अमेरिका में इस साल के अंत तक डॉलर नोटों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति Donald Trump के हस्ताक्षर अमेरिकी करेंसी पर छापे जाने की तैयारी है। अगर यह फैसला पूरी तरह लागू होता है, तो ऐसा पहली बार होगा जब किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति के साइन डॉलर नोट पर दिखाई देंगे।
दरअसल, यह पहल अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का मानना है कि यह कदम देश की उपलब्धियों और नेतृत्व को सम्मान देने का एक प्रतीकात्मक तरीका है। ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने भी इसे एक “गौरवपूर्ण निर्णय” बताया है।
पुरानी परंपरा में बदलाव संभव
अब तक अमेरिकी करेंसी पर ट्रेजरी सेक्रेटरी और ट्रेजरर, दोनों के हस्ताक्षर छपते रहे हैं। यह व्यवस्था 1914 से चली आ रही है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत ट्रेजरर का नाम हटाकर उसकी जगह राष्ट्रपति ट्रंप के सिग्नेचर जोड़े जा सकते हैं। हालांकि, यह साफ नहीं किया गया है कि यह बदलाव सभी नोटों पर होगा या सीमित सीरीज में ही रहेगा।
इतिहास से जुड़ी है सिग्नेचर की परंपरा
अमेरिकी मुद्रा पर हस्ताक्षर की शुरुआत 1861 में हुई थी, जब Abraham Lincoln ने इससे जुड़ा कानून पारित किया था। तब से यह परंपरा लगातार जारी है, लेकिन राष्ट्रपति के सिग्नेचर जोड़ना एक नया और अनोखा कदम माना जा रहा है।
ट्रंप की पहचान मजबूत करने की कोशिश
व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनसे राष्ट्रीय संस्थानों पर उनकी छाप दिखे। इससे पहले वे अपने चित्र वाली 1 डॉलर कॉइन, 24 कैरेट गोल्ड स्मारक सिक्का और कुछ प्रमुख संस्थानों के नाम से जुड़ी पहल कर चुके हैं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कोविड-19 राहत चेक्स पर भी अपने हस्ताक्षर शामिल कराए थे।
फैसले पर बंटी राय
इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक और उचित कदम बता रहे हैं, जबकि कई अर्थशास्त्री इसकी जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान के दौर में ऐसे बदलाव का प्रभाव सीमित रह सकता है। वहीं, कुछ जानकारों का मानना है कि अगर ये नोट जारी होते हैं तो भविष्य में कलेक्टर्स के बीच इनकी मांग काफी बढ़ सकती है।
विवाद की संभावना भी कायम
अमेरिकी करेंसी में बदलाव अक्सर बहस का विषय बनते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, Harriet Tubman को 20 डॉलर के नोट पर लाने की योजना भी पहले चर्चा में रही, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका। ऐसे में ट्रंप के सिग्नेचर वाला यह कदम भी आने वाले समय में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का कारण बन सकता है।




