trump इस युद्ध से जल्दी बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं, वहीं Benjamin Netanyahu इसे निर्णायक लड़ाई मानकर पूरी ताकत झोंकने के पक्ष में हैं। इज़राइल ने हाल के दिनों में ईरान के ऊर्जा और जल ढांचे को निशाना बनाया है। तेल भंडार, गैस फील्ड और पानी से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स पर हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका इस रणनीति से असहज है क्योंकि इससे वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ रहा है और कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इज़राइल को कुछ अहम ऊर्जा ठिकानों पर हमले से पहले अनुमति लेने को कहा है। खासकर उन जगहों पर जहां हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा झटका लग सकता है। इसके बावजूद इज़राइल अपनी रणनीति में ज्यादा बदलाव करता नहीं दिख रहा। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर खतरा बढ़ गया है और Strait of Hormuz के बंद होने जैसी स्थिति ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं।

ट्रंप के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। अमेरिका में इस युद्ध को लेकर समर्थन कम है और चुनावी माहौल में बढ़ती महंगाई उनकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। ऐसे में वे किसी समझौते या सीमित जीत के साथ इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं। वहीं नेतन्याहू का फोकस अलग है। उनका लक्ष्य ईरान की सैन्य और राजनीतिक ताकत को पूरी तरह खत्म करना है, भले ही इसके लिए लंबे समय तक संघर्ष क्यों न करना पड़े। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इज़राइल ईरान में अस्थिरता पैदा कर सत्ता परिवर्तन की दिशा में काम कर रहा है।

हालांकि सार्वजनिक तौर पर दोनों देश एकजुट नजर आते हैं, लेकिन अंदरखाने रणनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि लंबा खिंचता युद्ध अमेरिका के लिए भारी पड़ सकता है, जबकि इज़राइल इस जोखिम को उठाने के लिए तैयार है। इस बीच यह भी साफ है कि दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय काफी गहरा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इज़राइली सेना मिलकर ऑपरेशन चला रहे हैं, जिससे यह कहना मुश्किल है कि कोई भी बड़ा कदम बिना आपसी सहमति के उठाया जा रहा है।

फिलहाल, बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जल्द ही बातचीत हो सकती है, लेकिन तेहरान ने इन दावों को खारिज करते हुए लड़ाई जारी रखने की बात कही है। आखिरकार, इस पूरे संघर्ष का असर सबसे ज्यादा ट्रंप की छवि और अमेरिका की वैश्विक साख पर पड़ सकता है। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।