भारत की नई गैस रणनीति: अंगोला समेत कई देशों से LPG आयात पर फोकस

भारत की नई गैस रणनीति: अंगोला समेत कई देशों से LPG आयात पर फोकस

भारत में रसोई गैस की बढ़ती मांग और मौजूदा वैश्विक तनावों के बीच सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां अब सप्लाई के नए विकल्प तलाश रही हैं। खासतौर पर खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए अफ्रीका के देश अंगोला के साथ LPG खरीद को लेकर बातचीत शुरू की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और गेल जैसी कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ लॉन्ग-टर्म डील पर विचार कर रही हैं। हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और सरकारी स्तर पर भी चर्चा जारी है।

खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश

इस समय भारत अपनी करीब 92% LPG जरूरतें UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से पूरी करता है। इन सभी देशों से आने वाली गैस एक ही अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह रूट जोखिम भरा माना जा रहा है, इसलिए वैकल्पिक सप्लाई चेन पर जोर दिया जा रहा है।

अंगोला क्यों बना बेहतर विकल्प

अंगोला पहले से भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक भरोसा मौजूद है। वहां प्रोपेन और ब्यूटेन की उपलब्धता LPG उत्पादन के लिए अनुकूल है। साथ ही, समुद्री मार्ग से 12 से 18 दिनों में गैस भारत पहुंच सकती है, जो सप्लाई के लिहाज से फायदेमंद है।

अगर यह समझौता होता है, तो पहली बार भारत अंगोला से LPG आयात करेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अफ्रीका से सप्लाई अमेरिका की तुलना में तेज और अधिक व्यावहारिक हो सकती है।

अन्य देशों से भी बातचीत जारी

भारत केवल अंगोला तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस आयात के विकल्पों पर काम कर रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है, किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को अधिक सुरक्षित बनाना।

बढ़ती मांग, स्थिर उत्पादन

देश में LPG की खपत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर है। पिछले कुछ वर्षों में आयात में करीब 40% की वृद्धि हुई है, जबकि उत्पादन में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। सरकारी योजनाओं, खासकर उज्ज्वला योजना के चलते अब देश में 33 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन सक्रिय हैं, जिससे मांग लगातार बढ़ रही है।

उद्योगों पर भी असर संभव

गैस की कमी का असर केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्टिलाइजर और स्टील जैसे बड़े उद्योगों पर भी पड़ सकता है। यदि सप्लाई बाधित रहती है, तो कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है।

सरकार का आश्वासन

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दो बड़े जहाज करीब 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर रवाना भी किए गए हैं। भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सप्लाई के नए रास्ते और नए साझेदार तलाश रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी संकट का असर कम किया जा सके।